गुजरात एसीबी ने नरोदा सब-रजिस्ट्रार समेत चार को ₹2.5 लाख रिश्वत मामले में किया गिरफ्तार

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गुजरात एसीबी ने नरोदा सब-रजिस्ट्रार समेत चार को ₹2.5 लाख रिश्वत मामले में किया गिरफ्तार

सारांश

गुजरात एसीबी ने अहमदाबाद के नरोदा-6 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में ₹2.5 लाख की रिश्वत लेते हुए सब-रजिस्ट्रार आकाश देसाई समेत चार लोगों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। संपत्ति पंजीकरण के नाम पर क्यूआर कोड से ऑनलाइन पेमेंट तक — यह मामला सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार के बदलते तरीकों की परत-दर-परत कहानी है।

मुख्य बातें

गुजरात एसीबी ने 5 मई को अहमदाबाद के नरोदा-6 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में सब-रजिस्ट्रार आकाश देसाई , संविदा कर्मचारी जय आदिवासी , राहिल शेख और नरेंद्र उर्फ सोनू रामकरण बोहरा शामिल हैं।
आरोपियों ने संपत्ति पंजीकरण के एवज में पहले क्यूआर कोड से ₹35,000 ऑनलाइन लिए, फिर ₹2.5 लाख की माँग की।
मौके से ₹2.5 लाख की नकदी बरामद की गई और सभी आरोपी रंगे हाथ पकड़े गए।
इससे पहले मार्च में गांधीनगर में खुफिया ब्यूरो अधिकारी और जनवरी में सारसपुर में तीन लोग एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

गुजरात भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अहमदाबाद के नरोदा-6 स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के सब-रजिस्ट्रार आकाश देसाई सहित चार व्यक्तियों को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने मंगलवार, 5 मई को यह जानकारी देते हुए बताया कि एसीबी द्वारा बिछाए गए जाल में सभी आरोपी रंगे हाथ पकड़े गए और मौके से पूरी रकम बरामद कर ली गई।

मामले की पृष्ठभूमि

एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता एक आवासीय संपत्ति के दस्तावेज के पंजीकरण के लिए नरोदा-6 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय गया था। प्रक्रिया के दौरान सब-रजिस्ट्रार आकाश देसाई ने कुछ आपत्तियाँ उठाईं, जिसके बाद कार्यालय के संविदा कर्मचारी जय आदिवासी और राहिल शेख ने हस्तक्षेप किया। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता से संपर्क कर यह आश्वासन दिया कि दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी करा दी जाएगी।

रिश्वत की माँग और ऑनलाइन लेनदेन

आरोपियों में से एक ने बाद में शिकायतकर्ता से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क किया और बताया कि कलेक्टर कार्यालय से धारा 73(एए) के तहत किसी शर्त वाले दस्तावेज की आवश्यकता के बिना ही काम पूरा कर दिया जाएगा। इसके लिए पहले एक सहयोगी से जुड़े क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाइन ₹35,000 की शुरुआती रकम ली गई। इसके बाद सब-रजिस्ट्रार के कथित निर्देशों पर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने के एवज में ₹2.5 लाख की माँग की गई।

एसीबी का जाल और गिरफ्तारी

रिश्वत देने से इनकार करते हुए शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क किया, जिसके बाद उसी दिन ऑपरेशन चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, जय आदिवासी ने शिकायतकर्ता से बातचीत की और आकाश देसाई की ओर से काम करते हुए, नरेंद्र उर्फ सोनू रामकरण बोहरा के साथ मिलकर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय परिसर के भीतर रिश्वत की रकम स्वीकार की। ऑपरेशन के दौरान सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और ₹2.5 लाख की नकदी जब्त कर ली गई।

गुजरात एसीबी की हालिया कार्रवाइयाँ

यह गिरफ्तारी गुजरात में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियानों की एक लंबी कड़ी में नवीनतम है। इससे पहले मार्च में राज्य खुफिया ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी को गांधीनगर में पुलिस सुरक्षा नवीनीकरण के संबंध में कथित तौर पर ₹80,000 की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसी तरह जनवरी में अहमदाबाद के सारसपुर इलाके में कलेक्टर कार्यालय परिसर स्थित एक नागरिक केंद्र में आधार-संबंधित सेवाओं के लिए कथित तौर पर ₹32,000 की रिश्वत लेने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात में सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के मामलों पर एसीबी की निगरानी लगातार कड़ी होती जा रही है।

इस मामले में आगे की जाँच जारी है और आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मार्च और अब मई में — दर्शाती हैं कि भ्रष्टाचार अलग-थलग घटनाएँ नहीं बल्कि एक व्यापक समस्या है। असली सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारियाँ पर्याप्त निवारक साबित हो रही हैं, या संरचनात्मक सुधार की भी आवश्यकता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात एसीबी ने नरोदा में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
एसीबी ने अहमदाबाद के नरोदा-6 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के सब-रजिस्ट्रार आकाश देसाई सहित चार लोगों को ₹2.5 लाख की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। आरोपियों ने एक शिकायतकर्ता से संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कराने के एवज में यह रकम माँगी थी।
रिश्वत की रकम कैसे माँगी और ली गई?
आरोपियों ने पहले क्यूआर कोड के जरिए ऑनलाइन ₹35,000 की शुरुआती रकम ली और फिर पंजीकरण पूरा कराने के लिए ₹2.5 लाख की माँग की। व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायतकर्ता से संपर्क कर यह सौदा तय किया गया था।
एसीबी ने इस मामले में कार्रवाई कैसे की?
शिकायतकर्ता द्वारा रिश्वत देने से इनकार कर एसीबी को सूचना देने के बाद, ब्यूरो ने उसी दिन जाल बिछाया। आरोपियों को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय परिसर के भीतर रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया और ₹2.5 लाख की नकदी मौके से बरामद की गई।
गुजरात एसीबी ने हाल के महीनों में और कौन-सी बड़ी कार्रवाइयाँ की हैं?
मार्च में गांधीनगर में राज्य खुफिया ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी को ₹80,000 की कथित रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जनवरी में अहमदाबाद के सारसपुर में कलेक्टर कार्यालय परिसर स्थित नागरिक केंद्र में आधार सेवाओं के लिए ₹32,000 की कथित रिश्वत के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में धारा 73(एए) का क्या संदर्भ है?
आरोपियों ने शिकायतकर्ता को बताया कि कलेक्टर कार्यालय से धारा 73(एए) के तहत किसी शर्त वाले दस्तावेज की आवश्यकता के बिना ही संपत्ति पंजीकरण का काम पूरा कर दिया जाएगा। यह कथित तौर पर रिश्वत की माँग को उचित ठहराने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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