गुजरात: शराब की दुकान खुलवाने के लिए ₹5,000 रिश्वत लेते ASI गिरफ्तार, ACB ने रंगे हाथों दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला ग्रामीण पुलिस स्टेशन में तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) श्याम बगदा (39) को 21 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कथित तौर पर ₹5,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि बगदा ने एक व्यक्ति पर अवैध देशी शराब की दुकान दोबारा शुरू करने का दबाव बनाया और इनकार करने पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
शिकायतकर्ता ने ACB के टोल-फ्री नंबर 1064 पर संपर्क कर बताया कि ASI बगदा उस पर अवैध देशी शराब की दुकान पुनः चालू करने का दबाव बना रहे हैं। एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता पर पहले भी इस तरह की गतिविधियों के लिए शिकायत दर्ज हो चुकी थी, जिसके बाद उसने वह काम बंद कर दिया था। आरोप है कि आरोपी अधिकारी ने शराब की दुकान शुरू करने के बदले पहले ₹19,000 की माँग की, जो बाद में बातचीत के बाद घटाकर ₹5,000 कर दी गई।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से रिश्वत देने से इनकार किया और अमरेली ACB से संपर्क किया। इसके बाद अमरेली पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई गई।
गिरफ्तारी कहाँ और कैसे हुई
ACB की टीम ने गुरुवार को जाल बिछाया। कार्रवाई सावरकुंडला तालुका के ओलिय गाँव की सीमा पर नेसदी की ओर जाने वाली एक कच्ची सड़क पर जावरभाई पटेल के खेत के प्रवेश द्वार पर की गई। ACB अधिकारियों ने ASI बगदा को ठीक उसी समय पकड़ा जब उन्होंने शिकायतकर्ता से ₹5,000 स्वीकार किए। गिरफ्तारी के बाद वह रकम शिकायतकर्ता को वापस लौटा दी गई।
यह पूरी कार्रवाई अमरेली ACB के इंस्पेक्टर टी.एस. रिज़वी के नेतृत्व में की गई, जिसमें ACB के अन्य अधिकारी भी शामिल थे।
आरोपी पर क्या लगे हैं आरोप
ACB के अनुसार, ASI बगदा पर सरकारी पद का दुरुपयोग कर रिश्वत लेने का आरोप है। आरोप यह भी है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को धमकी दी कि यदि उसने शराब की दुकान शुरू करने से इनकार किया तो उसे झूठे मामलों में फँसाया जाएगा — जो पुलिस बल की शक्ति का स्पष्ट दुरुपयोग है।
आम जनता और व्यवस्था पर असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब गुजरात में शराबबंदी कानून पहले से ही लागू है। कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी का खुद अवैध शराब व्यापार को प्रोत्साहित करने में संलिप्त होना, कानून प्रवर्तन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। गौरतलब है कि ACB का टोल-फ्री नंबर 1064 इसी तरह के मामलों में आम नागरिकों को शिकायत का सीधा माध्यम देता है।
आगे क्या होगा
ACB की जाँच जारी है और आरोपी ASI को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत में होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ट्रैप ऑपरेशन भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में प्रभावी साबित होते हैं, बशर्ते अभियोजन को तार्किक परिणाम तक पहुँचाया जाए।