कोलकाता: TMC पूर्व पार्षद का बेटा सम्राट मुखर्जी गिरफ्तार, ₹34 लाख की जबरन वसूली का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस ने सोमवार, 28 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व पार्षद बिजनलाल मुखर्जी के बेटे सम्राट मुखर्जी को जबरन वसूली और भ्रष्टाचार के कथित मामले में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने एक स्थानीय रियल एस्टेट डेवलपर को धमकाकर करीब ₹34 लाख वसूले। अधिकारियों ने मंगलवार को इस गिरफ्तारी की पुष्टि की।
मुख्य घटनाक्रम
18 जुलाई 2026 को दक्षिण कोलकाता के कस्बा पुलिस थाने में एक रियल एस्टेट डेवलपर ने सम्राट मुखर्जी के खिलाफ पहली शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने धमकी देकर करीब ₹34 लाख वसूले। इसके बाद उसी थाने में एक और शिकायत भी दर्ज की गई। कई दिनों की जांच के बाद कस्बा पुलिस थाने के अधिकारियों ने सोमवार को सम्राट मुखर्जी को हिरासत में ले लिया।
आरोप और कानूनी धाराएँ
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध जबरन वसूली, धमकी और डराने-धमकाने सहित कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में आर्म्स एक्ट की धाराएँ भी जोड़ी गई हैं, जो मामले की गंभीरता को और बढ़ाती हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और 'जीरो टॉलरेंस' नीति
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल सरकार भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त संदेश देने की कोशिश में है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकार जबरन वसूली सहित तमाम अनैतिक गतिविधियों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर चलेगी। गौरतलब है कि इस नीति के तहत TMC और पूर्व TMC नेताओं के खिलाफ हाल के महीनों में कई गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
पहले से हिरासत में अन्य नेता
सम्राट मुखर्जी की गिरफ्तारी कोई अकेली घटना नहीं है। सुजीत बोस, उज्ज्वल बिस्वास और उदयन गुहा जैसे TMC से जुड़े नेता पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों में न्यायिक हिरासत में हैं। यह Nवीं ऐसी गिरफ्तारी है जो पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल से जुड़े नामों को कठघरे में खड़ा करती है।
आगे क्या होगा
पुलिस की जांच अभी जारी है। आर्म्स एक्ट की धाराओं के जुड़ने से आरोपी को जमानत मिलना मुश्किल हो सकता है। अदालत में आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद मामले की दिशा स्पष्ट होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जांच रियल एस्टेट क्षेत्र में और गहरे नेटवर्क को उजागर करती है।