20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एससीओ संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक: गजेंद्र सिंह शेखावत ने चोलपोन-अता में भारत का प्रतिनिधित्व किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एससीओ संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक: गजेंद्र सिंह शेखावत ने चोलपोन-अता में भारत का प्रतिनिधित्व किया

सारांश

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत चोलपोन-अता में एससीओ की 23वीं संस्कृति मंत्री बैठक में भारत की आवाज़ बने — यह किर्गिस्तान की अध्यक्षता में सांस्कृतिक कूटनीति को बहुपक्षीय मंच पर स्थापित करने की कोशिश है, जहाँ 10 सदस्य देश साझा विरासत और सहयोग पर एकमत होने की दिशा में काम कर रहे हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 19 जुलाई 2025 को चोलपोन-अता, किर्गिस्तान में एससीओ संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
बैठक 18 से 20 जुलाई 2025 तक आयोजित है; एजेंडे में सांस्कृतिक सहयोग और साझा विरासत संरक्षण शामिल।
किर्गिस्तान वर्ष 2025-26 के लिए एससीओ का अध्यक्ष है; अध्यक्षता का विषय: 'एससीओ के 25 वर्ष: सतत शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर'।
इससे पहले अप्रैल 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्री बैठक में भाग ले चुके हैं।
एससीओ में वर्तमान में 10 सदस्य देश हैं; 2024 में बेलारूस सबसे नया सदस्य बना।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत रविवार, 19 जुलाई 2025 को किर्गिस्तान के चोलपोन-अता में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुँचे। बैठक के पहले दिन सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने और साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ।

आगमन और स्वागत

शनिवार को बिश्केक हवाई अड्डे पर शेखावत का स्वागत किर्गिस्तान के सांस्कृतिक एवं भौतिक विरासत विभाग के प्रमुख चिनारबेक झोलदोशेव और किर्गिस्तान में भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने किया। किर्गिस्तान स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पुष्टि की थी कि संस्कृति मंत्री 18 से 20 जुलाई तक चोलपोन-अता में एससीओ सदस्य देशों की इस बैठक में भाग लेंगे।

किर्गिस्तान की अध्यक्षता और बैठक का संदर्भ

वर्तमान में किर्गिस्तान वर्ष 2025-26 के लिए एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव ने अपनी अध्यक्षता का विषय "एससीओ के 25 वर्ष: सतत शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर" निर्धारित किया है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एससीओ अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे करने के करीब है और सांस्कृतिक कूटनीति को बहुपक्षीय संवाद का अहम स्तंभ माना जा रहा है।

भारत की एससीओ में सक्रिय भागीदारी

गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में आयोजित एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया था। उस बैठक में उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों से सामूहिक और बिना किसी समझौते वाला दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया था।

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा था कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत आतंकवाद के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आतंकवाद के केंद्र अब दंड से नहीं बच सकते। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से राज्य-प्रायोजित सीमापार आतंकवाद को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए कहा कि इसमें दोहरे मापदंड या चयनात्मक रवैये की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

रक्षा मंत्री ने एससीओ से उन देशों और संगठनों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई की माँग की जो आतंकवादियों को समर्थन, शरण या किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करते हैं। उन्होंने पिछले वर्ष जारी तियानजिन घोषणा का उल्लेख करते हुए इसे आतंकवाद के विरुद्ध भारत और सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

एससीओ: संगठन की संरचना और सदस्यता

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी। इसके संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे। 2017 में भारत और पाकिस्तान, 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसके सदस्य बने। वर्तमान में संगठन में 10 सदस्य देश हैं।

संगठन के दो पर्यवेक्षक देश — अफगानिस्तान और मंगोलिया — हैं, जबकि 14 संवाद साझेदार (डायलॉग पार्टनर्स) में अजरबैजान, आर्मेनिया, कंबोडिया, नेपाल, तुर्की, श्रीलंका, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, मालदीव, म्यांमार, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत शामिल हैं।

आगे क्या

बैठक 20 जुलाई 2025 तक चलनी है। इसमें लिए गए निर्णय और सांस्कृतिक सहयोग पर बनी सहमति एससीओ के वार्षिक शिखर सम्मेलन के एजेंडे को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीति है। सांस्कृतिक कूटनीति को अक्सर 'सॉफ्ट पावर' कहकर कमतर आँका जाता है, लेकिन एससीओ जैसे बहुध्रुवीय मंच पर जहाँ चीन और रूस का प्रभाव गहरा है, वहाँ भारत का सक्रिय सांस्कृतिक जुड़ाव उसकी स्वायत्त पहचान को बनाए रखने का औज़ार भी है। असली सवाल यह है कि क्या ये बैठकें ठोस द्विपक्षीय सांस्कृतिक समझौतों में तब्दील होती हैं या केवल प्रतीकात्मक उपस्थिति तक सीमित रहती हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एससीओ संस्कृति मंत्रियों की 23वीं बैठक कहाँ और कब हो रही है?
यह बैठक 18 से 20 जुलाई 2025 तक किर्गिस्तान के चोलपोन-अता में आयोजित की जा रही है। इसमें शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री भाग ले रहे हैं।
भारत का प्रतिनिधित्व इस बैठक में कौन कर रहे हैं?
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका बिश्केक हवाई अड्डे पर किर्गिस्तान के सांस्कृतिक विभाग के प्रमुख और भारतीय राजदूत ने स्वागत किया।
किर्गिस्तान की एससीओ अध्यक्षता का विषय क्या है?
किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव ने 2025-26 की एससीओ अध्यक्षता का विषय 'एससीओ के 25 वर्ष: सतत शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर' निर्धारित किया है।
शंघाई सहयोग संगठन में कितने सदस्य देश हैं और भारत कब शामिल हुआ?
वर्तमान में एससीओ में 10 सदस्य देश हैं। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसमें शामिल हुए थे; इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस सदस्य बने। संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी।
एससीओ मंचों पर भारत ने हाल ही में और कौन-सी बड़ी बैठकों में भाग लिया है?
अप्रैल 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया था, जहाँ उन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक और बिना समझौते वाले दृष्टिकोण की अपील की थी। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए आतंकवाद पर भारत के कड़े रुख को रेखांकित किया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले