55,000 किमी ट्रैक नवीनीकरण: भारतीय रेलवे नेटवर्क हुआ ऐतिहासिक रूप से मजबूत, पीएमओ ने साझा की बड़ी उपलब्धि
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 23 अप्रैल। भारतीय रेलवे ट्रैक नवीनीकरण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है — वर्ष 2014 से अब तक लगभग 55,000 किलोमीटर रेल पटरियों का आधुनिकीकरण किया जा चुका है, जिससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी है, देरी घटी है और यात्रा पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह जानकारी साझा की।
रेलवे ट्रैक आधुनिकीकरण की मुख्य उपलब्धियां
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के एक मीडिया लेख का लिंक पीएमओ ने अपनी पोस्ट में शामिल किया, जिसमें भारत के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प का विस्तृत विवरण दिया गया है। इस लेख में बताया गया है कि किस तरह उन्नत निरीक्षण तकनीकों, मशीनीकृत रखरखाव और ट्रैक उन्नयन ने रेल नेटवर्क को नई ऊंचाई दी है।
इन सुधारों का सबसे बड़ा लाभ वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी हाई-स्पीड ट्रेन सेवाओं को मिला है, जो अब बेहतर और मजबूत पटरियों पर तेज रफ्तार से दौड़ रही हैं।
80,000 किमी से अधिक मजबूत रेल की स्थापना
ट्रैक नवीनीकरण के साथ-साथ 80,000 किलोमीटर से अधिक लंबाई में 60 किलोग्राम भार वाली भारी-भरकम रेल बिछाई गई हैं। ये रेल भारी माल ढुलाई और तेज रफ्तार ट्रेनों का बोझ आसानी से वहन करने में सक्षम हैं।
यह कदम रेलवे की दोहरी जरूरत — यात्री परिवहन और माल परिवहन — दोनों को एक साथ पूरा करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ है।
रोजाना 2 करोड़ यात्री और विशाल माल ढुलाई नेटवर्क
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने लेख में बताया कि भारत में प्रतिदिन 25,000 से अधिक ट्रेनें संचालित होती हैं, जो हर दिन 2 करोड़ से ज्यादा यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। इसके अलावा, कोयला, लोहा, अनाज, स्टील और सीमेंट जैसी आवश्यक वस्तुओं की विशाल मात्रा भी इसी नेटवर्क के माध्यम से देश के कोने-कोने तक पहुंचाई जाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे रेल तंत्र की आधारशिला ट्रैक ही है। अच्छी स्थिति का ट्रैक ट्रेनों को तेज और निर्बाध गति देता है, जबकि जर्जर पटरियां दुर्घटनाओं और देरी को आमंत्रण देती हैं।
अल्ट्रासोनिक तकनीक से 90% तक घटे ट्रैक फेलियर के मामले
रेल मंत्री ने बताया कि करीब एक दशक पहले शुरू किए गए इस महत्वाकांक्षी आधुनिकीकरण कार्यक्रम में अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (USFD) तकनीक को विशेष रूप से अपनाया गया है। इस तकनीक के जरिए लाखों किलोमीटर ट्रैक और करोड़ों वेल्ड की गहन जांच की गई है।
यूएसएफडी तकनीक पटरियों के भीतर छिपी सूक्ष्म दरारों को समय रहते पकड़ लेती है, जिससे रेल और वेल्ड फेलियर के मामलों में करीब 90 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इसके साथ ही ट्रैक के किनारे सुरक्षा फेंसिंग लगाने जैसे उपायों ने भी दुर्घटनाओं की आशंका को काफी हद तक कम किया है।
भारतीय रेलवे के इस व्यापक आधुनिकीकरण अभियान के आने वाले वर्षों में और तेज होने की उम्मीद है, जिससे देश का रेल नेटवर्क वैश्विक मानकों के और करीब पहुंचेगा और करोड़ों यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।