नालंदा विश्वविद्यालय में SCO महासचिव: बौद्ध विरासत को SCO के नए स्तंभ के रूप में मान्यता
सारांश
मुख्य बातें
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के महासचिव नुरलान यरमेकबायेव ने 25 मई 2025 को बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया और कहा कि एससीओ देशों की साझा बौद्ध विरासत के संवर्धन एवं प्रसार में इस विश्वविद्यालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय के आमंत्रण पर भारत यात्रा के दौरान वे एक प्रतिनिधिमंडल के साथ विश्वविद्यालय पहुँचे, जहाँ उनका औपचारिक स्वागत किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सतत विकास, नेट जीरो पहल, 'सहभागिता', बौद्ध विरासत तथा क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर प्रस्तुतियाँ एवं संवाद हुए। संकाय सदस्यों और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चाओं में ज्ञान-विनिमय, सांस्कृतिक समझ, विरासत संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को केंद्र में रखा गया।
SCO महासचिव का संबोधन
यरमेकबायेव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2023 में भारत की एससीओ अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में साझा बौद्ध विरासत को शंघाई सहयोग संगठन के एक नए स्तंभ के रूप में शामिल किया गया। उन्होंने इस कदम को सदस्य देशों के बीच सभ्यतागत संवाद को नई दिशा देने वाला बताया।
कुलपति की प्रतिक्रिया
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि बौद्ध विरासत मध्य एशिया सहित रूस, मंगोलिया और चीन जैसे देशों के साथ सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जहाँ आज भी बौद्ध समुदाय समृद्ध रूप से विद्यमान है। उन्होंने कहा कि प्राचीन बौद्ध नेटवर्क, सांस्कृतिक गलियारे, भाषाएँ, लिपियाँ एवं पांडुलिपियाँ इन क्षेत्रों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती हैं।
शैक्षणिक एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग
प्रोफेसर चतुर्वेदी ने आगे बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय इन आयामों को अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगों में सक्रिय रूप से शामिल कर रहा है। इसमें विभिन्न देशों के संस्थानों के साथ साझेदारी तथा बौद्ध धर्म से संबंधित सांस्कृतिक पहलें भी सम्मिलित हैं। गौरतलब है कि नालंदा विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना स्वयं एक बहुपक्षीय पहल थी, जो इसे एससीओ के सहयोग-ढाँचे के लिए स्वाभाविक मंच बनाती है।
क्या होगा आगे
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत एससीओ के भीतर सांस्कृतिक कूटनीति को अपनी विदेश नीति के एक सक्रिय उपकरण के रूप में उपयोग कर रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय और एससीओ सदस्य देशों के संस्थानों के बीच भविष्य की साझेदारियों की संभावनाएँ इस दौरे से और मज़बूत हुई हैं।