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दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का केजरीवाल पर पलटवार, एसआईआर पर संदेह को बताया 'अराजक राजनीति'

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दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का केजरीवाल पर पलटवार, एसआईआर पर संदेह को बताया 'अराजक राजनीति'

सारांश

दिल्ली की मतदाता सूची से एसआईआर के बाद 47 लाख नाम हटने पर केजरीवाल और भाजपा आमने-सामने हैं। भाजपा अध्यक्ष मल्होत्रा का आरोप — AAP चार महीने चुप रही, अब ड्राफ्ट सूची आने पर भ्रम फैला रही है। असली सवाल यह है कि हटाए गए नाम डुप्लीकेट थे या वैध मतदाता।

मुख्य बातें

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने 31 अगस्त को अरविंद केजरीवाल पर एसआईआर विवाद में तीखा पलटवार किया।
एसआईआर प्रक्रिया के बाद दिल्ली की मतदाता सूची से लगभग 47 लाख नाम हटाए गए हैं।
मल्होत्रा का आरोप — AAP ने चार महीने की प्रक्रिया के दौरान एक भी आपत्ति नहीं जताई।
भाजपा का दावा — हटाए गए नाम वे मतदाता हैं जो दो या तीन स्थानों पर पंजीकृत थे।
वैध मतदाता 1 सितंबर के बाद प्रमाण देकर पुनः पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने सोमवार, 31 अगस्त को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा पलटवार किया। मल्होत्रा ने कहा कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद दिल्ली की मतदाता सूची से लगभग 47 लाख नाम हटाए जाने पर चुनाव आयोग की आलोचना करना केजरीवाल की 'अराजक राजनीति' का खुला प्रमाण है। उन्होंने केजरीवाल को 'कन्फ्यूजन फैलाने और झूठे बयान देने में माहिर' नेता करार दिया।

एसआईआर प्रक्रिया: क्या हुआ और कैसे

मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने देशभर की तरह दिल्ली में भी एसआईआर एक्सरसाइज पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की। प्रत्येक मतदाता को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के माध्यम से या सीधे ऑनलाइन फॉर्म जमा करने का पर्याप्त अवसर दिया गया। यह प्रक्रिया लगभग चार महीने तक चली।

उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) प्रतिनिधि भी बूथ स्तर पर इस प्रक्रिया में शामिल थे। एसआईआर का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का हर वयस्क नागरिक केवल एक ही स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकृत हो।

AAP पर निशाना: चार महीने चुप, अब आपत्ति क्यों

भाजपा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि चार महीने की लंबी प्रक्रिया के दौरान आम आदमी पार्टी ने एक बार भी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। मल्होत्रा के अनुसार, अब जब ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो गई है, तब केजरीवाल ने भ्रम फैलाने वाली राजनीति का सहारा लिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल की असली परेशानी यह है कि उनके कई समर्थक, जो दो या तीन स्थानों पर मतदाता के रूप में पंजीकृत थे, उनके नाम एसआईआर के बाद जारी सूची से हटा दिए गए हैं। गौरतलब है कि एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण चुनावी नियमों का उल्लंघन है।

वैध मतदाताओं के लिए क्या विकल्प

मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि जिस भी वास्तविक और योग्य मतदाता ने ऑनलाइन या बीएलओ के माध्यम से फॉर्म जमा किया और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए, उसका नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई योग्य मतदाता पाता है कि ड्राफ्ट सूची में उसका नाम नहीं है, तो वह 1 सितंबर के बाद दिल्ली में वैध मतदाता होने का प्रमाण देकर पुनः पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है।

केजरीवाल को मल्होत्रा की सलाह

दिल्ली भाजपा प्रमुख ने कहा कि यदि केजरीवाल को लगता है कि फॉर्म जमा करने के बावजूद कोई असली और योग्य मतदाता सूची से छूट गया है, तो उन्हें ऐसे मामले चुनाव आयोग के समक्ष रखने चाहिए — न कि सार्वजनिक मंच पर भ्रम फैलाना चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दिल्ली में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी यह सवाल वाजिब है कि क्या सभी हटाए गए नाम वास्तव में अपात्र थे या कुछ वैध मतदाता भी प्रभावित हुए। भाजपा का यह तर्क कि AAP चार महीने चुप रही, राजनीतिक रूप से प्रभावी है — लेकिन यह चुनावी सूची की सटीकता की स्वतंत्र जाँच की जरूरत को खारिज नहीं करता। दिल्ली विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह विवाद आने वाले महीनों में और तीखा होने की संभावना है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर प्रक्रिया क्या है और दिल्ली में इसका क्या असर पड़ा?
एसआईआर यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की एक नियमित प्रक्रिया है। दिल्ली में इस प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 47 लाख नाम हटाए गए हैं, जिस पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है।
दिल्ली की मतदाता सूची से 47 लाख नाम क्यों हटाए गए?
भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के अनुसार, हटाए गए नाम उन मतदाताओं के हैं जो दो या तीन स्थानों पर पंजीकृत थे, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन है। एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक केवल एक स्थान पर मतदाता के रूप में दर्ज हो।
अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग की आलोचना क्यों की?
केजरीवाल ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। भाजपा इसे राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश बता रही है।
यदि किसी वैध मतदाता का नाम सूची से हट गया है तो वह क्या करे?
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष के अनुसार, कोई भी योग्य मतदाता 1 सितंबर के बाद दिल्ली में वैध निवास का प्रमाण देकर पुनः मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। यह विकल्प उन सभी के लिए उपलब्ध है जो वास्तव में पात्र हैं।
AAP ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान आपत्ति क्यों नहीं जताई?
भाजपा का दावा है कि आम आदमी पार्टी ने लगभग चार महीने तक चली एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई, जबकि सभी दलों के बीएलए प्रतिनिधि बूथ स्तर पर इस प्रक्रिया में शामिल थे। AAP की ओर से इस आरोप पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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