दिल्ली एसआईआर समय-सीमा विस्तार पर भाजपा का स्वागत, हर्ष मल्होत्रा ने AAP-कांग्रेस पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने शुक्रवार, 17 जुलाई को चुनाव आयोग द्वारा राजधानी में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की समय-सीमा बढ़ाए जाने के फैसले का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस नेताओं द्वारा पूर्वांचली मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर फैलाई जा रही कथित गलत सूचनाओं से सावधान रहें।
भाजपा का स्वागत और एसआईआर का उद्देश्य
मल्होत्रा ने कहा कि एसआईआर की बढ़ी हुई समय-सीमा से बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को पूरी पारदर्शिता के साथ अपना काम पूरा करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। उन्होंने एसआईआर के दो मुख्य उद्देश्य गिनाए — पहला, यह सुनिश्चित करना कि कोई भी विदेशी नागरिक भारतीय मतदाता के रूप में पंजीकृत न हो; और दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक भारतीय नागरिक केवल एक ही स्थान पर मतदाता के रूप में दर्ज हो।
AAP और कांग्रेस पर निशाना
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि AAP नेता दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचली समुदाय और झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध भड़काने का काम करते रहते हैं। मल्होत्रा के अनुसार, AAP नेता यह भूल जाते हैं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से आकर दिल्ली में बसे लोगों ने अपने गृह राज्यों में लगातार भाजपा सरकारों को चुना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि AAP नेताओं ने पूर्वांचल समुदाय के नाम पर एसआईआर का मुद्दा उठाया है, लेकिन उनका 'असली मकसद' अपने कथित बांग्लादेशी और रोहिंग्या मतदाताओं को बचाना है। यह AAP की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पूर्वांचली समुदाय को संदेश
मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में पंजीकृत किसी भी वैध निवासी का मतदाता नाम नहीं हटाया जा सकता और भाजपा ऐसा कोई काम नहीं होने देगी। उन्होंने पूर्वांचल क्षेत्र के नागरिकों को सलाह दी कि वे सरकारी बीएलओ, भाजपा के बीएलए-2 प्रतिनिधियों या भाजपा पूर्वांचल मोर्चा के कार्यकर्ताओं की सहायता से अपना वैध मतदाता पंजीकरण सुनिश्चित करें।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं की संख्या राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब चुनाव आयोग मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एसआईआर अभियान चला रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया को लेकर विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक खींचतान तेज़ हो गई है। आगे चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर के अंतिम परिणाम यह तय करेंगे कि इस विवाद का हल किस दिशा में निकलता है।