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नालंदा विश्वविद्यालय में 19 सदस्यीय संसदीय दल का दौरा, वैश्विक शिक्षा और बौद्ध पर्यटन पर मंथन

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नालंदा विश्वविद्यालय में 19 सदस्यीय संसदीय दल का दौरा, वैश्विक शिक्षा और बौद्ध पर्यटन पर मंथन

सारांश

करीब 800 वर्षों की खामोशी के बाद पुनर्जीवित नालंदा विश्वविद्यालय अब संसद की नज़र में है। 19 सांसदों के दल ने राजगीर पहुँचकर वैश्विक शिक्षा केंद्र और बौद्ध पर्यटन गंतव्य के रूप में इस क्षेत्र की संभावनाओं को परखा — और सुधा मूर्ति से मनोज तिवारी तक, सबने एक ही सुर में प्राचीन गौरव की वापसी की उम्मीद जताई।

मुख्य बातें

संजय कुमार झा के नेतृत्व में 19 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने 26 अगस्त 2025 को नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर का दौरा किया।
विश्वविद्यालय में वर्तमान में 1,000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी भी शामिल हैं।
परिसर नेट-जीरो है — अक्षय ऊर्जा, स्वतंत्र जल प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढाँचे से सुसज्जित।
सुधा मूर्ति , राजीव प्रताप रूड़ी , मनोज तिवारी और इमरान प्रतापगढ़ी सहित कई सांसदों ने विश्वविद्यालय की वैश्विक क्षमता की सराहना की।
नालंदा-राजगीर क्षेत्र को समेकित बौद्ध एवं विरासत पर्यटन गंतव्य बनाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
बिहार के विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने और विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय दृश्यता मजबूत करने पर सहमति बनी।

परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में 19 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने 26 अगस्त 2025 को राजगीर, नालंदा स्थित नालंदा विश्वविद्यालय का अध्ययन दौरा किया। लोकसभा और राज्यसभा — दोनों सदनों के सांसदों को शामिल करने वाले इस प्रतिनिधिमंडल का परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पारंपरिक स्वागत किया गया। यह दौरा नालंदा-राजगीर क्षेत्र को एक समेकित विरासत एवं बौद्ध पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की व्यापक समीक्षा का हिस्सा था।

मुख्य घटनाक्रम

प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया और कुलपति, शिक्षकों, अधिकारियों तथा विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय स्वरूप, परिसर विकास और प्राचीन नालंदा की विरासत को आधुनिक वैश्विक ज्ञान-केंद्र के रूप में पुनर्जीवित करने के प्रयासों पर विस्तृत जानकारी ली गई।

नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में 1,000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें विभिन्न देशों से आए अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी भी शामिल हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के अंतर-सांस्कृतिक शैक्षणिक वातावरण और बढ़ते वैश्विक शैक्षणिक सहयोग पर भी प्रकाश डाला।

नेट-जीरो परिसर और पर्यावरण-अनुकूल ढाँचा

प्रतिनिधिमंडल को विश्वविद्यालय के नेट-जीरो परिसर की विशेषताओं से अवगत कराया गया, जिसमें अक्षय ऊर्जा, स्वतंत्र जल प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढाँचे की समेकित व्यवस्था शामिल है। समिति के सदस्यों ने प्राचीन नालंदा की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक टिकाऊ परिसर से जोड़ने के इन प्रयासों में विशेष रुचि दिखाई।

संजय कुमार झा ने कहा कि करीब 800 वर्षों के बाद नालंदा को फिर से विकसित करने की परिकल्पना आज ठोस रूप ले चुकी है। उन्होंने विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और परिसर की स्वावलंबी ऊर्जा एवं जल व्यवस्था की सराहना की।

सांसदों की प्रतिक्रिया

राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति ने नालंदा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि नया नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन नालंदा की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप वैश्विक प्रतिष्ठा हासिल करेगा। राजीव प्रताप रूड़ी ने ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक और पर्यावरण-सचेत परिसर से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की।

