सुप्रीम कोर्ट ने SIR को संवैधानिक ठहराया, भाजपा ने विपक्ष से गलती स्वीकारने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को पूरी तरह संवैधानिक करार देते हुए चुनाव आयोग (ECI) को नागरिकता जाँच का अधिकार प्रदान किया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर हमला तेज करते हुए उससे सार्वजनिक रूप से गलती स्वीकार करने और चुनाव आयोग के खिलाफ 'झूठे प्रचार' को बंद करने की माँग की है। यह फैसला 28 मई को एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनाया गया।
भाजपा के प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक ठहराया है और स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता की जाँच करने का अधिकार है। यह लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी फैसला है। वोटर लिस्ट साफ और सही होनी चाहिए। मृत लोग या दूसरे राज्यों में चले गए लोगों के नाम पर वोट नहीं डाले जाने चाहिए। ऐसी हरकतें लोकतंत्र को कमजोर करती हैं।'
भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि न्यायालय ने विपक्ष को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने कहा, 'जो लोग यह नैरेटिव चला रहे थे कि चुनाव आयोग भ्रष्ट है, वोट चोरी में शामिल है या पक्षपाती है, उन्हें कोर्ट से कड़ी फटकार मिली है। अब उन्हें अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।'
संसद और राज्य स्तर पर प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी नेताओं को ऐसे बयान देना बंद कर देना चाहिए। उन्हें इससे सबक लेना चाहिए और चुनाव आयोग तथा एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ झूठा प्रचार बंद करना चाहिए। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी शक्तियाँ संविधान के तहत सुरक्षित हैं।'
बिहार के मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा, 'मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूँ और देश के सभी नागरिक भी इसका सम्मान करते हैं। जो लोग इस फैसले से आहत हैं, वे भारत के सच्चे नागरिक नहीं हैं। वे किसी न किसी तरह घुसपैठ के जरिए यहाँ आए हैं।'
एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य
चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया का मकसद फर्जी मतदाताओं, मृत व्यक्तियों और दोहरे नामों को मतदाता सूची से हटाना है। गौरतलब है कि यह प्रक्रिया उन याचिकाओं के केंद्र में थी जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने अब खारिज कर दिया है। भाजपा का कहना है कि यह प्रक्रिया स्वच्छ और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को एसआईआर प्रक्रिया जारी रखने का संवैधानिक आधार मिल गया है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। विपक्षी दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।