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कीर्ति वर्धन सिंह ने दुशांबे में SCO सम्मेलन में मध्य एशिया के साथ भारत की साझेदारी दोहराई

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कीर्ति वर्धन सिंह ने दुशांबे में SCO सम्मेलन में मध्य एशिया के साथ भारत की साझेदारी दोहराई

सारांश

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने दुशांबे में SCO की 25वीं वर्षगांठ सम्मेलन में मध्य एशिया के साथ भारत की रणनीतिक प्रतिबद्धता दोहराई और कोलकाता में पहले SCO सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम की घोषणा की। ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री से द्विपक्षीय वार्ता भी हुई।

मुख्य बातें

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 12 जून 2026 को दुशांबे, ताजिकिस्तान में SCO सम्मेलन में भाग लिया।
सम्मेलन का विषय था 'सेंट्रल एशिया — द कोर ऑफ SCO: ए स्पेस ऑफ पीस एंड जॉइंट डेवलपमेंट'।
2026 में SCO की 25वीं वर्षगांठ ; किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के पास SCO की दोनों सर्वोच्च परिषदों की अध्यक्षता।
भारत अगले महीने कोलकाता में पहला SCO सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम आयोजित करेगा।
मंत्री सिंह ने ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की।

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 12 जून 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) सम्मेलन में भाग लेते हुए मध्य एशिया और SCO के साथ भारत की दीर्घकालिक साझेदारी की पुनः पुष्टि की। 'सेंट्रल एशिया — द कोर ऑफ SCO: ए स्पेस ऑफ पीस एंड जॉइंट डेवलपमेंट' विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन में उन्होंने SCO के भीतर भारत की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।

SCO की 25वीं वर्षगांठ और भारत का दृष्टिकोण

मंत्री सिंह ने अपने संबोधन में कहा, "इस साल 2026 में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की 25वीं वर्षगांठ है। यह हमारी उपलब्धियों पर मनन करने और वैश्विक व्यवस्था में मौजूदा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्वयं को पुनः संरेखित करने का उचित अवसर है।" उन्होंने विशेष रूप से इस तथ्य को रेखांकित किया कि SCO के दो सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय — काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट और काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट — की अध्यक्षता इस समय मध्य एशियाई देशों किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के पास है।

उन्होंने कहा कि यह अवसर न केवल संगठन की सफलताओं का उत्सव मनाने का है, बल्कि मध्य एशियाई नेतृत्व में SCO की भावी दिशा निर्धारित करने का भी है। गौरतलब है कि SCO एक ऐसे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ सदियों से सभ्यताएँ परस्पर संवाद, प्रतिस्पर्धा और सहयोग के माध्यम से मानवीय प्रगति में योगदान देती रही हैं।

भारत के लिए SCO का महत्व

मंत्री सिंह ने स्पष्ट किया, "भारत के लिए SCO महज एक क्षेत्रीय समूह नहीं है — यह यूरेशिया में हमारे ऐतिहासिक और सभ्यतागत साझेदारों से जोड़ने वाली एक अनिवार्य कड़ी है।" उन्होंने बताया कि SCO में भारत का सहयोग-दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा, जुड़ाव और अवसर के ढाँचे से निर्देशित होता है।

उन्होंने मध्य एशिया को क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने और आर्थिक एकीकरण को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु बताया। साथ ही उन्होंने दोहराया कि भारत मध्य एशियाई मित्र देशों के साथ मिलकर आतंकवाद के सभी रूपों के विरुद्ध लड़ने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

SCO सिविलाइजेशन डायलॉग और कोलकाता आयोजन

सम्मेलन के दौरान मंत्री सिंह ने घोषणा की कि भारत अगले महीने कोलकाता में पहला SCO सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम आयोजित करने जा रहा है। उन्होंने SCO में भारत की प्राथमिकताओं में युवाओं की भागीदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षेत्रीय जुड़ाव और सभ्यतागत संवाद को केंद्रीय स्थान दिया। यह आयोजन भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री से द्विपक्षीय वार्ता

सम्मेलन के इतर मंत्री सिंह ने ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ताजिकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों की संपूर्ण समीक्षा की और परस्पर लाभकारी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। मंत्री सिंह ने ताजिकिस्तान से कोलकाता SCO सिविलाइजेशन डायलॉग में उच्च-स्तरीय प्रतिभागिता का अनुरोध किया और दोनों देशों के बीच पुरानी मित्रता एवं रणनीतिक साझेदारी को पुनः रेखांकित किया।

यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी मध्य एशिया नीति को और सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है तथा SCO मंच पर अपनी उपस्थिति को बहुआयामी बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन SCO के भीतर भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान के बीच की संरचनात्मक तनाव इस 'साझेदारी' को व्यवहार में जटिल बनाते हैं। कोलकाता में SCO सिविलाइजेशन डायलॉग एक सॉफ्ट पावर दांव है, जो भारत को बहुपक्षीय मंच पर अपनी सांस्कृतिक कूटनीति के ज़रिए अलग पहचान दिलाने की कोशिश है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये संवाद ठोस आर्थिक और संपर्क परियोजनाओं में तब्दील होते हैं, क्योंकि मध्य एशिया में चीन की बेल्ट एंड रोड उपस्थिति पहले से ही गहरी है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीर्ति वर्धन सिंह ने दुशांबे में किस सम्मेलन में भाग लिया?
उन्होंने ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में 'सेंट्रल एशिया — द कोर ऑफ SCO: ए स्पेस ऑफ पीस एंड जॉइंट डेवलपमेंट' विषय पर आयोजित SCO सम्मेलन में 12 जून 2026 को भाग लिया। इस सम्मेलन में उन्होंने मध्य एशिया के साथ भारत की दीर्घकालिक साझेदारी की पुनः पुष्टि की।
SCO की 25वीं वर्षगांठ का क्या महत्व है?
2026 में SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जो संगठन की उपलब्धियों की समीक्षा और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। इस वर्ष SCO की दोनों सर्वोच्च परिषदों की अध्यक्षता मध्य एशियाई देशों किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के पास है।
SCO सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम क्या है और यह कहाँ होगा?
यह SCO के तत्वावधान में आयोजित होने वाला पहला सभ्यतागत संवाद मंच है, जिसे भारत अगले महीने कोलकाता में आयोजित करेगा। इसका उद्देश्य SCO सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को मज़बूत करना है।
भारत-ताजिकिस्तान द्विपक्षीय वार्ता में क्या हुआ?
मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने दुशांबे में ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने ताजिकिस्तान से कोलकाता SCO सिविलाइजेशन डायलॉग में उच्च-स्तरीय भागीदारी का अनुरोध भी किया।
SCO में भारत की प्राथमिकताएँ क्या हैं?
SCO में भारत की प्राथमिकताओं में युवाओं की भागीदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक एकीकरण और आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक लड़ाई शामिल हैं। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा, जुड़ाव और अवसर के ढाँचे पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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