जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंटर्न हड़ताल: ₹12,300 से ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग, GMC-SKIMS सेवाएं ठप
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों के मेडिकल इंटर्न ने सोमवार, 31 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इंटर्न अपना मासिक स्टाइपेंड मौजूदा ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 किए जाने की माँग कर रहे हैं, जो लगभग छह वर्षों से अपरिवर्तित बताया जा रहा है। इस हड़ताल से पूरे केंद्र शासित प्रदेश के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में क्लिनिकल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
हड़ताल का दायरा और प्रभावित संस्थान
अधिकारियों के अनुसार, जीएमसी श्रीनगर और उससे संबद्ध अस्पतालों में इंटर्न ने क्लिनिकल सेवाएं पूरी तरह रोक दी हैं। यह विरोध केवल श्रीनगर तक सीमित नहीं है — एसकेआईएमएस बेमिना, जीएमसी जम्मू, जीएमसी अनंतनाग और जीएमसी बारामूला के इंटर्न भी इस हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इमरजेंसी रूम, वार्ड और आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) पर इसका सीधा असर पड़ा है, क्योंकि इंटर्न अस्पतालों के 24 घंटे के कामकाज की रीढ़ माने जाते हैं।
इंटर्न का पक्ष: महंगाई और लंबी ड्यूटी
हड़ताली इंटर्न का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और अत्यधिक कार्यभार के बावजूद उनका स्टाइपेंड छह वर्षों में नहीं बढ़ाया गया। उनका यह भी कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में जम्मू-कश्मीर में इंटर्न का स्टाइपेंड सबसे कम है। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) के नेशनल कन्वीनर नासिर खेउहामी ने कहा, 'इंटर्न की माँग सच्ची, उचित और पूरी तरह से जायज है। मेडिकल इंटर्न हेल्थकेयर सिस्टम का एक अहम हिस्सा हैं। अपनी अनिवार्य ड्यूटी के दौरान वे वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी डिपार्टमेंट, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और क्लिनिकल सेवाओं में काम करते हैं।' खेउहामी ने यह भी बताया कि इंटर्न अक्सर 24 से 36 घंटे तक लगातार काम करते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू ने एक बयान में स्वीकार किया कि मेडिकल इंटर्न की स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग जायज है। हालाँकि, स्टाइपेंड संशोधन की समयसीमा या प्रक्रिया को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पताल पहले से ही संसाधनों के दबाव में काम कर रहे हैं। इंटर्न की अनुपस्थिति से ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें और इमरजेंसी सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। गौरतलब है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ मिलकर प्राथमिक देखभाल की बड़ी जिम्मेदारी उठाते हैं।
आगे क्या होगा
जेकेएसए ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। हड़ताल तब तक जारी रहने की बात कही जा रही है जब तक स्टाइपेंड संशोधन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य मंत्री के सकारात्मक बयान के बाद अब सरकार और इंटर्न के बीच बातचीत की संभावना बनी है।