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मदावरा-तुमकुरु मेट्रो परियोजना की डीपीआर कर्नाटक सरकार को सौंपी, ₹20,649 करोड़ की योजना अब कैबिनेट के पास

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मदावरा-तुमकुरु मेट्रो परियोजना की डीपीआर कर्नाटक सरकार को सौंपी, ₹20,649 करोड़ की योजना अब कैबिनेट के पास

सारांश

₹20,649 करोड़ की मदावरा-तुमकुरु मेट्रो परियोजना की डीपीआर कर्नाटक सरकार को सौंप दी गई है। 59.6 किमी लंबे इस पीपीपी कॉरिडोर में 27 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। अब फैसला राज्य मंत्रिमंडल के हाथ में है।

मुख्य बातें

मदावरा-तुमकुरु मेट्रो रेल परियोजना की डीपीआर 23 मई 2026 को विधान सौधा में कर्नाटक सरकार को सौंपी गई।
परियोजना की अनुमानित लागत ₹20,649 करोड़ ; कॉरिडोर की लंबाई 59.6 किलोमीटर ।
कॉरिडोर में 27 एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित; विकास पीपीपी मॉडल के तहत होगा।
डीपीआर गृह मंत्री जी.
परमेश्वर ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश और बीएमआरसीएल अधिकारियों की उपस्थिति में प्राप्त की।
परमेश्वर ने कहा, डीपीआर को चर्चा और निर्णय के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
व्यवहार्यता अध्ययन और डीपीआर आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स द्वारा तैयार की गई।

कर्नाटक सरकार को 23 मई 2026 को प्रस्तावित मदावरा-तुमकुरु मेट्रो रेल परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) विधान सौधा, बेंगलुरु में औपचारिक रूप से सौंप दी गई। ₹20,649 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह अंतर-शहरी मेट्रो परियोजना अब राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए तैयार है।

मुख्य घटनाक्रम

कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) तुषार गिरिनाथ और बैंगलोर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में यह डीपीआर प्राप्त की। परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि इस रिपोर्ट को शीघ्र ही राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।

परमेश्वर ने कहा, 'मदावरा-तुमकुरु मेट्रो रेल परियोजना की डीपीआर रिपोर्ट कैबिनेट में ले जाई जाएगी। वहाँ इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी और आगे का फैसला लिया जाएगा।'

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

यह परियोजना नम्मा मेट्रो की ग्रीन लाइन के उत्तरी टर्मिनल मदावरा से तुमकुरु तक 59.6 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का विस्तार करेगी। इसमें 27 एलिवेटेड स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है और इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।

परियोजना की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स ने किया, जिन्हें बीएमआरसीएल ने डीपीआर तैयार करने का ठेका भी दिया था। इस प्रक्रिया में फील्ड सर्वे, ट्रैफिक आकलन और भू-तकनीकी जाँच शामिल रही।

तुमकुरु-बेंगलुरु जुड़ाव पर विवाद

डीपीआर सौंपे जाने के अवसर पर गृह मंत्री परमेश्वर ने निवेश आकर्षित करने के लिए तुमकुरु को बेंगलुरु से नाम-जोड़ने के अपने पूर्व सुझाव का भी बचाव किया, जिस पर पहले विवाद उठ चुका था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य तुमकुरु की अलग पहचान मिटाना नहीं है।

परमेश्वर ने नोएडा का उदाहरण देते हुए कहा, 'उदाहरण के तौर पर नोएडा दिल्ली क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन उसने अपनी अलग पहचान बनाए रखी है।' उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर विकास कार्यों का विरोध करने का आरोप भी लगाया।

आगे की राह

डीपीआर की आधिकारिक प्रस्तुति के बाद अब कैबिनेट अनुमोदन, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य का मार्ग प्रशस्त हो गया है। गौरतलब है कि यह परियोजना बेंगलुरु और तुमकुरु के बीच औद्योगिक एवं शैक्षणिक संपर्क को मज़बूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही परियोजना क्रियान्वयन की अगली कड़ी शुरू होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

649 करोड़ की यह परियोजना कागज़ पर महत्वाकांक्षी है, लेकिन पीपीपी मॉडल पर निर्भरता एक परिचित जोखिम लेकर आती है — कर्नाटक में अतीत में कई बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ निजी भागीदारी की अनिश्चितता के कारण लंबित रही हैं। डीपीआर सौंपने और कैबिनेट मंजूरी के बीच की दूरी अक्सर राजनीतिक और वित्तीय जटिलताओं से भरी होती है। तुमकुरु को बेंगलुरु से 'नाम जोड़ने' का विवाद बताता है कि इस परियोजना के इर्द-गिर्द स्थानीय पहचान की राजनीति भी सक्रिय है, जो क्रियान्वयन की गति को प्रभावित कर सकती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मदावरा-तुमकुरु मेट्रो परियोजना क्या है?
यह नम्मा मेट्रो की ग्रीन लाइन के उत्तरी टर्मिनल मदावरा से तुमकुरु तक प्रस्तावित 59.6 किलोमीटर लंबा मेट्रो विस्तार कॉरिडोर है, जिसकी अनुमानित लागत ₹20,649 करोड़ है। इसमें 27 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे और इसे पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।
डीपीआर किसने तैयार की और इसे कब सौंपा गया?
डीपीआर आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स ने तैयार की, जिन्हें बीएमआरसीएल ने यह ठेका दिया था। यह रिपोर्ट 23 मई 2026 को विधान सौधा में कर्नाटक सरकार को औपचारिक रूप से सौंपी गई।
इस परियोजना पर आगे क्या होगा?
गृह मंत्री जी. परमेश्वर के अनुसार, डीपीआर को चर्चा और निर्णय के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य शुरू होगा।
परियोजना का वित्तपोषण किस मॉडल पर होगा?
इस परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स द्वारा तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन पूरा किया जा चुका है।
तुमकुरु को बेंगलुरु से जोड़ने के सुझाव पर विवाद क्यों हुआ?
गृह मंत्री परमेश्वर ने निवेश आकर्षित करने के लिए तुमकुरु के नाम को बेंगलुरु से जोड़ने का सुझाव दिया था, जिस पर विवाद उठा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य तुमकुरु की अलग पहचान बदलना नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के लिए भौगोलिक निकटता का लाभ उठाना है।
राष्ट्र प्रेस
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