क्या शिक्षा केवल आजीविका का साधन है, या यह समाज और राष्ट्र की सेवा का भी माध्यम है?
सारांश
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नई दिल्ली/अमृतसर, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को पंजाब के अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया और वहां अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र विभिन्न दिशाओं में अपनी यात्रा शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ छात्र सरकारी या निजी क्षेत्र में कार्य करेंगे, कुछ उच्च शिक्षा या अनुसंधान में जाएंगे, जबकि कई अपना व्यवसाय स्थापित करेंगे या शिक्षण में अपनी करियर की दिशा निर्धारित करेंगे। हालांकि, हर क्षेत्र में अलग-अलग योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, लेकिन कुछ गुण सभी क्षेत्रों में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और सहायक होते हैं। ये गुण हैं सीखने की निरंतर इच्छा और लगन, विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का दृढ़ पालन, परिवर्तन को अपनाने का साहस, असफलताओं से सीखने और आगे बढ़ने का संकल्प, टीम वर्क और सहयोग की भावना, समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग और ज्ञान तथा क्षमताओं का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए करना है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह भी कहा कि ये गुण न केवल उन्हें एक अच्छा पेशेवर बनाएंगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि शिक्षा केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का भी एक माध्यम है। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने उन्हें शिक्षा प्रदान की है, उसके प्रति वे ऋणी हैं। विकास की राह में पिछड़ चुके लोगों के उत्थान के प्रयास करना इस ऋण का भुगतान करने का एक तरीका हो सकता है। पिछले दशक में भारत ने प्रौद्योगिकी विकास और आंत्रप्रेन्योर संस्कृति में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर एआई और रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, युवाओं के लिए अनेक उद्यमशीलता के अवसर उपलब्ध हैं। हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अनुसंधान को बढ़ावा देकर, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करके और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रोत्साहित करके इस प्रगति को और गति प्रदान कर सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में पंजाब में मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या एक गंभीर चुनौती बन गई है, जिससे सबसे अधिक प्रभावित युवा हैं। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य, बल्कि समाज के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। एक स्वस्थ समाज के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन देने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत' के निर्माण में अगले दो दशक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत का भविष्य उन युवाओं पर निर्भर करता है, जो वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिम्मेदारी से कार्य करते हैं और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से अपने छात्रों में इन मूल्यों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने युवा छात्रों से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे जो भी पेशा चुनें, उनका योगदान राष्ट्र को मजबूत करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने में सहायक हो।