मनोज तिवारी ने विश्वविद्यालय में जारी विकास कार्यों और नालंदा के शैक्षणिक एवं पर्यटन परिवेश को और सुदृढ़ करने की संभावनाओं को रेखांकित किया। इमरान प्रतापगढ़ी ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों के साथ संवाद को दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बताया।

विरासत पर्यटन और भविष्य की संभावनाएँ

बैठक में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने, बिहार के विद्यार्थियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने और विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय दृश्यता मजबूत करने पर चर्चा हुई। साथ ही नालंदा-राजगीर क्षेत्र में बौद्ध और विरासत पर्यटन के व्यापक विकास की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। गौरतलब है कि यह क्षेत्र यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में पहले से ही वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करता है, और नए विश्वविद्यालय परिसर के आने से इसकी अपील और बढ़ने की उम्मीद है।

प्रतिनिधिमंडल में अजय कुमार मंडल, अनुराग शर्मा, देवेश चंद्र ठाकुर, के. ई. प्रकाश, मियां अल्ताफ अहमद, राहुल कासवान, सुरेश कुमार शेटकर, विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी, गोला बाबू राव, केशरी देव सिंह दिग्विजय झाला, नदीमुल हक, आर. के. चौधरी, एस. कल्याण सुंदरम और जून मालिया भी शामिल रहे। यह दौरा संसदीय समिति की उस व्यापक पहल का हिस्सा है जिसके तहत भारत के प्रमुख विरासत और शैक्षणिक स्थलों की संभावनाओं का प्रत्यक्ष आकलन किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि समिति की सिफारिशें ज़मीन पर कब और कैसे उतरेंगी। नालंदा-राजगीर क्षेत्र में पर्यटन अवसंरचना अभी भी उस स्तर पर नहीं है जो वैश्विक बौद्ध सर्किट के अनुरूप हो — बोधगया से तुलना करें तो अंतर स्पष्ट है। विश्वविद्यालय का नेट-जीरो परिसर और अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी समुदाय उत्साहजनक संकेत हैं, परंतु बिहार के स्थानीय विद्यार्थियों की सीमित पहुँच एक विरोधाभास है जिसे संसदीय समिति को भी स्वीकार करना होगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नालंदा विश्वविद्यालय में संसदीय समिति का दौरा क्यों हुआ?
परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने नालंदा-राजगीर क्षेत्र की विरासत, पर्यटन अवसंरचना और शैक्षणिक संभावनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा के लिए यह दौरा आयोजित किया। इसका उद्देश्य क्षेत्र को एक समेकित बौद्ध एवं विरासत पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की नीतिगत संभावनाएँ तलाशना था।
नालंदा विश्वविद्यालय में अभी कितने विद्यार्थी पढ़ते हैं?
कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी के अनुसार, वर्तमान में विश्वविद्यालय में 1,000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें विभिन्न देशों से आए अंतरराष्ट्रीय शोधार्थी भी शामिल हैं, जो विश्वविद्यालय के अंतर-सांस्कृतिक शैक्षणिक वातावरण को दर्शाता है।
नालंदा विश्वविद्यालय का नेट-जीरो परिसर क्या है?
नालंदा विश्वविद्यालय का परिसर नेट-जीरो है, यानी यह अपनी ऊर्जा और जल आवश्यकताओं के लिए स्वावलंबी है। परिसर में अक्षय ऊर्जा स्रोत, स्वतंत्र जल प्रबंधन प्रणाली और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढाँचा स्थापित किया गया है।
इस दौरे में कौन-से प्रमुख सांसद शामिल थे?
दौरे में राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति, राजीव प्रताप रूड़ी, मनोज तिवारी, इमरान प्रतापगढ़ी सहित कुल 19 सांसद शामिल थे। दल का नेतृत्व संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने किया।
नालंदा-राजगीर में बौद्ध पर्यटन विकास की क्या योजना है?
संसदीय समिति की बैठक में नालंदा-राजगीर क्षेत्र को एक समेकित बौद्ध एवं विरासत पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसमें पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार और विश्वविद्यालय की वैश्विक दृश्यता बढ़ाना शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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