जम्मू-कश्मीर इंटर्न डॉक्टरों की ₹12,300 स्टाइपेंड पर नाराज़गी, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप की माँग

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जम्मू-कश्मीर इंटर्न डॉक्टरों की ₹12,300 स्टाइपेंड पर नाराज़गी, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप की माँग

सारांश

जम्मू-कश्मीर के इंटर्न डॉक्टर ₹12,300 की मासिक स्टाइपेंड को अन्यायपूर्ण बताते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से दखल माँग रहे हैं। जबकि ओडिशा और पश्चिम बंगाल में यह राशि ₹30,000 से अधिक है, जम्मू-कश्मीर में फ़ाइल विभागों के बीच महीनों से घूम रही है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों को फ़िलहाल ₹12,300 प्रति माह स्टाइपेंड मिल रही है।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल में इंटर्न डॉक्टरों को ₹30,000 से अधिक मासिक स्टाइपेंड दी जा रही है; बिहार ने भी हाल ही में वृद्धि को मंज़ूरी दी।
स्टाइपेंड वृद्धि की फ़ाइल वित्त विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच उलझी हुई है — दोनों एक-दूसरे पर ज़िम्मेदारी डाल रहे हैं।
मंत्री सकीना इटू ने विधानसभा में कहा कि मामला वित्त विभाग में लंबित है, जबकि विभाग ने इसे मुख्यमंत्री कार्यालय में बताया।
इंटर्न डॉक्टरों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से सीधे हस्तक्षेप की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड वृद्धि की माँग एक बार फिर तेज़ हो गई है। 15 मई 2025 को इंटर्न डॉक्टरों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से सीधे हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि महीनों की प्रतीक्षा के बाद भी उनकी फ़ाइल विभागों के बीच घूम रही है और कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।

मौजूदा स्टाइपेंड और माँग

डॉक्टर मोमिन के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों को फ़िलहाल मात्र ₹12,300 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक एमबीबीएस छात्र लगभग 5 वर्षों की कठिन पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप में लगातार 36 घंटे तक काम करता है, नाइट शिफ्ट देता है और मरीज़ों की सेवा में जुटा रहता है — फिर भी उसे इतनी अल्प राशि पर गुज़ारा करना पड़ता है।

डॉ. मोमिन ने तुलना करते हुए कहा कि आज एक दिहाड़ी मज़दूर भी दिनभर काम करके ₹700 से ₹800 प्रतिदिन कमा लेता है, जबकि एक प्रशिक्षित डॉक्टर को पूरे महीने के लिए केवल ₹12,300 मिलते हैं — जो उनके शब्दों में 'बेहद निराशाजनक और अन्यायपूर्ण' है।

दूसरे राज्यों से पिछड़ता जम्मू-कश्मीर

डॉ. मोमिन ने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को ₹30,000 से अधिक मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। बिहार ने भी हाल ही में इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने को मंज़ूरी दी है। इस तुलना में जम्मू-कश्मीर के डॉक्टर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

फ़ाइल का चक्कर — विभागों में उलझा मामला

इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि स्टाइपेंड वृद्धि की फ़ाइल लगातार एक विभाग से दूसरे विभाग में भेजी जा रही है। वित्त विभाग का कहना है कि फ़ाइल मुख्यमंत्री कार्यालय के पास है, जबकि विधानसभा में मंत्री सकीना इटू ने कहा कि मामला अभी भी वित्त विभाग में लंबित है। यह परस्पर विरोधाभासी जवाब डॉक्टरों की निराशा को और बढ़ा रहे हैं।

गौरतलब है कि लंबे समय से डॉक्टरों को केवल आश्वासन मिल रहे हैं। जब भी वे मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क करते हैं, उन्हें 'जल्द फ़ैसला होगा' कहकर टाल दिया जाता है।

उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील

इन परिस्थितियों में इंटर्न डॉक्टरों ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से सीधे दखल देने की माँग की है। उनका कहना है कि सरकार को इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए, ताकि युवा डॉक्टरों को न्यायसंगत पारिश्रमिक मिल सके।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्वास्थ्य कर्मियों के वेतन और कार्यस्थिति को लेकर बहस तेज़ हो रही है। यदि उपराज्यपाल कार्यालय हस्तक्षेप करता है, तो यह मामला जल्द सुलझ सकता है — अन्यथा इंटर्न डॉक्टरों द्वारा व्यापक आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

300 की स्टाइपेंड और ₹30,000+ के राज्यों के बीच का यह अंतर महज़ आँकड़ों की लड़ाई नहीं है — यह जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य प्रणाली के भविष्य का सवाल है। जब प्रशिक्षित डॉक्टर खुद को दिहाड़ी मज़दूर से कमतर पाते हैं, तो प्रतिभा पलायन का ख़तरा वास्तविक हो जाता है। विभागों के बीच फ़ाइल का यह चक्कर प्रशासनिक जवाबदेही की गहरी कमी को उजागर करता है। उपराज्यपाल कार्यालय का हस्तक्षेप एक अल्पकालिक समाधान हो सकता है, लेकिन असली ज़रूरत एक पारदर्शी नीति-निर्माण प्रक्रिया की है जो स्वास्थ्यकर्मियों को महीनों तक अनिश्चितता में न रखे।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों को अभी कितनी स्टाइपेंड मिलती है?
जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों को फ़िलहाल ₹12,300 प्रति माह स्टाइपेंड दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह राशि उनके काम के घंटों और ज़िम्मेदारी के अनुपात में बेहद कम है।
दूसरे राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को कितनी स्टाइपेंड मिलती है?
ओडिशा और पश्चिम बंगाल में इंटर्न डॉक्टरों को ₹30,000 से अधिक मासिक स्टाइपेंड दी जाती है। बिहार ने भी हाल ही में स्टाइपेंड वृद्धि को मंज़ूरी दी है, जिससे जम्मू-कश्मीर के डॉक्टर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
स्टाइपेंड वृद्धि की फ़ाइल कहाँ अटकी हुई है?
वित्त विभाग का कहना है कि फ़ाइल मुख्यमंत्री कार्यालय के पास है, जबकि मंत्री सकीना इटू ने विधानसभा में कहा कि मामला वित्त विभाग में लंबित है। इस परस्पर विरोधाभासी स्थिति के कारण महीनों से कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
इंटर्न डॉक्टरों ने उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग क्यों की?
विभागीय स्तर पर बार-बार संपर्क करने के बावजूद केवल आश्वासन मिलने से निराश होकर इंटर्न डॉक्टरों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से सीधे दखल देने की अपील की है। उनका मानना है कि उच्चस्तरीय हस्तक्षेप के बिना यह मामला और लंबा खिंचता रहेगा।
इंटर्न डॉक्टर कितने घंटे काम करते हैं?
डॉ. मोमिन के अनुसार, इंटर्न डॉक्टर लगातार 36 घंटे तक काम करते हैं, नाइट शिफ्ट देते हैं और मरीज़ों की सेवा में जुटे रहते हैं। इसके बावजूद उन्हें मात्र ₹12,300 मासिक स्टाइपेंड मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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