बिहार: नालंदा विश्वविद्यालय ने रूस-भारत सम्मेलन में दिखाई सक्रियता

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बिहार: नालंदा विश्वविद्यालय ने रूस-भारत सम्मेलन में दिखाई सक्रियता

सारांश

रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में नालंदा विश्वविद्यालय ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों को मजबूत बनाने के विषय पर चर्चा की गई।

मुख्य बातें

नालंदा विश्वविद्यालय की सक्रियता ने भारत-रूस संबंधों को नई दिशा दी है।
रूस-भारत सम्मेलन में सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा की गई।
समदर्शी ने बौद्ध विरासत के महत्व पर बल दिया।
स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल तकनीक पर जोर दिया गया।
आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए नए मॉडल का प्रस्ताव किया गया।

राजगीर, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'रूस और भारत: एक नया द्विपक्षीय एजेंडा' में बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इस वार्षिक सम्मेलन का आयोजन रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद (आरआईएसी) और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है।

नालंदा विश्वविद्यालय ने मंगलवार को एक आधिकारिक प्रेस बयान में उल्लेख किया है कि इस सम्मेलन में तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत-रूस संबंधों को और अधिक मजबूत और बहुआयामी बनाने के साझा लक्ष्यों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा रहा है।

नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने इस सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारत और रूस के रिश्ते सदियों पुराने और गहरे हैं। उन्होंने ब्रिक्स के माध्यम से सहयोग का एक नया मॉडल विकसित करने की आवश्यकता बताई। अपने संबोधन में उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दिया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक दूरी कम हो और आर्थिक संबंध और मजबूत बन सकें।

नालंदा विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए बौद्ध अध्ययन, दर्शन और तुलनात्मक धर्म स्कूल के संकाय सदस्य डॉ. प्रांशु समदर्शी ने मास्को में हो रहे इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लिया और एक महत्वपूर्ण सत्र “सांस्कृतिक सहयोग का विकास” में अपनी प्रभावी सहभागिता प्रस्तुत की।

इस पैनल चर्चा के दौरान सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से कला, संगीत, रचनात्मक उद्योगों और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को विस्तार देने पर गहन मंथन हुआ।

विशेष रूप से, डॉ. समदर्शी ने बौद्ध विरासत को भारत और रूस के बीच सभ्यतागत संवाद का एक सशक्त सेतु बताया और साझा सांस्कृतिक मूल्यों को और गहरा करने की संभावनाओं पर बल दिया, जो भविष्य में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।

बयान में बताया गया है कि अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और साझा मानवीय मूल्यों के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक नई दिशा और ऊर्जा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नालंदा विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किसने किया?
नालंदा विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व बौद्ध अध्ययन, दर्शन और तुलनात्मक धर्म स्कूल के संकाय सदस्य डॉ. प्रांशु समदर्शी ने किया।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत-रूस के संबंधों को मजबूत करना और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
कौन सा संगठन इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है?
इस सम्मेलन का आयोजन रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद (आरआईएसी) और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास द्वारा किया जा रहा है।
डॉ. सचिन चतुर्वेदी ने किस विषय पर चर्चा की?
डॉ. सचिन चतुर्वेदी ने स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दिया।
किस सत्र में डॉ. प्रांशु समदर्शी ने भाग लिया?
डॉ. प्रांशु समदर्शी ने 'सांस्कृतिक सहयोग का विकास' सत्र में भाग लिया।
राष्ट्र प्रेस
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