12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुप्रीम कोर्ट ने SIR को संवैधानिक ठहराया, भाजपा ने विपक्ष से गलती स्वीकारने की मांग की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट ने SIR को संवैधानिक ठहराया, भाजपा ने विपक्ष से गलती स्वीकारने की मांग की

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक ठहराया — और भाजपा ने इसे विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक हथियार बना लिया। चुनाव आयोग को नागरिकता जाँच का अधिकार मिलने के बाद अब असली सवाल यह है कि विपक्ष इस फैसले पर क्या रुख अपनाता है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 28 मई को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को पूरी तरह संवैधानिक घोषित किया।
चुनाव आयोग (ECI) को नागरिकता जाँच का अधिकार प्रदान किया गया, जिसे याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी थी।
भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी.
सिंह और अजय आलोक ने विपक्ष से सार्वजनिक रूप से गलती स्वीकार करने की माँग की।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियाँ न्यायालय ने स्पष्ट कर दी हैं।
एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, मृत और दोहरे नाम हटाना है।

सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को पूरी तरह संवैधानिक करार देते हुए चुनाव आयोग (ECI) को नागरिकता जाँच का अधिकार प्रदान किया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर हमला तेज करते हुए उससे सार्वजनिक रूप से गलती स्वीकार करने और चुनाव आयोग के खिलाफ 'झूठे प्रचार' को बंद करने की माँग की है। यह फैसला 28 मई को एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनाया गया।

भाजपा के प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक ठहराया है और स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता की जाँच करने का अधिकार है। यह लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी फैसला है। वोटर लिस्ट साफ और सही होनी चाहिए। मृत लोग या दूसरे राज्यों में चले गए लोगों के नाम पर वोट नहीं डाले जाने चाहिए। ऐसी हरकतें लोकतंत्र को कमजोर करती हैं।'

भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि न्यायालय ने विपक्ष को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने कहा, 'जो लोग यह नैरेटिव चला रहे थे कि चुनाव आयोग भ्रष्ट है, वोट चोरी में शामिल है या पक्षपाती है, उन्हें कोर्ट से कड़ी फटकार मिली है। अब उन्हें अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।'

संसद और राज्य स्तर पर प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी नेताओं को ऐसे बयान देना बंद कर देना चाहिए। उन्हें इससे सबक लेना चाहिए और चुनाव आयोग तथा एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ झूठा प्रचार बंद करना चाहिए। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी शक्तियाँ संविधान के तहत सुरक्षित हैं।'

बिहार के मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा, 'मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूँ और देश के सभी नागरिक भी इसका सम्मान करते हैं। जो लोग इस फैसले से आहत हैं, वे भारत के सच्चे नागरिक नहीं हैं। वे किसी न किसी तरह घुसपैठ के जरिए यहाँ आए हैं।'

एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य

चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया का मकसद फर्जी मतदाताओं, मृत व्यक्तियों और दोहरे नामों को मतदाता सूची से हटाना है। गौरतलब है कि यह प्रक्रिया उन याचिकाओं के केंद्र में थी जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने अब खारिज कर दिया है। भाजपा का कहना है कि यह प्रक्रिया स्वच्छ और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को एसआईआर प्रक्रिया जारी रखने का संवैधानिक आधार मिल गया है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। विपक्षी दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भाजपा का इसे विशुद्ध रूप से राजनीतिक जीत के रूप में पेश करना उस व्यापक बहस को दरकिनार करता है जो एसआईआर के क्रियान्वयन को लेकर उठी थी। आलोचकों का कहना है कि नागरिकता जाँच की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अनुप्रयोग सुनिश्चित करना अभी भी एक खुला सवाल है। संवैधानिकता की स्वीकृति और जमीनी क्रियान्वयन की निष्पक्षता — दोनों अलग-अलग प्रश्न हैं, जिन्हें एक साथ नहीं घोलना चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि विपक्ष की मूल चिंताएँ — प्रक्रियागत पारदर्शिता और हाशिये के मतदाताओं पर असर — न्यायालय के संवैधानिक निर्णय से पूरी तरह हल नहीं होतीं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई एक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, मृत और दोहरे नामों को हटाना तथा नागरिकता की जाँच करना है। सर्वोच्च न्यायालय ने 28 मई को इसे पूरी तरह संवैधानिक घोषित किया।
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर क्या फैसला सुनाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक करार दिया और स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता जाँच का संवैधानिक अधिकार है। इस फैसले ने एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।
भाजपा ने इस फैसले पर विपक्ष से क्या माँग की है?
भाजपा ने विपक्ष से सार्वजनिक रूप से गलती स्वीकार करने और चुनाव आयोग के खिलाफ 'झूठे प्रचार' को बंद करने की माँग की है। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि जो लोग चुनाव आयोग को पक्षपाती बता रहे थे, उन्हें न्यायालय से फटकार मिली है।
एसआईआर प्रक्रिया से आम मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा?
इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जाएगी और फर्जी, मृत तथा दोहरे नाम हटाए जाएँगे। वैध मतदाताओं के लिए यह मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाएगी, हालाँकि आलोचकों का कहना है कि क्रियान्वयन में पारदर्शिता जरूरी है।
क्या विपक्ष ने इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
फैसले के तुरंत बाद विपक्षी दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा नेताओं ने उन पर चुनाव आयोग की छवि खराब करने का आरोप लगाया है और माफी की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले