दाहोद में PM आवास योजना की किश्त पर ₹10,000 रिश्वत: एएचएम इंजीनियर और साथी एसीबी के जाल में
सारांश
मुख्य बातें
महीसागर एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 10 अगस्त 2026 को जालोद, दाहोद में एक सुनियोजित जाल बिछाकर अफोर्डेबल हाउसिंग मिशन (एएचएम) के इंजीनियर जयेशकुमार पटेल और उनके सहयोगी मनुभाई वसाया को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों पर प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना (PMAY-U) के तहत एक लाभार्थी को मिलने वाली किश्त के बदले अवैध धन वसूलने का आरोप है।
आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि
पहले आरोपी जयेशकुमार पटेल (35 वर्ष) जालोद नगरपालिका में 11 महीने के अनुबंध पर एएचएम इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। वे मूल रूप से मेहसाणा जिले के विसनगर तालुका के कंसा गाँव के निवासी हैं और फिलहाल जालोद के मुवाडा में रहते हैं। दूसरे आरोपी मनुभाई वसाया (49 वर्ष) एक व्यवसायी हैं, जो जालोद के मुवाडा स्थित रयान फलिया में निवास करते हैं।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे बढ़ती रही रिश्वत की माँग
एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता को PMAY-U के तहत एक आवास स्वीकृत हुआ था। बैंक ऑफ बड़ौदा की जालोद शाखा में उनके खाते में ₹70,000 की पहली किश्त जमा होने पर कथित तौर पर ₹5,000 की रिश्वत माँगी गई। इसके बाद ₹80,000 की दूसरी किश्त आने पर ₹10,000 की माँग की गई। तीसरी किश्त के रूप में ₹1.50 लाख खाते में जमा होने पर पुनः ₹10,000 की अवैध माँग की गई।
पैसे देने से इनकार करते हुए शिकायतकर्ता ने महीसागर एसीबी से संपर्क कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार की आवास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को कड़ा किया जा रहा है।
एसीबी का जाल और गिरफ्तारी
शिकायत के आधार पर एसीबी ने 10 अगस्त को जालोद पुलिस चौकी के निकट मुवाडा चौकड़ी पर एक पान-मसाला स्टॉल के पास जाल बिछाया। ऑपरेशन के दौरान पटेल ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि वसाया को सौंपने के निर्देश दिए। पंच गवाह की उपस्थिति में वसाया ने कथित तौर पर पटेल के कहने पर ₹10,000 स्वीकार किए, जिसके तुरंत बाद एसीबी की टीम ने दोनों को दबोच लिया और पूरी रकम बरामद कर ली।
ऑपरेशन का नेतृत्व
इस पूरे अभियान की कमान लूनावाड़ा स्थित महीसागर एसीबी पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक एम.एम. तेजोट ने संभाली। गोधरा में एसीबी पंचमहल इकाई के सहायक निदेशक बी.एम. पटेल ने इसकी देखरेख की, जबकि वडोदरा एसीबी के उप-निदेशक बलदेव देसाई इस ऑपरेशन के प्रभारी अधिकारी थे।
आगे क्या होगा
दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि सरकारी योजनाओं में बिचौलियों द्वारा रिश्वत वसूली की यह कोई पहली घटना नहीं है — ऐसे मामले लाभार्थियों को उनके वैध हक से वंचित करते हैं और कल्याणकारी योजनाओं की साख को नुकसान पहुँचाते हैं। आगामी दिनों में जाँच के दायरे में और लोगों के शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।