15 जुलाई 2026
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भरूच में ACB का जाल: मोबाइल वापसी के लिए ₹1 लाख रिश्वत लेते तीन पुलिसकर्मी रंगे हाथों गिरफ्तार

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भरूच में ACB का जाल: मोबाइल वापसी के लिए ₹1 लाख रिश्वत लेते तीन पुलिसकर्मी रंगे हाथों गिरफ्तार

सारांश

भरूच में एसीबी ने तीन पुलिसकर्मियों को रंगे हाथों पकड़ा — जब्त मोबाइल लौटाने के लिए पहले ₹3 लाख माँगे, फिर ₹1 लाख की पहली किस्त लेते ही जाल में फँसे। यह मामला गुजरात में पुलिस भ्रष्टाचार की बढ़ती घटनाओं की कड़ी में ताज़ा उदाहरण है।

मुख्य बातें

भरूच में एसीबी ने 15 जुलाई को तीन पुलिसकर्मियों को ₹1 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने प्रोहिबिशन मामले में जब्त मोबाइल फोन वापस करने के बदले शुरुआत में ₹3 लाख की माँग रखी थी।
गिरफ्तार पुलिसकर्मी हैं — अनिरुद्ध धाधल (अंकलेश्वर सिटी पुलिस लाइन), सागर चावड़ा (पानोली थाना) और जयदीपसिंह परमार (अंकलेश्वर सिटी पुलिस लाइन)।
शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने की बजाय एसीबी को सूचना दी, जिसके बाद पानोली पुलिस स्टेशन के पास 'डी स्टाफ' कक्ष में जाल बिछाया गया।
तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज; जाँच जारी।

गुजरात के भरूच जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 15 जुलाई को तीन पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर ₹1 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने प्रोहिबिशन एक्ट के एक मामले में जब्त मोबाइल फोन लौटाने के एवज में यह रकम माँगी थी। यह मामला गुजरात में पुलिस भ्रष्टाचार के खिलाफ हाल की कार्रवाइयों की श्रृंखला में नवीनतम है।

मामले की पृष्ठभूमि

एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता एक जागरूक नागरिक है, जिसके खिलाफ पानोली पुलिस थाने में प्रोहिबिशन एक्ट के तहत मामला दर्ज था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे उप-जेल भेजा गया था। जमानत मिलने पर जब वह अपना जब्त मोबाइल फोन वापस लेने थाने पहुँचा, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उससे मोटी रकम की माँग कर दी।

रिश्वत की माँग और एसीबी का जाल

शिकायत के अनुसार, सहायक हेड कांस्टेबल अनिरुद्ध धाधल और जयदीपसिंह परमार ने मोबाइल लौटाने के लिए शुरुआत में ₹3 लाख की माँग रखी। जब शिकायतकर्ता ने एकमुश्त इतनी रकम देने में असमर्थता जताई, तो आरोप है कि धाधल ने ₹1-1 लाख की तीन किस्तों में भुगतान की व्यवस्था पर सहमति जताई।

पहली किस्त देने की बजाय शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क किया। इसके बाद एसीबी ने पानोली पुलिस स्टेशन के सामने स्थित कंटेनर में बने 'डी स्टाफ' कक्ष में जाल बिछाया। पूर्व-निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता ने धाधल से बातचीत की, जिसने कथित तौर पर उसे पैसे लोक रक्षक पुलिस कांस्टेबल सागर चावड़ा को सौंपने को कहा। जैसे ही चावड़ा ने ₹1 लाख स्वीकार किए, एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया और रकम बरामद कर ली।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

एसीबी के अनुसार, तीनों आरोपी आपस में मिलीभगत कर रिश्वत वसूल रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, अनिरुद्ध धाधल वर्तमान में अंकलेश्वर सिटी पुलिस लाइन में तैनात हैं और मूल रूप से राजकोट जिले के निवासी हैं। सागर चावड़ा पानोली पुलिस थाने में तैनात हैं और भावनगर जिले के मूल निवासी हैं। जयदीपसिंह परमार अंकलेश्वर सिटी पुलिस लाइन में कार्यरत हैं और सुरेंद्रनगर जिले के रहने वाले हैं।

गुजरात में पुलिस भ्रष्टाचार का व्यापक संदर्भ

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब गुजरात में पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसीबी की कार्रवाइयाँ लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि जब्त संपत्ति या दस्तावेज़ लौटाने के बदले रिश्वत माँगना पुलिस भ्रष्टाचार का एक आम तरीका माना जाता है, जिसमें आम नागरिक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामले पुलिस विभाग में जवाबदेही तंत्र की कमज़ोरी को उजागर करते हैं।

आगे की कार्रवाई

तीनों गिरफ्तार पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसीबी आगे की जाँच जारी रखे हुए है। इस मामले के नतीजे गुजरात पुलिस विभाग में आंतरिक जाँच की दिशा तय कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विभागीय जाँच भी उतनी ही तेज़ी से होगी जितनी गिरफ्तारी। गुजरात में पुलिस भ्रष्टाचार के बढ़ते मामले संकेत देते हैं कि केवल एसीबी के जाल पर्याप्त नहीं — थाना-स्तर पर पारदर्शिता और डिजिटल संपत्ति-वापसी प्रणाली की ज़रूरत है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरूच में एसीबी ने किन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया?
एसीबी ने अनिरुद्ध धाधल (सहायक हेड कांस्टेबल, अंकलेश्वर सिटी पुलिस लाइन), सागर चावड़ा (लोक रक्षक पुलिस कांस्टेबल, पानोली थाना) और जयदीपसिंह परमार (अंकलेश्वर सिटी पुलिस लाइन) को गिरफ्तार किया। तीनों पर मिलीभगत कर रिश्वत लेने का आरोप है।
रिश्वत क्यों माँगी गई थी?
आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने प्रोहिबिशन एक्ट के एक मामले में जब्त मोबाइल फोन लौटाने के बदले पहले ₹3 लाख और बाद में ₹1-1 लाख की तीन किस्तों में रकम माँगी। शिकायतकर्ता जमानत मिलने के बाद अपना फोन वापस लेने थाने पहुँचा था।
एसीबी ने गिरफ्तारी कैसे की?
शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने की बजाय एसीबी को सूचित किया। एसीबी ने पानोली पुलिस स्टेशन के सामने 'डी स्टाफ' कक्ष में जाल बिछाया और जैसे ही कांस्टेबल सागर चावड़ा ने ₹1 लाख की पहली किस्त स्वीकार की, उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी?
तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और एसीबी जाँच जारी है। विभागीय कार्रवाई भी संभावित है।
क्या गुजरात में पुलिस भ्रष्टाचार के ऐसे मामले पहले भी आए हैं?
हाँ, यह मामला गुजरात में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई एसीबी कार्रवाइयों की श्रृंखला का हिस्सा है। जब्त संपत्ति वापसी के बदले रिश्वत माँगना पुलिस भ्रष्टाचार का एक बार-बार सामने आने वाला तरीका रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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