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भारतीय रेलवे ने गुजरात-महाराष्ट्र में ₹665 करोड़ की नई रेल परियोजनाओं को दी हरी झंडी

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भारतीय रेलवे ने गुजरात-महाराष्ट्र में ₹665 करोड़ की नई रेल परियोजनाओं को दी हरी झंडी

सारांश

भारतीय रेलवे ने एक साथ तीन परियोजनाओं को हरी झंडी दी — गुजरात के कच्छ में ₹493 करोड़ की आदिपुर-भुज दोहरीकरण, महाराष्ट्र में ₹172 करोड़ की सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन और इंदौर में ₹139 करोड़ का शास्त्री ब्रिज पुनर्निर्माण। ये कदम यात्री क्षमता, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने की दिशा में हैं।

मुख्य बातें

भारतीय रेलवे ने 17 जून 2026 को गुजरात और महाराष्ट्र में कुल ₹665 करोड़ की दो प्रमुख रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी।
गुजरात में 49 किलोमीटर लंबी आदिपुर-भुज दोहरीकरण परियोजना ( ₹493 करोड़ ) से प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई और दोनों दिशाओं में प्रतिदिन 2 अतिरिक्त यात्री ट्रेनें संभव होंगी।
महाराष्ट्र में 3.7 किलोमीटर लंबी सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन ( ₹172 करोड़ ) से पनवेल जंक्शन की भीड़ कम होगी और प्रत्येक मालगाड़ी का 110 मिनट का समय बचेगा।
सोमटणे-चिखली लाइन से प्रतिवर्ष लगभग 90 लाख टन अतिरिक्त माल यातायात क्षमता विकसित होगी और जेएनपीए (देश के 60% कंटेनर यातायात का संचालक) को सीधा लाभ मिलेगा।
मध्य प्रदेश के इंदौर में शास्त्री ब्रिज के पुनर्निर्माण को ₹139 करोड़ की लागत से अलग से मंजूरी दी गई।

भारतीय रेलवे ने 17 जून 2026 को गुजरात और महाराष्ट्र में दो महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी — गुजरात के कच्छ क्षेत्र में ₹493 करोड़ की आदिपुर-भुज दोहरीकरण परियोजना और महाराष्ट्र में ₹172 करोड़ की सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन। इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य यात्री एवं माल यातायात की बढ़ती माँग को पूरा करना और नेटवर्क की परिचालन दक्षता में सुधार करना है।

आदिपुर-भुज दोहरीकरण: कच्छ को मिलेगी दोगुनी क्षमता

गुजरात के कच्छ क्षेत्र में 49 किलोमीटर लंबी आदिपुर-भुज रेललाइन को दोहरा किया जाएगा। आधिकारिक बयान के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर दोनों दिशाओं में प्रतिदिन दो अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और प्रतिवर्ष लगभग 1.2 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी।

यह परियोजना इसलिए भी अहम है क्योंकि वर्तमान में यह सेक्शन गांधीधाम-नालिया कॉरिडोर की एकल-लाइन रेलमार्ग है। क्षेत्र में चल रही कई रेल परियोजनाओं — जैसे भुज-नालिया गेज परिवर्तन, नालिया-वायोर रेल लाइन विस्तार और नालिया-जखाऊ, वायोर-लखपत तथा देशलपर-लूना के बीच नई रेल लाइनों के निर्माण — के पूरा होने के बाद इस मार्ग पर यातायात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। इसी भविष्य की माँग को ध्यान में रखते हुए दोहरीकरण को स्वीकृति दी गई है।

सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन: पनवेल की भीड़ होगी कम

मध्य रेलवे के अंतर्गत ₹172 करोड़ की लागत से बनने वाली 3.7 किलोमीटर लंबी सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन करजात मार्ग के चिखली और रोहा मार्ग के सोमटणे के बीच एक महत्वपूर्ण रेल संपर्क स्थापित करेगी। यह संपर्क अब तक अनुपस्थित था।

पनवेल जंक्शन मुंबई क्षेत्र का सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शन है, जहाँ रोहा, जेएनपीटी, करजात और दीवा — चार प्रमुख दिशाओं से रेल यातायात आता है। वर्तमान में करजात और रोहा मार्गों के बीच सीधा संपर्क न होने के कारण ट्रेनों को पनवेल जंक्शन में प्रवेश कर इंजन बदलना पड़ता है, जिससे परिचालन में देरी और भीड़ बढ़ती है।

नई कॉर्ड लाइन के चालू होने के बाद मालगाड़ियाँ सीधे पनवेल को बायपास कर सकेंगी, जिससे प्रत्येक मालगाड़ी का लगभग 110 मिनट का समय बचेगा। इसके अलावा इस लाइन से प्रतिवर्ष लगभग 90 लाख टन अतिरिक्त माल यातायात क्षमता विकसित होगी।

जेएनपीए के लिए विशेष महत्व

यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (जेएनपीए) से जुड़े माल परिवहन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जेएनपीए देश के लगभग 60 प्रतिशत कंटेनर यातायात को संभालता है। वर्तमान में करजात, जसई और रोहा मार्गों के बीच चलने वाली मालगाड़ियों को पनवेल जंक्शन पर इंजन बदलना पड़ता है — नई लाइन इस अड़चन को दूर करेगी और लॉजिस्टिक्स दक्षता में बड़ा सुधार लाएगी।

इंदौर में रोड ओवर ब्रिज को भी मंजूरी

इन दोनों परियोजनाओं के साथ ही भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश के इंदौर यार्ड में स्थित शास्त्री ब्रिज (रोड ओवर ब्रिज) के पुनर्निर्माण को भी ₹139 करोड़ की लागत से मंजूरी दी है। यह पुल शहर की परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा और रेल-सड़क संपर्क को बेहतर बनाएगा। यह परियोजना रेलवे के रोड ओवर ब्रिज एवं बुनियादी ढाँचा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृत की गई है।

रेलवे की व्यापक क्षमता विस्तार रणनीति

गौरतलब है कि ये तीनों परियोजनाएँ भारतीय रेलवे के उस व्यापक क्षमता विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा हैं जिसके तहत देश भर में दोहरीकरण, तिहरीकरण और नेटवर्क विस्तार के कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के रेल नेटवर्क पर यात्री और माल यातायात दोनों में लगातार वृद्धि हो रही है और बुनियादी ढाँचे की क्षमता बढ़ाना प्राथमिकता बन गई है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में रेल परिचालन की गति, सुरक्षा और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति की होगी: भारतीय रेलवे की अनेक परियोजनाएँ स्वीकृति के बाद भूमि अधिग्रहण और ठेकेदारी विवादों में वर्षों तक उलझी रहती हैं। कच्छ क्षेत्र में एक साथ कई परियोजनाओं के चलने से समन्वय की चुनौती भी बड़ी होगी। यदि ये परियोजनाएँ समयबद्ध पूरी होती हैं, तो पश्चिम भारत के औद्योगिक और बंदरगाह क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिलना तय है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदिपुर-भुज दोहरीकरण परियोजना क्या है और इसकी लागत कितनी है?
यह गुजरात के कच्छ क्षेत्र में 49 किलोमीटर लंबे आदिपुर-भुज रेलखंड को सिंगल-लाइन से डबल-लाइन में बदलने की परियोजना है, जिसकी अनुमानित लागत ₹493 करोड़ है। इसके पूरा होने के बाद दोनों दिशाओं में प्रतिदिन दो अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी।
सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन से पनवेल जंक्शन पर क्या फर्क पड़ेगा?
3.7 किलोमीटर लंबी यह कॉर्ड लाइन करजात और रोहा मार्गों को सीधे जोड़ेगी, जिससे ट्रेनों को अब पनवेल जंक्शन में प्रवेश कर इंजन बदलने की ज़रूरत नहीं होगी। इससे पनवेल जंक्शन पर भीड़ कम होगी और प्रत्येक मालगाड़ी का लगभग 110 मिनट का समय बचेगा।
जेएनपीए के लिए सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन क्यों महत्वपूर्ण है?
जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (जेएनपीए) देश के लगभग 60 प्रतिशत कंटेनर यातायात को संभालता है। वर्तमान में इससे जुड़ी मालगाड़ियों को पनवेल जंक्शन पर इंजन बदलना पड़ता है, जिससे समय और परिचालन लागत बढ़ती है। नई कॉर्ड लाइन के चालू होने के बाद मालगाड़ियाँ सीधे पनवेल को बायपास कर सकेंगी।
इंदौर शास्त्री ब्रिज पुनर्निर्माण परियोजना क्या है?
मध्य प्रदेश के इंदौर यार्ड में स्थित शास्त्री ब्रिज (रोड ओवर ब्रिज) के पुनर्निर्माण को ₹139 करोड़ की लागत से मंजूरी दी गई है। यह परियोजना रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा बढ़ाने और शहर के रेल-सड़क संपर्क को मज़बूत करने के उद्देश्य से स्वीकृत की गई है।
ये रेल परियोजनाएँ किस व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा हैं?
ये परियोजनाएँ भारतीय रेलवे के क्षमता विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृत की गई हैं, जिसके तहत देश भर में दोहरीकरण, तिहरीकरण और नेटवर्क विस्तार के कार्य किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ने वाले यात्री और माल यातायात की माँग को पूरा करना है।
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