भरूच में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: खाद्य एवं औषधि विभाग के दो अधिकारी ₹40,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के भरूच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 18 अगस्त 2026 को खाद्य एवं औषधि विभाग के दो अधिकारियों को ₹40,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोप है कि दोनों अधिकारी थोक दवा लाइसेंस (होलसेल ड्रग लाइसेंस) जारी कराने की प्रक्रिया में रिश्वत की माँग कर रहे थे।
गिरफ्तार अधिकारी कौन हैं
एसीबी ने जिन दो अधिकारियों को हिरासत में लिया, उनकी पहचान प्रकाशभाई पोसनानी (54) और सुरभिबेन देसाई (29) के रूप में हुई है। प्रकाशभाई पोसनानी भरूच कार्यालय में खाद्य एवं औषधि विभाग के सहायक आयुक्त (क्लास-1) के पद पर कार्यरत हैं, जबकि सुरभिबेन देसाई विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर एवं सहायक आयुक्त (क्लास-2) के पद पर तैनात हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच के अनुसार, एक शिकायतकर्ता ने दवाओं का नया थोक लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान सुरभिबेन देसाई ने शिकायतकर्ता को बताया कि लाइसेंस जारी करने के लिए वरिष्ठ अधिकारी को ₹40,000 से ₹50,000 देने होंगे।
रिश्वत देने के बजाय शिकायतकर्ता ने नर्मदा एसीबी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर एसीबी ने 18 अगस्त को भरूच स्थित खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन कार्यालय में जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान दोनों अधिकारियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से ₹40,000 स्वीकार किए, जिसके बाद एसीबी टीम ने तत्काल दोनों को गिरफ्तार कर पूरी रकम बरामद कर ली।
एसीबी की टीम और नेतृत्व
यह ट्रैप कार्रवाई नर्मदा एसीबी पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक डीडी वसावा और निगरानी एसीबी वडोदरा इकाई के प्रभारी सहायक निदेशक बीएम पटेल ने अंजाम दी। पूरी कार्रवाई का नेतृत्व एसीबी वडोदरा के उपनिदेशक बलदेव देसाई ने किया।
एसीबी का पक्ष
एसीबी ने कहा है कि दोनों आरोपी अधिकारियों ने लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्वत लेकर आपराधिक कदाचार किया। दोनों के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात में दवा लाइसेंसिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि थोक दवा लाइसेंस छोटे व्यापारियों और फार्मासिस्टों के लिए एक अनिवार्य दस्तावेज़ है, और ऐसे मामले प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करते हैं। आगे की जाँच में यह स्पष्ट हो सकता है कि इस तरह की माँगें कितने अन्य आवेदकों के साथ की गई थीं।