27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुजरात एसीबी ने बोपाल पुलिस स्टेशन के SI और हेड कांस्टेबल को ₹5 लाख रिश्वत लेते दबोचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुजरात एसीबी ने बोपाल पुलिस स्टेशन के SI और हेड कांस्टेबल को ₹5 लाख रिश्वत लेते दबोचा

सारांश

गुजरात एसीबी ने अहमदाबाद के बोपाल पुलिस स्टेशन में तैनात दो अधिकारियों को ₹5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा — यह राज्य में पुलिस भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की बढ़ती कार्रवाइयों की ताज़ा कड़ी है।

मुख्य बातें

गुजरात एसीबी ने 26 जून 2026 को बोपाल पुलिस स्टेशन के SI प्रीतल चौधरी और हेड कांस्टेबल दिलीपकुमार भोई को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने कथित तौर पर पहले ₹10 लाख माँगे, बातचीत के बाद ₹5 लाख में सौदा तय हुआ।
खेड़ा एसीबी टीम ने स्वतंत्र पंच गवाहों के साथ जाल बिछाकर ₹5 लाख नकद बरामद किए।
दोनों अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज।
अहमदाबाद ग्रामीण में एक अन्य घटना में ASI समेत 3 पुलिसकर्मियों को ₹30,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया।

गुजरात भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को अहमदाबाद ग्रामीण के बोपाल पुलिस स्टेशन में तैनात सब-इंस्पेक्टर प्रीतल चौधरी और हेड कांस्टेबल दिलीपकुमार भोई को ₹5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने एक शिकायतकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रोकने के बदले यह राशि वसूल की।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क किया क्योंकि बोपाल पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ दायर एक आवेदन की जाँच इन्हीं अधिकारियों द्वारा की जा रही थी। जाँच के दौरान, आरोपी अधिकारियों ने कथित तौर पर पहले ₹10 लाख की माँग रखी — यह सुनिश्चित करने के लिए कि शिकायतकर्ता के विरुद्ध कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज न हो। बातचीत के बाद यह माँग कथित तौर पर घटाकर ₹5 लाख कर दी गई।

जाल और गिरफ्तारी

शिकायत मिलते ही खेड़ा एसीबी टीम ने स्वतंत्र पंच गवाहों के साथ मिलकर एक सुनियोजित जाल बिछाया। ऑपरेशन के दौरान हेड कांस्टेबल दिलीपकुमार भोई ने शिकायतकर्ता से ₹5 लाख नकद लिए और तत्काल सब-इंस्पेक्टर प्रीतल चौधरी को मोबाइल फोन पर स्पीकर मोड पर सूचित किया। चौधरी ने कथित तौर पर फोन पर ही अपनी सहमति दी। भोई को मौके पर नकदी सहित पकड़ा गया, जबकि चौधरी उस समय घटनास्थल पर उपस्थित नहीं थे। जब्त की गई पूरी ₹5 लाख की राशि बरामद कर ली गई।

कानूनी कार्रवाई

दोनों अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। एसीबी के अनुसार जाँच जारी है और आगे की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।

गुजरात में एसीबी की व्यापक कार्रवाई

यह मामला गुजरात में पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एसीबी की हालिया कार्रवाइयों की श्रृंखला में एक और कड़ी है। अहमदाबाद ग्रामीण में ही एक अन्य घटना में एक सहायक सब-इंस्पेक्टर और ग्राम रक्षक दल के दो सदस्यों को एक कॉस्मेटिक निर्माता से कथित तौर पर ₹30,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था — जबकि उन्होंने पहले इससे अधिक राशि की माँग की थी। तीनों को फर्जी ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया गया और नकदी मौके से बरामद कर ली गई।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात पुलिस की साख पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। एसीबी की इन लगातार कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि राज्य में भ्रष्टाचार-विरोधी निगरानी तंत्र अधिक सक्रिय हो रहा है। आरोपी अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जाँच की प्रक्रिया भी प्रारंभ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक प्रणालीगत समस्या की ओर इशारा करती है। चिंताजनक यह है कि आरोपियों ने खुद जिस आवेदन की जाँच कर रहे थे, उसी के शिकायतकर्ता से रिश्वत माँगी — यानी जाँच तंत्र ही भ्रष्टाचार का औज़ार बन गया। एसीबी की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई कितनी तेज़ और पारदर्शी होती है — क्योंकि गिरफ्तारी के बाद लंबित जाँच और बहाली के मामले गुजरात में पहले भी देखे गए हैं।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात एसीबी ने बोपाल पुलिस स्टेशन में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
एसीबी ने सब-इंस्पेक्टर प्रीतल चौधरी और हेड कांस्टेबल दिलीपकुमार भोई को ₹5 लाख की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने एक शिकायतकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रोकने के बदले यह राशि माँगी और ली।
रिश्वत की राशि ₹10 लाख से ₹5 लाख कैसे हुई?
जाँच के दौरान आरोपी अधिकारियों ने कथित तौर पर पहले ₹10 लाख की माँग रखी। शिकायतकर्ता के साथ बातचीत के बाद यह माँग घटाकर ₹5 लाख कर दी गई, जिसे एसीबी के जाल में नकद लेते हुए पकड़ा गया।
एसीबी ने इन अधिकारियों को कैसे पकड़ा?
खेड़ा एसीबी टीम ने शिकायत मिलने के बाद स्वतंत्र पंच गवाहों के साथ एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन चलाया। हेड कांस्टेबल भोई को ₹5 लाख नकद लेते मौके पर ही पकड़ा गया और पूरी राशि बरामद कर ली गई।
इन अधिकारियों पर क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
दोनों अधिकारियों — SI प्रीतल चौधरी और हेड कांस्टेबल दिलीपकुमार भोई — के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच जारी है।
क्या गुजरात में पुलिस भ्रष्टाचार के ऐसे और मामले हैं?
हाँ, अहमदाबाद ग्रामीण में ही एक अन्य घटना में एक ASI और ग्राम रक्षक दल के दो सदस्यों को एक कॉस्मेटिक निर्माता से ₹30,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया। यह मामला गुजरात में एसीबी की हालिया कार्रवाइयों की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले