एससीओ संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक: गजेंद्र सिंह शेखावत ने चोलपोन-अता में भारत का प्रतिनिधित्व किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत रविवार, 19 जुलाई 2025 को किर्गिस्तान के चोलपोन-अता में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुँचे। बैठक के पहले दिन सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने और साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ।
आगमन और स्वागत
शनिवार को बिश्केक हवाई अड्डे पर शेखावत का स्वागत किर्गिस्तान के सांस्कृतिक एवं भौतिक विरासत विभाग के प्रमुख चिनारबेक झोलदोशेव और किर्गिस्तान में भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने किया। किर्गिस्तान स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पुष्टि की थी कि संस्कृति मंत्री 18 से 20 जुलाई तक चोलपोन-अता में एससीओ सदस्य देशों की इस बैठक में भाग लेंगे।
किर्गिस्तान की अध्यक्षता और बैठक का संदर्भ
वर्तमान में किर्गिस्तान वर्ष 2025-26 के लिए एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव ने अपनी अध्यक्षता का विषय "एससीओ के 25 वर्ष: सतत शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर" निर्धारित किया है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एससीओ अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे करने के करीब है और सांस्कृतिक कूटनीति को बहुपक्षीय संवाद का अहम स्तंभ माना जा रहा है।
भारत की एससीओ में सक्रिय भागीदारी
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में आयोजित एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया था। उस बैठक में उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों से सामूहिक और बिना किसी समझौते वाला दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया था।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा था कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत आतंकवाद के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आतंकवाद के केंद्र अब दंड से नहीं बच सकते। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से राज्य-प्रायोजित सीमापार आतंकवाद को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए कहा कि इसमें दोहरे मापदंड या चयनात्मक रवैये की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
रक्षा मंत्री ने एससीओ से उन देशों और संगठनों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई की माँग की जो आतंकवादियों को समर्थन, शरण या किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करते हैं। उन्होंने पिछले वर्ष जारी तियानजिन घोषणा का उल्लेख करते हुए इसे आतंकवाद के विरुद्ध भारत और सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
एससीओ: संगठन की संरचना और सदस्यता
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी। इसके संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे। 2017 में भारत और पाकिस्तान, 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसके सदस्य बने। वर्तमान में संगठन में 10 सदस्य देश हैं।
संगठन के दो पर्यवेक्षक देश — अफगानिस्तान और मंगोलिया — हैं, जबकि 14 संवाद साझेदार (डायलॉग पार्टनर्स) में अजरबैजान, आर्मेनिया, कंबोडिया, नेपाल, तुर्की, श्रीलंका, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, मालदीव, म्यांमार, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत शामिल हैं।
आगे क्या
बैठक 20 जुलाई 2025 तक चलनी है। इसमें लिए गए निर्णय और सांस्कृतिक सहयोग पर बनी सहमति एससीओ के वार्षिक शिखर सम्मेलन के एजेंडे को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।