21 जुलाई 2026
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एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक: कीर्ति वर्धन सिंह 23 जुलाई को किर्गिस्तान रवाना, बिश्केक शिखर सम्मेलन की होगी तैयारी

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एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक: कीर्ति वर्धन सिंह 23 जुलाई को किर्गिस्तान रवाना, बिश्केक शिखर सम्मेलन की होगी तैयारी

सारांश

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह 23 जुलाई को किर्गिस्तान के चोलपोन-अता पहुँचेंगे और एससीओ विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक में भारत की नुमाइंदगी करेंगे — यह बैठक 31 अगस्त से 1 सितंबर तक बिश्केक में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन की सीधी तैयारी है।

मुख्य बातें

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह 23 जुलाई 2026 से दो दिन के लिए किर्गिस्तान दौरे पर रवाना होंगे।
वे चोलपोन-अता में एससीओ विदेश मंत्रियों की परिषद (सीएफएम) की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
बैठक का उद्देश्य 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बिश्केक में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए दस्तावेज़ों को अंतिम रूप देना है।
इससे पहले संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एससीओ संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 2026-2027 के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूची को मंजूरी दी गई।
किर्गिस्तान 2025-2026 के लिए एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है; एससीओ में अब 10 सदस्य देश हैं।

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह 23 जुलाई 2026 से दो दिवसीय किर्गिस्तान दौरे पर रवाना होंगे, जहाँ वे चोलपोन-अता में आयोजित शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की परिषद (सीएफएम) की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह बैठक 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बिश्केक में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए बुलाई गई है।

बैठक का एजेंडा और उद्देश्य

विदेश मंत्रालय (एमईए) के आधिकारिक बयान के अनुसार, सीएफएम बैठक में एससीओ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। मंत्रालय ने कहा कि उम्मीद है कि विदेश मंत्री उन दस्तावेजों और फैसलों को अंतिम रूप देंगे जिन्हें बिश्केक शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के सामने मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

कीर्ति वर्धन सिंह बैठक के दौरान एससीओ सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी कर सकते हैं।

किर्गिस्तान की एससीओ अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन की थीम

किर्गिस्तान वर्तमान में 2025-2026 के लिए एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव ने इस अध्यक्षता के लिए 'एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर आगे बढ़ना' विषय निर्धारित किया है। यह वर्ष एससीओ की स्थापना की रजत जयंती का वर्ष भी है।

भारत की एससीओ में सक्रिय भागीदारी

इससे पहले रविवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने चोलपोन-अता में एससीओ सदस्य देशों के संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उस बैठक में सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने, संयुक्त परियोजनाएँ लागू करने, रचनात्मक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन देने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए और 2026-2027 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों की सूची को मंजूरी दी गई।

गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथ जैसी 'बुराइयों' से निपटने के लिए सभी देशों से बिना किसी समझौते के मिलकर कदम उठाने का आह्वान किया था और ऐसे कृत्यों के लिए सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने तथा किसी भी राजनीतिक समर्थन या औचित्य को नकारने की जरूरत पर बल दिया था।

एससीओ: संगठन की पृष्ठभूमि और सदस्यता

एससीओ की स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी। इसके संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे। 2017 में भारत और पाकिस्तान, 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस के शामिल होने के बाद अब इसमें कुल 10 सदस्य देश हैं। संगठन में दो पर्यवेक्षक देश — अफगानिस्तान और मंगोलिया — हैं, जबकि 14 संवाद साझेदार देशों में अजरबैजान, आर्मेनिया, कंबोडिया, नेपाल, तुर्की, श्रीलंका, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, मालदीव, म्यांमार, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत शामिल हैं।

आगे क्या होगा

सीएफएम बैठक के निष्कर्ष सीधे बिश्केक शिखर सम्मेलन के एजेंडे को आकार देंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार संपर्क और बहुपक्षीय सहयोग को लेकर एससीओ की प्रासंगिकता पर नई बहस छिड़ी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संस्कृति और अब विदेश मंत्रालय स्तर पर — यह दर्शाती है कि नई दिल्ली इस मंच को रणनीतिक रूप से महत्व देती है, भले ही चीन और पाकिस्तान भी इसके सदस्य हों। असली सवाल यह है कि बिश्केक शिखर सम्मेलन में भारत किन मुद्दों — आतंकवाद के वित्तपोषण, सीमा-पार संपर्क या व्यापार — पर ठोस प्रतिबद्धता हासिल कर पाता है। एससीओ के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन की प्रासंगिकता और सर्वसम्मति की सीमाएँ दोनों एक साथ परखी जाएँगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीर्ति वर्धन सिंह किर्गिस्तान क्यों जा रहे हैं?
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह 23 जुलाई 2026 को किर्गिस्तान के चोलपोन-अता में एससीओ विदेश मंत्रियों की परिषद (सीएफएम) की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। यह बैठक 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बिश्केक में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए आयोजित की गई है।
एससीओ सीएफएम बैठक में क्या होगा?
बैठक में एससीओ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा होगी और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, उम्मीद है कि मंत्री उन दस्तावेजों और फैसलों को अंतिम रूप देंगे जो बिश्केक शिखर सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों के सामने मंजूरी के लिए रखे जाएँगे।
एससीओ में कितने सदस्य देश हैं और भारत कब शामिल हुआ?
एससीओ में अभी 10 सदस्य देश हैं। भारत 2017 में इसका सदस्य बना था। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस भी शामिल हुए।
बिश्केक एससीओ शिखर सम्मेलन 2026 कब होगा?
एससीओ शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होगा। इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे।
एससीओ में भारत की हालिया भागीदारी कैसी रही है?
हाल के महीनों में भारत ने एससीओ के कई मंचों पर सक्रिय भागीदारी दर्ज की है। अप्रैल 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया, जबकि संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एससीओ संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
राष्ट्र प्रेस
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