ओडिशा-झारखंड में ₹3,907 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी, 145 किमी बढ़ेगा नेटवर्क
सारांश
मुख्य बातें
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने बुधवार, 15 जुलाई को ओडिशा और झारखंड के चार जिलों में फैली ₹3,907 करोड़ की दो मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लिए गए निर्णय से भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 145 किलोमीटर का विस्तार होगा।
परियोजनाओं में क्या शामिल है
दोनों परियोजनाएं मल्टी-ट्रैकिंग पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य मौजूदा रेल मार्गों पर भीड़भाड़ घटाना और ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाना है। सरकार के अनुसार, ये परियोजनाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिनका लक्ष्य एकीकृत योजना और बहु-हितधारक सहयोग के ज़रिए मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मज़बूत करना है।
इन मार्गों पर कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसी खनिज एवं औद्योगिक वस्तुओं का परिवहन होता है, जिससे यह क्षेत्र के औद्योगिक ढाँचे के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
आम जनता और गाँवों पर असर
सरकारी बयान के अनुसार, इन परियोजनाओं से करीब 1,526 गाँवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जहाँ लगभग 14 लाख की आबादी निवास करती है। इसके अलावा, ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बालदेवज्यू मंदिर और मेघाहातुबुरु हिल्स जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुँच भी सुलभ होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वी भारत के आदिवासी-बहुल ज़िलों में बुनियादी ढाँचे की कमी लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। गौरतलब है कि ओडिशा और झारखंड दोनों राज्य खनिज-समृद्ध होने के बावजूद रेल संपर्क के मामले में पिछड़े माने जाते हैं।
माल ढुलाई और पर्यावरण लाभ
परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हर वर्ष अतिरिक्त 44 मिलियन टन (एमटीपीए) माल परिवहन संभव हो सकेगा। सरकार का दावा है कि रेलवे परिवहन के विस्तार से लगभग 6 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी — जो लगभग 1 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरणीय लाभ के समान है।
कैबिनेट के बयान में कहा गया कि ये परियोजनाएं देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में सहायक होंगी।
रोज़गार और विकास की संभावनाएं
सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से क्षेत्र में रोज़गार और स्वरोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। कैबिनेट ने इन्हें प्रधानमंत्री मोदी के 'न्यू इंडिया' विज़न और क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के अनुरूप बताया है।
आगे क्या होगा
मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और निविदा प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित होगा। भारतीय रेलवे की परिचालन क्षमता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार के साथ, पूर्वी भारत के इस खनिज-समृद्ध गलियारे में क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।