बूंदी में VDO मुकेश कुमार ₹50,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, ACB ने बिछाया था जाल
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के बूंदी जिले में भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) की बूंदी इकाई ने सोमवार, 15 जून 2026 को ग्राम विकास अधिकारी (VDO) मुकेश कुमार को ₹50,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोचा। आरोपी गरदादा ग्राम पंचायत में तैनात था और एक सार्वजनिक जल स्रोत (पंगहट) निर्माण परियोजना के भुगतान के बदले यह राशि माँग रहा था।
मुख्य घटनाक्रम
ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, आरोपी मुकेश कुमार बूंदी जिले के गेंडोली पुलिस थाना क्षेत्र के जयस्थल गाँव के निवासी हैं और बूंदी पंचायत समिति के अंतर्गत गरदादा ग्राम पंचायत में VDO पद पर कार्यरत हैं। शिकायतकर्ता की फर्म तारू एंड कंपनी द्वारा गरदादा ग्राम पंचायत में किए गए निर्माण कार्य का भुगतान जारी करने के एवज में आरोपी ने कथित तौर पर लगभग ₹4.50 लाख की माँग रखी थी।
शिकायत मिलने के बाद ACB ने उसकी पुष्टि की और ACB कोटा रेंज के उप महानिरीक्षक ओमप्रकाश मीना की देखरेख में जाल बिछाया गया। अभियान का संचालन ACB बूंदी के पुलिस उप अधीक्षक प्रेमचंद ने किया।
रिश्वत लेते पकड़े जाने की परिस्थितियाँ
आरोपी ने शिकायतकर्ता से ₹50,000 नकद अपने किराए के मकान के बाहर लिए और राशि अपनी जेब में रख ली। जैसे ही ACB टीम मौके पर पहुँची, आरोपी ने नकदी जेब से निकालकर सड़क पर फेंक दी — जो सबूत मिटाने का स्पष्ट प्रयास प्रतीत होता है। इसके बावजूद ACB टीम ने उसे मौके पर ही हिरासत में ले लिया।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जाँच
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ और कानूनी औपचारिकताएँ अतिरिक्त महानिदेशक, ACB, स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक, ACB, एस. परिमाला की निगरानी में पूरी की जा रही हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है और आगे की जाँच जारी है।
आम जनता पर असर और ACB की अपील
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में पंचायत स्तरीय भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि सरकारी निर्माण कार्यों के भुगतान में देरी और मध्यस्थों की माँग एक पुरानी समस्या रही है। ACB ने नागरिकों से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार की घटनाओं की रिपोर्ट 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन 1064 या व्हाट्सएप हेल्पलाइन 9413502834 पर करें। ब्यूरो ने आश्वासन दिया है कि नागरिकों के वैध कार्य भ्रष्टाचार-मुक्त तरीके से संपन्न कराए जाएँगे।
आगे की जाँच में यह स्पष्ट होगा कि ₹4.50 लाख की कुल माँग में से बाकी राशि की वसूली कब और कैसे की जानी थी, और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।