महुआ मोइत्रा का आरोप: भाजपा कार्यकर्ताओं ने फेंके अंडे-पत्थर, डीजीपी से लगाई मदद की गुहार
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने 1 जुलाई को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं ने उनके लोकसभा क्षेत्र के पार्टी कार्यालय के बाहर एकत्र होकर खिड़कियों से अंडे और पत्थर फेंके। मोइत्रा ने दावा किया कि हमले के दौरान पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) मूकदर्शक बने रहे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (X) पर वीडियो जारी कर पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
घटनाक्रम: क्या हुआ कार्यालय के बाहर
मोइत्रा के अनुसार, वह अपने लोकसभा क्षेत्र के कार्यालय में पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रही थीं, तभी बड़ी संख्या में BJP समर्थक वहाँ पहुँच गए। उन्होंने एक्स पर जारी वीडियो में कहा, 'पश्चिम बंगाल के डीजीपी मेरा फोन नहीं उठा रहे हैं। ये लोग खिड़की के ज़रिए अंडे और पत्थर फेंक रहे हैं।' मोइत्रा ने यह भी दावा किया कि फेंके गए अंडे और पत्थर उन्हें भी लगे और उनके कपड़े खराब हो गए।
पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप
मोइत्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस को फोन करने पर शुरू में कोई मदद नहीं मिली। उनके अनुसार, DGP को वीडियो के ज़रिए संदेश देने के बाद पुलिस पहुँची, लेकिन कथित तौर पर वह भी केवल 'तमाशा देखती रही।' एक अन्य वीडियो में उन्होंने कहा, 'हम पर हमला हो रहा है और पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है। मैं यहाँ की सांसद हूँ और यह भीड़ हमला कर रही है, जबकि पुलिस और CRPF तमाशा देख रही है।'
DGP को सीधी चुनौती
मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, 'पिछले दो घंटों से आपकी पुलिस तमाशा देख रही है और भीड़ को नहीं हटा रही है। वे चाहते हैं कि मैं यहाँ से भाग जाऊँ और जब मैं अपनी कार में बैठूँ तो मुझ पर अंडे या पत्थर फेंकें। कृपया अपना काम करें। भीड़ को हटाएँ। मैं इस तरह यहाँ से नहीं निकलूँगी।' उन्होंने DGP को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि एक IPS अधिकारी के नाते भीड़ हटाना उनकी ज़िम्मेदारी है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि चुनावी नतीजों के बाद कई TMC नेताओं पर इसी तरह के हमलों की शिकायतें सामने आई हैं। BJP ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह घटना राज्य में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव की एक और कड़ी मानी जा रही है।
आगे क्या
मोइत्रा के आरोपों के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस और DGP कार्यालय की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नई बहस को जन्म दे सकता है।