गुजरात ACB का एक्शन: सूरजबाड़ी वन चेकपोस्ट पर ₹100 रिश्वत लेते दो गिरफ्तार, वन रक्षक भी आरोपी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 24 अगस्त 2026 को कच्छ जिले के भचाऊ तालुका स्थित सूरजबाड़ी वन चेकपोस्ट पर एक व्यक्ति को लकड़ी के ट्रांजिट पास पर मुहर लगाने के बदले ₹100 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोचा। इस कार्रवाई में भचाऊ नॉर्मल रेंज में तैनात वन रक्षक को भी आरोपी बनाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
ACB को गोपनीय शिकायतों के ज़रिए जानकारी मिली थी कि सूरजबाड़ी वन चेकपोस्ट पर तैनात कुछ कर्मचारी और उनके सहयोगी कच्छ से लकड़ी ले जाने वाले वाहनों के चालकों से अवैध वसूली कर रहे हैं। इस जानकारी के आधार पर एजेंसी ने एक सतर्क नागरिक की मदद से ट्रैप ऑपरेशन की योजना तैयार की।
एसीबी के अनुसार, लकड़ी परिवहन के ट्रांजिट पास पर मुहर लगाने और रजिस्टर में प्रविष्टि दर्ज करने के एवज़ में ₹100 से ₹1,000 तक की रिश्वत माँगी जा रही थी। यह वसूली नियमित रूप से की जा रही थी, जो इसे एक व्यवस्थित भ्रष्टाचार की श्रेणी में रखती है।
गिरफ्तारी का विवरण
ट्रैप के दौरान जमनासा उस्मान सैयद, निवासी बुधर मोरा, तहसील अंजार (कच्छ), ने कथित तौर पर ट्रांजिट पास पर मुहर लगाने और आवश्यक प्रविष्टि करने के बदले ₹100 की माँग की। जैसे ही सैयद ने रिश्वत की यह राशि स्वीकार की, ACB की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
एजेंसी के अनुसार, सैयद यह काम भचाऊ नॉर्मल रेंज में तैनात वन रक्षक हर्षभाई हेमराजभाई चौधरी के निर्देश पर कर रहा था। रिश्वत की ₹100 की राशि मौके से बरामद कर ली गई है।
जाँच की स्थिति
इस मामले की जाँच गांधीधाम स्थित कच्छ (पूर्व) ACB पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक एचवी चौधरी कर रहे हैं। ACB ने रिश्वत माँगने और स्वीकार करने के आरोप में जमनासा उस्मान सैयद और वन रक्षक हर्षभाई हेमराजभाई चौधरी दोनों को आरोपी बनाया है।
आम जनता और वन विभाग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात में वन उपज के परिवहन को लेकर नियम पहले से ही सख्त हैं। गौरतलब है कि ट्रांजिट पास प्रणाली को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया था, लेकिन इस मामले ने उस प्रणाली में खामियों को उजागर किया है। आलोचकों का कहना है कि चेकपोस्ट पर निगरानी तंत्र को और मज़बूत करने की ज़रूरत है।
क्या होगा आगे
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि यह वसूली कितने समय से चल रही थी और इसमें और कितने लोग शामिल हो सकते हैं। ACB के इस ऑपरेशन से वन विभाग के भीतर अनुशासन की समीक्षा की माँग भी उठ सकती है।