सुप्रीम कोर्ट ने SIR को संविधान सम्मत ठहराया, BJP बोली — विपक्ष की राजनीतिक, संवैधानिक और नैतिक हार
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के उस निर्णय को वैध ठहराया, जिसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लागू करने का आदेश दिया गया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया चुनाव आयोग की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों के दायरे में आती है तथा इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता सुनिश्चित करना है। फैसले के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विपक्ष के आरोपों की विफलता बताया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: मुख्य बिंदु
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि SIR प्रक्रिया न केवल संविधान सम्मत है, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए आवश्यक भी है। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यह फैसला उन याचिकाओं के संदर्भ में आया जिनमें SIR की वैधता को चुनौती दी गई थी।
सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया
BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने SIR को पूर्णतः संविधान सम्मत घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा, 'बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में राजनीतिक दृष्टि से करारी हार मिलने के बाद, अनर्गल बयानों और अफवाहों के बावजूद जनता से किसी भी प्रकार का समर्थन न मिलने के पश्चात अब विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी, नैतिक और संवैधानिक दोनों मोर्चों पर भी पूरी तरह पराजित हो चुकी है।'
त्रिवेदी ने आगे कहा कि लोकतंत्र की सभी संस्थाओं पर अपनी अकर्मण्यता और राजनीतिक अक्षमता को छिपाने के लिए आरोप-प्रत्यारोप और अपमान का जो खेल खेला जा रहा था, वह आज सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पूरी तरह निष्फल साबित हो गया है। उन्होंने इसे कांग्रेस और समूचे विपक्ष की 'राजनीतिक, संवैधानिक और नैतिक' — तीनों आयामों पर निर्णायक पराजय बताया, जिसे उन्होंने 'PCM' (Political, Constitutional, Moral) पराजय की संज्ञा दी।
विपक्ष पर BJP के गंभीर आरोप
त्रिवेदी ने यह भी कहा कि मामला केवल SIR के आरोपों के बेबुनियाद साबित होने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष का 'अनुबंध चीन के साथ है, सोच का केंद्र इंग्लैंड और यूरोप में है, दुष्प्रचार का केंद्र अमेरिकी संस्थाएं हैं और वोटों का प्रवाह बांग्लादेश से जुड़ा है।' उन्होंने इंडी गठबंधन को 'सनातन धर्म का विरोधी और घुसपैठियों का संरक्षक' भी बताया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि SIR को लेकर विपक्षी दलों ने लंबे समय से आपत्तियाँ जताई थीं और इसे मतदाता सूची से वंचित वर्गों के नाम हटाने की कोशिश बताया था। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद विपक्ष पहले से ही राजनीतिक दबाव में है। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय चुनाव आयोग की स्वायत्तता और उसकी प्रशासनिक शक्तियों को संवैधानिक स्वीकृति प्रदान करता है।
आगे क्या
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद SIR प्रक्रिया अब बिना किसी कानूनी बाधा के आगे बढ़ सकती है। विपक्षी दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को और मजबूत आधार देगा।