महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम राहत, 5 अक्टूबर तक गिरफ्तारी पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने मंगलवार, 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कृष्णानगर लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को पुलिस की सख्त कार्रवाई — जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है — से 5 अक्टूबर 2026 तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। मोइत्रा पर सार्वजनिक रूप से हिंसा भड़काने वाले बयान देने के आरोप हैं।
न्यायालय का आदेश और शर्तें
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने यह राहत सशर्त दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा तभी लागू रहेगी जब मोइत्रा जाँच के दौरान पुलिस का पूर्ण सहयोग करेंगी। यदि वह सहयोग करने से इनकार करती हैं, तो पुलिस को न्यायालय को तत्काल सूचित करना होगा।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने यह भी निर्देश दिया कि जब मोइत्रा पुलिस स्टेशन में पेश हों, तो उस दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचना सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि उन पर लगे आरोपों में दोषसिद्धि पर 7 वर्ष तक की कारावास की सज़ा हो सकती है, इसलिए पुलिस जाँच जारी रख सकती है।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल सुरजीत नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि मोइत्रा को पूछताछ के लिए चार बार नोटिस भेजे गए थे। हर बार उन्होंने संसद में व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए उपस्थिति से इनकार किया। मित्रा ने कहा, 'सांसद को पहले भी बुलाया गया था। नोटिस मिलने के बावजूद वह पेश नहीं हुईं।'
मोइत्रा के वकील का तर्क
सुनवाई के दौरान मोइत्रा के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क रखा कि पुलिस ने उन्हें अंडे से हुए हमले पर उनकी प्रतिक्रिया के संदर्भ में बुलाया था। उन्होंने अनुरोध किया कि मोइत्रा को पुलिस से वर्चुअली (ऑनलाइन) बात करने की अनुमति दी जाए, ताकि उन्हें शारीरिक रूप से थाने में उपस्थित न होना पड़े।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि नदिया जिले की कृष्णानगर सीट से सांसद मोइत्रा पहले भी विभिन्न विवादों के केंद्र में रही हैं। सार्वजनिक बयानों पर आधारित यह मामला उस व्यापक बहस को भी उजागर करता है कि राजनेताओं के भाषणों की सीमाएँ कहाँ तय होती हैं।
आगे क्या होगा
अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। तब तक पुलिस जाँच जारी रहेगी, लेकिन मोइत्रा के विरुद्ध कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जा सकेगा। यदि वह पुलिस सहयोग की शर्त का पालन नहीं करतीं, तो न्यायालय इस अंतरिम राहत की समीक्षा कर सकता है।