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राष्ट्रपति मुर्मू ने नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सराहना की

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राष्ट्रपति मुर्मू ने नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सराहना की

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की बढ़ती संख्या को शुभ संकेत बताया। उन्होंने शिक्षा के महत्व और विश्वविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्य बातें

अंतरराष्ट्रीय छात्रों की उपस्थिति नालंदा विश्वविद्यालय की पहचान है।
शिक्षा का उद्देश्य मानवता की सेवा करना है।
विश्वविद्यालय इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग को बढ़ावा दे रहा है।
स्थानीय समाज की प्रगति का लाभ विश्वविद्यालय को भी मिलना चाहिए।
नालंदा का ऐतिहासिक महत्व है जो शिक्षा की नींव है।

राजगीर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को बिहार की एक दिवसीय यात्रा के दौरान नालंदा के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने इस समारोह को एक शाश्वत सभ्यतागत संकल्प की पुनरावृत्ति बताया, जिसमें उन्होंने कहा कि ज्ञान का कोई अंत नहीं होता, संवाद निरंतर बना रहेगा और शिक्षा हमेशा मानवता की सेवा करती रहेगी।

राष्ट्रपति ने स्नातक होने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी और उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बैच में 30 से अधिक देशों के छात्र शामिल हैं, जो विश्वविद्यालय के सशक्त अंतरराष्ट्रीय स्वरूप का प्रतीक है। उन्होंने कहा, "यह देखना सुखद है कि आज का नालंदा विश्वविद्यालय भी अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को आकर्षित कर रहा है। यह नालंदा विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित ज्ञान एवं शिक्षा केंद्र के रूप में पुनः उभरने का शुभ संकेत है।"

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नालंदा विश्वविद्यालय एशिया और वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित होगा। यह न केवल अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए बल्कि अपने मूल्यों के लिए भी विशिष्ट पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर खुशी होती है कि विश्वविद्यालय इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्थानीय समुदायों के साथ सहभागिता के माध्यम से इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।"

विश्वविद्यालय की सहभागिता पहलों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के लिए अपने स्थानीय परिवेश से जुड़े रहना आवश्यक है। इसका लाभ उस स्थानीय समाज को भी मिलना चाहिए, जहां यह स्थापित है। बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने नालंदा विश्वविद्यालय को निरंतरता और नवीनीकरण का प्रतीक बताया, जो अतीत के ज्ञान को वर्तमान की आकांक्षाओं के साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय उन स्थायी मूल्यों का प्रमाण है, जो मानवता के भविष्य का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के अद्वितीय अंतरराष्ट्रीय चरित्र पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में इसका महत्व और भी बढ़ गया है। जैसे-जैसे हम 'विकसित भारत' की ओर बढ़ रहे हैं, यह आवश्यक है कि भारत दुनिया के लिए तैयार हो और दुनिया भारत के लिए। इसके लिए आगामी पीढ़ियों को वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति अधिक संवेदनशील और जुड़े रहना होगा। यह स्नातक बैच इस दिशा में बदलाव लाएगा। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्र अपने देशों में लौटकर भारत के दूत बनेंगे।

बिहार के ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने नालंदा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का संस्थान नहीं है, बल्कि चरित्र और बुद्धि के समग्र विकास का प्रतीक है।

कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने अतिथियों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने विश्वविद्यालय के स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय समुदायों के साथ जुड़ाव जैसी प्रमुख शैक्षणिक और संस्थागत पहलों की जानकारी दी। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने नवनिर्मित 2000 सीटों वाले अत्याधुनिक सभागार, विश्वामित्रालय, का उद्घाटन किया। उन्होंने सहभागिता प्रदर्शनी का अवलोकन किया और स्थानीय समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद किया। साथ ही, उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए।

संपादकीय दृष्टिकोण

शिक्षा की वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करता है। उनका संदेश यह दर्शाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए, बल्कि मानवता की सेवा के लिए भी प्रतिबद्ध है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति मुर्मू ने दीक्षांत समारोह में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि ज्ञान का अंत नहीं होता और शिक्षा हमेशा मानवता की सेवा करती है।
कितने देशों के छात्र इस बैच में शामिल थे?
इस बैच में 30 से अधिक देशों के छात्र शामिल थे।
नालंदा विश्वविद्यालय का महत्व क्या है?
यह विश्वविद्यालय शिक्षा और ज्ञान का एक प्रतिष्ठित केंद्र है।
विदेश मंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने विश्वविद्यालय के अद्वितीय अंतरराष्ट्रीय चरित्र पर जोर दिया।
नालंदा विश्वविद्यालय की भविष्य की योजनाएँ क्या हैं?
यह एशिया और विश्व में एक अग्रणी शिक्षण संस्थान के रूप में उभरने की दिशा में अग्रसर है।
राष्ट्र प्रेस
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