गुजरात एसीबी ने बोपाल पुलिस स्टेशन के SI और हेड कांस्टेबल को ₹5 लाख रिश्वत लेते दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को अहमदाबाद ग्रामीण के बोपाल पुलिस स्टेशन में तैनात सब-इंस्पेक्टर प्रीतल चौधरी और हेड कांस्टेबल दिलीपकुमार भोई को ₹5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने एक शिकायतकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रोकने के बदले यह राशि वसूल की।
मामले की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क किया क्योंकि बोपाल पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ दायर एक आवेदन की जाँच इन्हीं अधिकारियों द्वारा की जा रही थी। जाँच के दौरान, आरोपी अधिकारियों ने कथित तौर पर पहले ₹10 लाख की माँग रखी — यह सुनिश्चित करने के लिए कि शिकायतकर्ता के विरुद्ध कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज न हो। बातचीत के बाद यह माँग कथित तौर पर घटाकर ₹5 लाख कर दी गई।
जाल और गिरफ्तारी
शिकायत मिलते ही खेड़ा एसीबी टीम ने स्वतंत्र पंच गवाहों के साथ मिलकर एक सुनियोजित जाल बिछाया। ऑपरेशन के दौरान हेड कांस्टेबल दिलीपकुमार भोई ने शिकायतकर्ता से ₹5 लाख नकद लिए और तत्काल सब-इंस्पेक्टर प्रीतल चौधरी को मोबाइल फोन पर स्पीकर मोड पर सूचित किया। चौधरी ने कथित तौर पर फोन पर ही अपनी सहमति दी। भोई को मौके पर नकदी सहित पकड़ा गया, जबकि चौधरी उस समय घटनास्थल पर उपस्थित नहीं थे। जब्त की गई पूरी ₹5 लाख की राशि बरामद कर ली गई।
कानूनी कार्रवाई
दोनों अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। एसीबी के अनुसार जाँच जारी है और आगे की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
गुजरात में एसीबी की व्यापक कार्रवाई
यह मामला गुजरात में पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एसीबी की हालिया कार्रवाइयों की श्रृंखला में एक और कड़ी है। अहमदाबाद ग्रामीण में ही एक अन्य घटना में एक सहायक सब-इंस्पेक्टर और ग्राम रक्षक दल के दो सदस्यों को एक कॉस्मेटिक निर्माता से कथित तौर पर ₹30,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था — जबकि उन्होंने पहले इससे अधिक राशि की माँग की थी। तीनों को फर्जी ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया गया और नकदी मौके से बरामद कर ली गई।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात पुलिस की साख पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। एसीबी की इन लगातार कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि राज्य में भ्रष्टाचार-विरोधी निगरानी तंत्र अधिक सक्रिय हो रहा है। आरोपी अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जाँच की प्रक्रिया भी प्रारंभ होने की संभावना है।