13 जुलाई 2026
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सुप्रीम कोर्ट का SIR पर फैसला: भाजपा बोली — विपक्ष को राष्ट्रहित से ज़्यादा मृत वोटरों की चिंता

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सुप्रीम कोर्ट का SIR पर फैसला: भाजपा बोली — विपक्ष को राष्ट्रहित से ज़्यादा मृत वोटरों की चिंता

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने SIR को वैध ठहराया और भाजपा ने इसे विपक्ष पर राजनीतिक हमले का अवसर बना लिया। भाजपा नेताओं का आरोप — कांग्रेस और TMC को राष्ट्रहित की नहीं, मृत व फर्जी वोटों को बचाने की चिंता है। फैसले ने मतदाता सूची शुद्धिकरण बहस को नई धार दे दी है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2025 को मतदाता सूची के SIR (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया।
भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संवैधानिक अधिकार है।
भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने स्वयं बेंगलुरु प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक की मतदाता सूची में गड़बड़ियों का उल्लेख किया था।
गृह मंत्रालय द्वारा जनसांख्यिकीय बदलाव की जाँच के लिए उच्च-स्तरीय समिति गठित की गई है।
भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को मतदाता बनाने का आरोप लगाया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2025 को मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए फैसला सुनाया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष को राष्ट्रहित की नहीं, बल्कि मृत, फर्जी और अवैध वोटों को बचाने की चिंता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग (ECI) के पास लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा, "SIR को लेकर भ्रम पैदा करने की विपक्ष की कोशिश को आज न्यायपालिका से कड़ा जवाब मिला है।"

चुघ ने आगे कहा कि अवैध घुसपैठ और बड़े पैमाने पर पलायन के संदर्भ में मतदाता सूची को शुद्ध करना समय की माँग है। उनके अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) नेतृत्व 'मृत वोटरों', फर्जी मतों और घुसपैठियों के वोटों को लेकर अधिक चिंतित प्रतीत होता है।

रोहन गुप्ता का विपक्ष पर सीधा हमला

भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय उन लोगों के लिए करारा जवाब है जो SIR के मुद्दे पर राजनीति कर रहे थे। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्वयं बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कर्नाटक की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया था। गुप्ता ने तर्क दिया कि जब उन्हीं गड़बड़ियों को दूर करने के लिए SIR लाया गया, तो उसका भी विरोध किया गया।

उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल की जनता से मुँह की खाने के बाद भी विपक्ष अफवाह फैलाने से बाज नहीं आया। गुप्ता के अनुसार, विपक्ष को SIR के नाम पर राजनीति बंद कर आत्मचिंतन करना चाहिए।

जनसांख्यिकीय बदलाव पर गृह मंत्रालय की समिति

गुप्ता ने गृह मंत्रालय द्वारा जनसांख्यिकीय बदलाव की जाँच के लिए उच्च-स्तरीय समिति गठित किए जाने के मामले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे एक संवेदनशील किंतु आवश्यक कदम बताते हुए कहा कि यदि किसी षड्यंत्र या अन्य कारण से असामान्य जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहा हो, तो सरकार का इस पर ध्यान देना अनिवार्य है। उन्होंने पाकिस्तान में स्वतंत्रता के बाद से हुए जनसंख्या परिवर्तन का उदाहरण देते हुए भारत को सतर्क रहने की अपील की।

तृणमूल कांग्रेस पर निशाना

गुप्ता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर भी हमला बोलते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल से घुसपैठियों के जाने की खबरों ने TMC का पर्दाफाश कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC ने घुसपैठियों को मतदाता बनाकर बंगाल की जनता के अधिकारों का हनन किया। उनके अनुसार, भाजपा हमेशा से यह कहती रही है कि घुसपैठ एक राष्ट्रीय मुद्दा है, न कि चुनावी।

आगे क्या

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद SIR प्रक्रिया को कानूनी स्वीकृति मिल गई है। अब यह देखना होगा कि विपक्षी दल इस निर्णय के बाद अपनी रणनीति में क्या बदलाव करते हैं और चुनाव आयोग मतदाता सूची शुद्धिकरण की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक दलों ने इसे तुरंत अपने-अपने आख्यान में ढाल लिया। भाजपा का 'मृत वोटर' वाला तर्क चुनावी रूप से प्रभावशाली है, पर इसके साथ यह प्रश्न भी उठता है कि SIR प्रक्रिया में वैध मतदाताओं के नाम कटने के जो आरोप विपक्ष ने लगाए थे, उनका समाधान कैसे सुनिश्चित होगा। जनसांख्यिकीय बदलाव पर गृह मंत्रालय की समिति एक संवेदनशील कदम है — इसकी पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर निगाह रखना ज़रूरी होगा। बहस अब केवल मतदाता सूची की नहीं, बल्कि यह है कि लोकतंत्र में नागरिकता और मताधिकार की परिभाषा को कौन तय करेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर क्या फैसला दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2025 को मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया। इस फैसले से चुनाव आयोग को मतदाता सूची शुद्धिकरण का अधिकार कानूनी रूप से पुष्ट हुआ।
SIR क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा था?
SIR यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची से मृत, फर्जी या अपात्र नाम हटाए जाते हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया में वैध मतदाताओं के नाम भी काटे जा रहे हैं, जिसे भाजपा ने राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश करार दिया।
भाजपा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व मृत, फर्जी और घुसपैठियों के वोटों को बचाने में अधिक रुचि रखता है। भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने यह भी याद दिलाया कि राहुल गांधी ने स्वयं बेंगलुरु में कर्नाटक की मतदाता सूची में गड़बड़ियों की बात कही थी।
गृह मंत्रालय की जनसांख्यिकीय बदलाव समिति क्या है?
गृह मंत्रालय ने देश में जनसांख्यिकीय बदलावों की जाँच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की है। भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने इसे आवश्यक बताते हुए कहा कि असामान्य जनसंख्या परिवर्तन पर सरकार का ध्यान देना ज़रूरी है।
इस फैसले का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर होगा?
भाजपा ने इस फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि TMC ने घुसपैठियों को मतदाता बनाकर बंगाल की जनता के अधिकारों का हनन किया। अब TMC पर यह दबाव बढ़ेगा कि वह मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों का जवाब दे।
राष्ट्र प्रेस
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