क्या स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में डॉक्टरों से समाज सेवा की अपील की?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में डॉक्टरों से समाज सेवा की अपील की?

सारांश

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में नई पीढ़ी के डॉक्टरों से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और स्वास्थ्य सेवा में योगदान देने की अपील की। उन्होंने भारत में मेडिकल शिक्षा में हुई प्रगति की जानकारी साझा की।

मुख्य बातें

सरकार हर एमबीबीएस छात्र पर 30-35 लाख रुपए खर्च करती है।
भारत में 23 एम्स संस्थान हैं।
केजीएमयू को 8वां स्थान मिला है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है।
मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है।

नई दिल्ली, 20 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को बताया कि सरकार हर एमबीबीएस छात्र पर 30-35 लाख रुपए का खर्च करती है। उन्होंने नए डॉक्टरों से समाज की भलाई के लिए कार्य करने का अनुरोध किया।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के 21वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में बोलते हुए, नड्डा ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “सरकार हर एमबीबीएस छात्र पर 30–35 लाख रुपए खर्च करती है।” उन्होंने पास होने वाले छात्रों को शिक्षा और शोध में सक्रिय योगदान देने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने के लिए प्रेरित किया।

स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा, “पिछली सदी के अंत में देश में मात्र एक एम्स था, जबकि आज भारत में 23 एम्स संस्थान हैं। यह सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल ट्रेनिंग में सुधार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है।

इसी तरह, अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,19,000 और पोस्टग्रेजुएट सीटें 31,000 से बढ़कर 80,000 हो गई हैं।

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर 2029 तक अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट दोनों स्तरों पर 75,000 अतिरिक्त सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें से 23,000 से अधिक सीटें एक साल के भीतर ही जोड़ी गई हैं।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं, जो लोगों को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत–पीएमजेएवाय योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक लोगों को, यानी देश की आबादी के 40 प्रतिशत से अधिक को, 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है।

केंद्रीय मंत्री ने पास होने वाले छात्रों को बधाई दी और भारत में चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की देखभाल में केजीएमयू की भूमिका की सराहना की।

उन्होंने कहा, “केजीएमयू को 2025 की एनआईआरएफ रैंकिंग में 8वां स्थान प्राप्त हुआ है, और यहां के 12 शिक्षकों को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय ने दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल किया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।”

मंत्री ने छात्रों को जीवनभर सीखते रहने, नए विचारों को अपनाने, चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाने और करुणा के साथ समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दर्शाता है कि नए डॉक्टरों के लिए समाज की सेवा की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। यह एक सकारात्मक कदम है जो स्वास्थ्य सेवा में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार एमबीबीएस छात्रों पर कितना खर्च करती है?
केंद्र सरकार हर एमबीबीएस छात्र पर 30-35 लाख रुपए खर्च करती है।
भारत में कितने एम्स संस्थान हैं?
भारत में वर्तमान में 23 एम्स संस्थान हैं।
केजीएमयू को 2025 की एनआईआरएफ रैंकिंग में कौन सा स्थान मिला है?
केजीएमयू को 2025 की एनआईआरएफ रैंकिंग में 8वां स्थान मिला है।
आयुष्मान भारत योजना क्या है?
आयुष्मान भारत योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक लोगों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जा रहा है।
कितनी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ी है?
पिछले 11 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है।
राष्ट्र प्रेस