27 जुलाई 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश: जमानत याचिका लंबित रहने तक पूर्व TMC विधायक अतीन घोष को गिरफ्तार न करे पुलिस

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कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश: जमानत याचिका लंबित रहने तक पूर्व TMC विधायक अतीन घोष को गिरफ्तार न करे पुलिस

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व TMC विधायक और KMC डिप्टी मेयर अतीन घोष को जमीन हड़पने व ₹50 लाख धोखाधड़ी के मामले में जमानत याचिका लंबित रहने तक गिरफ्तारी से बचाया। न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने पुलिस की 'अंतरिम सुरक्षा खत्म होते ही गिरफ्तारी' की प्रवृत्ति पर भी कड़ी टिप्पणी की।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि जमानत याचिका लंबित रहने तक अतीन घोष को गिरफ्तार न किया जाए।
पूर्व TMC विधायक और KMC डिप्टी मेयर अतीन घोष पर ₹50 लाख की कथित धोखाधड़ी और जमीन हड़पने का आरोप है।
मामले में उनकी बेटी प्रियदर्शनी घोष को भी बिधाननगर नॉर्थ पुलिस स्टेशन ने पूछताछ के लिए बुलाया था।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने पुलिस की अंतरिम सुरक्षा समाप्त होते ही गिरफ्तारी करने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई।
अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित; अतीन घोष ने सभी आरोपों को नकारते हुए जांच में सहयोग का आश्वासन दिया।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार, 27 जुलाई को पश्चिम बंगाल पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक और कोलकाता नगर निगम (KMC) के डिप्टी मेयर अतीन घोष को उनकी अग्रिम जमानत याचिका न्यायालय में विचाराधीन रहने तक हिरासत में न लिया जाए। जमीन हड़पने और ₹50 लाख की कथित धोखाधड़ी से जुड़े इस मामले में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने यह अंतरिम राहत प्रदान की।

मामले का पृष्ठभूमि

पिछले महीने उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर नॉर्थ पुलिस स्टेशन ने अतीन घोष और उनकी बेटी प्रियदर्शनी घोष को पूछताछ के लिए तलब किया था। एक होटल मालिक की शिकायत पर दर्ज इस मामले में आरोप है कि उनकी संपत्ति बेहद कम कीमत पर जबरदस्ती हथिया ली गई। घटना प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन क्षेत्र की बताई जाती है, जबकि शिकायत कोलकाता के साल्ट लेक स्थित बिधाननगर नॉर्थ थाने में दर्ज कराई गई।

न्यायालय की टिप्पणी

सुनवाई मंगलवार तक स्थगित करते हुए न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने पुलिस की उस प्रवृत्ति पर चिंता जताई जिसमें अंतरिम सुरक्षा की अवधि समाप्त होते ही आरोपी को हिरासत में ले लिया जाता है। उन्होंने कहा, "इस मामले में याचिकाकर्ता को गिरफ्तार न करें। मैंने देखा है कि कई मामलों में, किसी भी अंतरिम सुरक्षा की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती है।"

सरकार का पक्ष

न्यायालय की इस टिप्पणी के जवाब में सरकारी वकील ने पीठ को आश्वस्त किया कि पुलिस प्रत्येक मामले में परिस्थितियों के आधार पर कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा, "अगर कोई मामला लंबित है, तो आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। पुलिस को इस बारे में सूचित कर दिया जाएगा।"

अतीन घोष का बयान

अतीन घोष ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा, "मैं उस व्यक्ति को नहीं जानता जिसने शिकायत की है। मेरी बेटी ने उससे एक संपत्ति खरीदी थी। मेरे 50 साल के राजनीतिक जीवन में, कोई भी मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सकता। फिर भी, अगर पुलिस मुझे जांच के लिए बुलाती है, तो मैं हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हूं।"

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 28 जुलाई को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ के समक्ष निर्धारित है। तब तक पश्चिम बंगाल पुलिस न्यायालय के अंतरिम आदेश से बंधी है। यह मामला राज्य में सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों की व्यापक श्रृंखला में एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पश्चिम बंगाल में न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की एक व्यापक प्रवृत्ति की ओर इशारा है। यह ऐसे समय में आया है जब TMC के कई नेता भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे हैं और न्यायपालिका को बार-बार कार्यपालिका की अति से नागरिकों की रक्षा करनी पड़ रही है। अतीन घोष के 50 साल के राजनीतिक करियर का हवाला देना उनका अधिकार है, लेकिन न्यायालय के लिए प्रासंगिक यह है कि क्या जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और कानून-सम्मत है। शिकायत का थाना-क्षेत्र बदलना — प्रगति मैदान से बिधाननगर — भी जांच की दिशा पर स्वाभाविक सवाल उठाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अतीन घोष के मामले में क्या आदेश दिया?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि पूर्व TMC विधायक अतीन घोष की अग्रिम जमानत याचिका न्यायालय में लंबित रहने तक उन्हें गिरफ्तार न किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने दिया।
अतीन घोष पर क्या आरोप हैं?
अतीन घोष और उनकी बेटी प्रियदर्शनी घोष पर एक होटल मालिक की संपत्ति जबरदस्ती और बेहद कम कीमत पर हथियाने का आरोप है। मामले में कथित धोखाधड़ी की राशि ₹50 लाख बताई गई है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ के समक्ष निर्धारित है। तब तक न्यायालय का अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।
अतीन घोष ने आरोपों पर क्या कहा?
अतीन घोष ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने शिकायतकर्ता से संपत्ति खरीदी थी और 50 साल के राजनीतिक जीवन में उन पर कभी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। उन्होंने पुलिस जांच में पूरा सहयोग देने की भी बात कही।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने पुलिस की किस प्रवृत्ति पर आपत्ति जताई?
न्यायमूर्ति घोष ने कहा कि कई मामलों में पुलिस अंतरिम सुरक्षा की अवधि समाप्त होते ही आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लेती है। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया की भावना के विरुद्ध बताते हुए इस मामले में ऐसा न करने का निर्देश दिया।
राष्ट्र प्रेस
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