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जम्मू-कटरा और हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर के लिए ₹1,200 करोड़ के रेल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को केंद्र की मंजूरी

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जम्मू-कटरा और हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर के लिए ₹1,200 करोड़ के रेल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को केंद्र की मंजूरी

सारांश

केंद्र सरकार ने ₹1,200 करोड़ के दो रेल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी — जम्मू-कटरा सेक्शन पर ₹238 करोड़ की सुरक्षा योजना और हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर ₹962 करोड़ का 54 किमी लंबा किउल-झाझा थर्ड लाइन प्रोजेक्ट। यह कदम दो रणनीतिक रूप से अहम रेल मार्गों पर क्षमता और सुरक्षा दोनों को एक साथ साधने की कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 19 मई 2025 को ₹1,200 करोड़ के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी।
जम्मू–श्री माता वैष्णो देवी कटरा सेक्शन पर ढलान स्थिरीकरण, सुरंग पुनर्वास और पुल संरक्षण के लिए ₹238 करोड़ स्वीकृत।
54 किलोमीटर लंबे किउल-झाझा थर्ड लाइन प्रोजेक्ट को ₹962 करोड़ की लागत से मंजूरी; हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ेगी।
यह कॉरिडोर कोलकाता व हल्दिया बंदरगाहों को रक्सौल (नेपाल सीमा) से जोड़ता है और भारी माल ढुलाई को संभालता है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने परियोजनाओं को देश के चुनौतीपूर्ण इलाकों में सुरक्षित रेल कनेक्टिविटी की प्रतिबद्धता बताया।

केंद्र सरकार ने 19 मई 2025 को जम्मू-कटरा और हावड़ा-दिल्ली रेल कॉरिडोर पर सुरक्षा, कनेक्टिविटी और परिचालन दक्षता को मज़बूत करने के लिए कुल ₹1,200 करोड़ के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति दी है। रेल मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की।

जम्मू-कटरा सेक्शन: ₹238 करोड़ की सुरक्षा योजना

उत्तरी रेलवे के जम्मू–श्री माता वैष्णो देवी कटरा सेक्शन के लिए ₹238 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसमें ढलान स्थिरीकरण, सुरंगों का पुनर्वास, पानी के रिसाव का समाधान, पुल संरक्षण कार्य और संवेदनशील स्थानों पर अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

यह सेक्शन कठिन भू-भाग, प्रतिकूल भूवैज्ञानिक परिस्थितियों और खराब मौसम के कारण लंबे समय से इंजीनियरिंग व परिचालन चुनौतियों का सामना करता रहा है। मंत्रालय के अनुसार, कटिंग, पुलों और सुरंगों का विस्तृत आकलन करने के बाद ये कार्य स्वीकृत किए गए हैं।

केंद्रीय रेल मंत्री की प्रतिक्रिया

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये परियोजनाएँ देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में सुरक्षित और भरोसेमंद रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेक्शन की दीर्घकालिक सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए ये कदम उठाए गए हैं।

सरकार के अनुसार, इन उपायों से यह मार्ग अधिक मज़बूत बनेगा और प्रतिवर्ष इस रूट पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा में सुधार होगा।

किउल-झाझा थर्ड लाइन: ₹962 करोड़ की क्षमता विस्तार परियोजना

दूसरे बड़े फैसले में सरकार ने 54 किलोमीटर लंबे किउल-झाझा थर्ड लाइन प्रोजेक्ट को ₹962 करोड़ की लागत से मंजूरी दी है। यह परियोजना उच्च घनत्व वाले हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर का हिस्सा है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, किउल और झाझा के बीच मौजूदा डबल लाइन सेक्शन अभी अपनी क्षमता से अधिक दबाव में काम कर रहा है और आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर पर ट्रैफिक और बढ़ने की संभावना है। थर्ड लाइन से लाइन क्षमता में बड़ा सुधार होगा, भीड़भाड़ कम होगी और यात्री व मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुगम बनेगी।

