पश्चिम बंगाल को रेलवे की तीन बड़ी सौगात: शालबनी-आद्रा तीसरी लाइन, नई ट्रेन और NJP-सिलीगुड़ी दोहरीकरण सर्वे मंजूर

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पश्चिम बंगाल को रेलवे की तीन बड़ी सौगात: शालबनी-आद्रा तीसरी लाइन, नई ट्रेन और NJP-सिलीगुड़ी दोहरीकरण सर्वे मंजूर

सारांश

रेल मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल को एक साथ तीन रेलवे परियोजनाओं की मंजूरी दी है — 107 किमी शालबनी-आद्रा तीसरी लाइन का सर्वे, संतरागाछी-खातीपुरा नई ट्रेन और NJP-सिलीगुड़ी 7.15 किमी दोहरीकरण सर्वे। राज्य में पहली बार BJP सरकार बनने के बाद केंद्र-राज्य समन्वय का यह पहला बड़ा रेल संकेत है।

मुख्य बातें

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 15 मई 2026 को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को पत्र भेजकर तीन रेलवे परियोजनाओं की मंजूरी की जानकारी दी।
शालबनी-आद्रा तीसरी रेल लाइन (लगभग 107 किमी ) के लिए FLS और DPR तैयार करने को स्वीकृति मिली।
संतरागाछी-खातीपुरा एक्सप्रेस वाया खड़गपुर — कोलकाता से जयपुर के बीच नई ट्रेन के परिचालन को हरी झंडी।
न्यू जलपाईगुड़ी से सिलीगुड़ी जंक्शन के बीच लगभग 7.15 किमी नई रेल लाइन (दोहरीकरण) के सर्वे को मंजूरी।
पश्चिम बंगाल में पहली बार BJP सरकार बनने के बाद केंद्र-राज्य समन्वय से रेल परियोजनाओं में तेज़ी आने की उम्मीद।

रेल मंत्रालय ने 15 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के लिए तीन महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को अलग-अलग पत्र भेजकर इन स्वीकृतियों की जानकारी दी। इन परियोजनाओं में नई रेल लाइन सर्वे, यात्री ट्रेन परिचालन और रेल कनेक्टिविटी विस्तार शामिल हैं।

मुख्य परियोजनाएँ: क्या मिली मंजूरी

पहली परियोजना के तहत शालबनी-आद्रा तीसरी रेल लाइन — जो लगभग 107 किलोमीटर लंबी है — के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की अनुमति दी गई है। यह परियोजना पश्चिम मेदिनीपुर और पुरुलिया जिलों के बीच रेल संपर्क को सुदृढ़ करेगी।

दूसरी मंजूरी के अंतर्गत कोलकाता (संतरागाछी) से जयपुर (खातीपुरा) के बीच नई संतरागाछी-खातीपुरा एक्सप्रेस वाया खड़गपुर के परिचालन को स्वीकृति दी गई है। यह ट्रेन पश्चिम बंगाल को राजस्थान से सीधे जोड़ेगी और यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में सुविधा देगी।

तीसरी परियोजना में न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) से सिलीगुड़ी जंक्शन के बीच लगभग 7.15 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन (दोहरीकरण) के सर्वे कार्य को अनुमति दी गई है। उत्तर बंगाल के इस व्यस्त रेल गलियारे पर दोहरीकरण से यातायात दबाव कम होने और ट्रेन परिचालन की गति बढ़ने की उम्मीद है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि: केंद्र-राज्य समन्वय

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी है और सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला है। केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने से रेलवे सहित अन्य बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में समन्वय सुगम होने का अनुमान है।

यह ऐसे समय में आया है जब पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में कई केंद्रीय परियोजनाएँ राज्य-केंद्र टकराव के कारण लंबित पड़ी थीं। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक संरेखण से विकास परियोजनाओं में तेज़ी आना स्वाभाविक है, हालाँकि वास्तविक क्रियान्वयन की गति ही असली कसौटी होगी।

उत्तर बंगाल पर असर

NJP-सिलीगुड़ी दोहरीकरण उत्तर बंगाल के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह गलियारा सिक्किम, दार्जिलिंग और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ने वाला प्रमुख रेल प्रवेश द्वार है। रेल यातायात में वृद्धि से पर्यटन और व्यापार दोनों को बल मिलने की संभावना है।

आगे क्या

फिलहाल तीनों परियोजनाओं के लिए सर्वे और DPR चरण को मंजूरी दी गई है। निर्माण कार्य की शुरुआत DPR पूरी होने और बजटीय आवंटन के बाद ही संभव होगी। रेल मंत्रालय के अनुसार ये कदम पश्चिम बंगाल के रेल नेटवर्क के दीर्घकालिक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

निर्माण की नहीं। पश्चिम बंगाल में दशकों से कई रेल परियोजनाएँ सर्वे के बाद ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। असली कसौटी यह होगी कि ये परियोजनाएँ बजट आवंटन और ज़मीनी क्रियान्वयन तक कितनी तेज़ी से पहुँचती हैं — घोषणाओं से विकास नहीं मापा जाता, ईंट-पत्थर से मापा जाता है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल के लिए रेल मंत्रालय ने कौन-सी तीन परियोजनाएँ मंजूर की हैं?
रेल मंत्रालय ने तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है: शालबनी-आद्रा 107 किमी तीसरी रेल लाइन का सर्वे व DPR, संतरागाछी-खातीपुरा एक्सप्रेस (वाया खड़गपुर) का परिचालन, और न्यू जलपाईगुड़ी-सिलीगुड़ी जंक्शन के बीच 7.15 किमी दोहरीकरण का सर्वे।
संतरागाछी-खातीपुरा एक्सप्रेस कहाँ से कहाँ चलेगी?
यह नई ट्रेन कोलकाता के संतरागाछी स्टेशन से जयपुर के खातीपुरा स्टेशन तक खड़गपुर होते हुए चलेगी। यह पश्चिम बंगाल और राजस्थान के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित करेगी।
NJP-सिलीगुड़ी दोहरीकरण से उत्तर बंगाल को क्या फायदा होगा?
न्यू जलपाईगुड़ी से सिलीगुड़ी जंक्शन के बीच दोहरीकरण से इस व्यस्त गलियारे पर ट्रेन परिचालन की क्षमता बढ़ेगी। इससे दार्जिलिंग, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी और यातायात दबाव कम होगा।
क्या ये परियोजनाएँ तुरंत शुरू होंगी?
अभी तीनों परियोजनाओं के लिए सर्वे और DPR चरण को मंजूरी मिली है। निर्माण कार्य DPR पूरी होने और रेल बजट में आवंटन के बाद ही शुरू होगा, जिसमें समय लग सकता है।
सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद रेलवे परियोजनाओं पर क्या असर पड़ा?
पश्चिम बंगाल में पहली बार BJP सरकार बनने के बाद केंद्र-राज्य समन्वय सुगम होने की उम्मीद जताई जा रही है। रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री अधिकारी को सीधे पत्र भेजकर तीन परियोजनाओं की मंजूरी दी, जिसे इस समन्वय का प्रारंभिक संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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