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खड़गपुर-भद्रक चौथी रेलवे लाइन को कैबिनेट की मंजूरी, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने PM मोदी का जताया आभार

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खड़गपुर-भद्रक चौथी रेलवे लाइन को कैबिनेट की मंजूरी, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने PM मोदी का जताया आभार

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने खड़गपुर-भद्रक 173 किमी चौथी रेलवे लाइन को हरी झंडी दी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसे पूर्वी तटीय कॉरिडोर और माल ढुलाई के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। यह परियोजना खड़गपुर रूट की भीड़ घटाएगी और स्टील, कोयला व कंटेनर लॉजिस्टिक्स को नई रफ्तार देगी।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी रेलवे लाइन परियोजना को मंजूरी दी।
यह रेलवे लाइन 173 किलोमीटर लंबी है और पश्चिम बंगाल को ओडिशा से जोड़ती है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 20 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर PM मोदी का आभार व्यक्त किया।
परियोजना से स्टील, कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, ऑटोमोबाइल और अनाज की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी।
स्थानीय उद्योग, एमएसएमई और बंदरगाहों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद; हाईवे पर भीड़ भी घटेगी।
BJP ने इसे "डबल-इंजन सरकार" की उपलब्धि बताया; परियोजना की विस्तृत समयसीमा अभी घोषित नहीं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल के खड़गपुर को ओडिशा के भद्रक (रानीताल) से जोड़ने वाली 173 किलोमीटर लंबी चौथी रेलवे लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। 20 अगस्त को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट का आभार व्यक्त किया और इसे पूर्वी तटीय कॉरिडोर के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।

परियोजना का विवरण

यह 173 किलोमीटर की मल्टी-ट्रैकिंग पहल पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। मुख्यमंत्री अधिकारी के अनुसार, यह परियोजना व्यस्त खड़गपुर रूट पर भीड़ कम करेगी और ट्रैक क्षमता बढ़ाएगी, जिससे यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू, तेज़ और समयबद्ध होगा। गौरतलब है कि खड़गपुर जंक्शन पूर्वी भारत के सबसे व्यस्त रेलवे हब में से एक है और इस रूट पर क्षमता की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है।

माल ढुलाई और औद्योगिक लाभ

मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "यह माल ढुलाई (फ्रेट लॉजिस्टिक्स) के लिए भी एक बड़ा बढ़ावा साबित होगा, क्योंकि इससे स्टील, कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, ऑटोमोबाइल, कंटेनर और अनाज जैसी ज़रूरी चीज़ों के परिवहन की क्षमता बढ़ेगी।" इस परियोजना से स्थानीय उद्योगों, एमएसएमई और बंदरगाहों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल और पूर्वी राज्यों के बीच एक विश्वसनीय और कुशल सप्लाई चेन नेटवर्क औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य नेतृत्व ने इस मंजूरी को राज्य में "डबल-इंजन सरकार" के सकारात्मक परिणामों का प्रमाण बताया। BJP की राज्य समिति के एक सदस्य ने कहा, "ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने अपनी सारी कोशिशें केंद्र सरकार से झगड़ने में बर्बाद कर दीं, लेकिन हमारी नई सरकार राज्य में सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए केंद्र के साथ लगातार सहयोग कर रही है।" यह बयान स्पष्ट रूप से पिछली TMC सरकार और वर्तमान BJP नेतृत्व के बीच के अंतर को रेखांकित करता है।

आम जनता और पर्यावरण पर असर

अधिकारी ने यह भी कहा कि इस रेलवे लाइन के चालू होने से हाईवे पर माल ढुलाई का बोझ कम होगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी और ईंधन की बचत भी संभव होगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वी भारत में रेल अवसंरचना को प्राथमिकता दे रही है और इस क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री अधिकारी ने परियोजना के शीघ्र और निर्बाध क्रियान्वयन की उम्मीद जताते हुए कहा, "बुनियादी ढाँचे का विकास तरक्की के लिए ज़रूरी है। हम रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए इस कदम का स्वागत करते हैं और पश्चिम बंगाल के लोगों के फायदे के लिए इसके तेज़ी से पूरा होने की उम्मीद करते हैं।" परियोजना की समयसीमा और लागत का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी घोषणा का राजनीतिक समय उतना ही महत्वपूर्ण है जितना परियोजना स्वयं — यह पश्चिम बंगाल में BJP सरकार के लिए एक प्रतीकात्मक जीत है। असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी: पूर्वी भारत में कई रेल परियोजनाएँ दशकों तक कागजों पर रहती हैं। 173 किमी की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना की लागत, समयसीमा और भू-अधिग्रहण की चुनौतियाँ अभी सार्वजनिक नहीं हैं — और यही वह जानकारी है जो जनता को सबसे पहले मिलनी चाहिए थी।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खड़गपुर-भद्रक चौथी रेलवे लाइन परियोजना क्या है?
यह पश्चिम बंगाल के खड़गपुर को ओडिशा के भद्रक (रानीताल) से जोड़ने वाली 173 किलोमीटर लंबी मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजना है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी है। यह पूर्वी तटीय कॉरिडोर को मजबूत करेगी और व्यस्त खड़गपुर रूट पर क्षमता बढ़ाएगी।
इस रेलवे परियोजना से किसे फायदा होगा?
इस परियोजना से यात्री ट्रेनों का संचालन सुचारू होगा और स्टील, कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, ऑटोमोबाइल व अनाज की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी। स्थानीय उद्योग, एमएसएमई, बंदरगाह और हाईवे पर निर्भर लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस परियोजना पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 20 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर PM नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी और माल ढुलाई के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन की उम्मीद जताई।
यह परियोजना पूर्वी तटीय कॉरिडोर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
खड़गपुर जंक्शन पूर्वी भारत के सबसे व्यस्त रेलवे हब में से एक है। चौथी रेलवे लाइन इस रूट पर भीड़ घटाएगी, ट्रैक क्षमता बढ़ाएगी और पश्चिम बंगाल व ओडिशा के बीच एक विश्वसनीय सप्लाई चेन नेटवर्क स्थापित करेगी, जो पूरे पूर्वी तटीय कॉरिडोर को मजबूत करेगा।
BJP ने इस मंजूरी को 'डबल-इंजन सरकार' से क्यों जोड़ा?
BJP के राज्य नेतृत्व ने दावा किया कि यह मंजूरी केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने के सकारात्मक परिणाम का उदाहरण है। पार्टी ने पिछली TMC सरकार पर केंद्र से टकराव की नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए वर्तमान सहयोगात्मक दृष्टिकोण को विकास का आधार बताया।
राष्ट्र प्रेस
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