भरूच में ACB का जाल: मोबाइल वापसी के लिए ₹1 लाख रिश्वत लेते तीन पुलिसकर्मी रंगे हाथों गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के भरूच जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 15 जुलाई को तीन पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर ₹1 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने प्रोहिबिशन एक्ट के एक मामले में जब्त मोबाइल फोन लौटाने के एवज में यह रकम माँगी थी। यह मामला गुजरात में पुलिस भ्रष्टाचार के खिलाफ हाल की कार्रवाइयों की श्रृंखला में नवीनतम है।
मामले की पृष्ठभूमि
एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता एक जागरूक नागरिक है, जिसके खिलाफ पानोली पुलिस थाने में प्रोहिबिशन एक्ट के तहत मामला दर्ज था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे उप-जेल भेजा गया था। जमानत मिलने पर जब वह अपना जब्त मोबाइल फोन वापस लेने थाने पहुँचा, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उससे मोटी रकम की माँग कर दी।
रिश्वत की माँग और एसीबी का जाल
शिकायत के अनुसार, सहायक हेड कांस्टेबल अनिरुद्ध धाधल और जयदीपसिंह परमार ने मोबाइल लौटाने के लिए शुरुआत में ₹3 लाख की माँग रखी। जब शिकायतकर्ता ने एकमुश्त इतनी रकम देने में असमर्थता जताई, तो आरोप है कि धाधल ने ₹1-1 लाख की तीन किस्तों में भुगतान की व्यवस्था पर सहमति जताई।
पहली किस्त देने की बजाय शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क किया। इसके बाद एसीबी ने पानोली पुलिस स्टेशन के सामने स्थित कंटेनर में बने 'डी स्टाफ' कक्ष में जाल बिछाया। पूर्व-निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता ने धाधल से बातचीत की, जिसने कथित तौर पर उसे पैसे लोक रक्षक पुलिस कांस्टेबल सागर चावड़ा को सौंपने को कहा। जैसे ही चावड़ा ने ₹1 लाख स्वीकार किए, एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया और रकम बरामद कर ली।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
एसीबी के अनुसार, तीनों आरोपी आपस में मिलीभगत कर रिश्वत वसूल रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, अनिरुद्ध धाधल वर्तमान में अंकलेश्वर सिटी पुलिस लाइन में तैनात हैं और मूल रूप से राजकोट जिले के निवासी हैं। सागर चावड़ा पानोली पुलिस थाने में तैनात हैं और भावनगर जिले के मूल निवासी हैं। जयदीपसिंह परमार अंकलेश्वर सिटी पुलिस लाइन में कार्यरत हैं और सुरेंद्रनगर जिले के रहने वाले हैं।
गुजरात में पुलिस भ्रष्टाचार का व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब गुजरात में पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसीबी की कार्रवाइयाँ लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि जब्त संपत्ति या दस्तावेज़ लौटाने के बदले रिश्वत माँगना पुलिस भ्रष्टाचार का एक आम तरीका माना जाता है, जिसमें आम नागरिक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामले पुलिस विभाग में जवाबदेही तंत्र की कमज़ोरी को उजागर करते हैं।
आगे की कार्रवाई
तीनों गिरफ्तार पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसीबी आगे की जाँच जारी रखे हुए है। इस मामले के नतीजे गुजरात पुलिस विभाग में आंतरिक जाँच की दिशा तय कर सकते हैं।