रणनीतिक और औद्योगिक महत्व

यह कॉरिडोर कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को बिहार के रक्सौल से जोड़ता है, जो नेपाल सीमा के निकट स्थित है। गौरतलब है कि यह मार्ग बरह एसटीपीपी, जवाहर एसटीपीपी और बीरगंज आईसीडी जैसे प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े भारी माल ढुलाई ट्रैफिक को भी संभालता है।

पूर्वी और उत्तरी भारत के बीच व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को देखते हुए यह परियोजना केवल यात्री सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक कनेक्टिविटी की दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

दोनों परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और विस्तृत कार्यक्रम रेल मंत्रालय द्वारा जल्द जारी किए जाने की संभावना है। इन परियोजनाओं से पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के बीच रेल नेटवर्क को दीर्घकालिक मज़बूती मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 करोड़ की यह स्वीकृति दो बिल्कुल अलग-अलग ज़रूरतों को एक साथ संबोधित करती है — एक ओर जम्मू-कटरा सेक्शन की पुरानी भूवैज्ञानिक कमज़ोरियाँ, दूसरी ओर हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर की क्षमता संतृप्ति। किउल-झाझा सेक्शन का ओवरलोड होना कोई नई बात नहीं है — यह वर्षों से रेलवे की वार्षिक रिपोर्टों में दर्ज है, लेकिन थर्ड लाइन की मंजूरी अब मिली है। असली कसौटी यह होगी कि क्रियान्वयन तय समय में होता है या नहीं, क्योंकि भारतीय रेलवे की बड़ी परियोजनाओं में लागत और समय दोनों के अतिक्रमण का इतिहास रहा है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकार ने किन रेल प्रोजेक्ट्स को ₹1,200 करोड़ की मंजूरी दी है?
सरकार ने दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है — जम्मू-कटरा सेक्शन पर सुरक्षा व पुनर्वास कार्यों के लिए ₹238 करोड़ और हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर के किउल-झाझा थर्ड लाइन प्रोजेक्ट के लिए ₹962 करोड़। दोनों को मिलाकर कुल स्वीकृत राशि ₹1,200 करोड़ है।
जम्मू-कटरा रेल सेक्शन पर क्या काम होगा?
उत्तरी रेलवे के जम्मू–श्री माता वैष्णो देवी कटरा सेक्शन पर ढलान स्थिरीकरण, सुरंगों का पुनर्वास, पानी रिसाव का समाधान, पुल संरक्षण और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कार्य किए जाएँगे। यह सेक्शन कठिन भू-भाग और खराब मौसम के कारण लंबे समय से चुनौतियों का सामना करता रहा है।
किउल-झाझा थर्ड लाइन प्रोजेक्ट क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?
यह 54 किलोमीटर लंबी थर्ड रेल लाइन है जो हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर किउल और झाझा के बीच बनेगी। मौजूदा डबल लाइन सेक्शन क्षमता से अधिक दबाव में काम कर रहा है, इसलिए थर्ड लाइन से भीड़भाड़ कम होगी और यात्री व मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम बनेगी।
हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर का रणनीतिक महत्व क्या है?
यह कॉरिडोर कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को बिहार के रक्सौल (नेपाल सीमा) से जोड़ता है। इसके साथ ही बरह एसटीपीपी, जवाहर एसटीपीपी और बीरगंज आईसीडी जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के भारी माल ढुलाई ट्रैफिक को भी यही कॉरिडोर संभालता है।
इन परियोजनाओं से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
जम्मू-कटरा सेक्शन पर सुरक्षा उपायों से प्रतिवर्ष लाखों यात्रियों की यात्रा अधिक सुरक्षित होगी, जबकि किउल-झाझा थर्ड लाइन से पूर्वी और उत्तरी भारत के बीच ट्रेनों की समयपालनता और आवृत्ति में सुधार अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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