26 अगस्त 2026
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एसआईआर फैसले पर योगेंद्र यादव की आलोचना, भाजपा ने कहा — 'संस्थाओं पर अविश्वास फैलाना गैर-जिम्मेदाराना'

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एसआईआर फैसले पर योगेंद्र यादव की आलोचना, भाजपा ने कहा — 'संस्थाओं पर अविश्वास फैलाना गैर-जिम्मेदाराना'

सारांश

एसआईआर पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव ने चुनौती दी तो भाजपा ने कड़ा पलटवार किया। अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा कि अदालत पर 'जिम्मेदारी छोड़ने' का आरोप लगाना संवैधानिक प्रक्रिया का अपमान है — और यह टकराव न्यायपालिका की साख पर बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया।
याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव ने फैसले की आलोचना की और अदालत पर सवाल उठाए।
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट कर यादव की टिप्पणियों को 'लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना' बताया।
मालवीय ने कहा कि असहमति लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अदालत पर 'मताधिकार छीनने' का आरोप संवैधानिक प्रक्रिया का अपमान है।
यह विवाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर चल रही राष्ट्रीय बहस के बीच सामने आया।

राजनीतिक कार्यकर्ता और याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की आलोचना की, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 27 मई 2026 को तीखा पलटवार किया। भाजपा ने कहा कि शीर्ष अदालत पर यह आरोप लगाना कि उसने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी छोड़ दी, 'लापरवाह, गैर-जिम्मेदाराना और संस्थाओं पर विश्वास को कमजोर करने वाला' है।

फैसले की पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के एसआईआर कराने के निर्णय को संवैधानिक रूप से सही ठहराया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग के संवैधानिक और वैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है, और इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं शुद्धता बनाए रखना है। यह फैसला उन याचिकाओं के बाद आया जिनमें एसआईआर की वैधता को चुनौती दी गई थी।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिकाकर्ता ने प्रतिकूल फैसले के बाद देश की सर्वोच्च संवैधानिक अदालत पर आरोप लगाए हैं।' उन्होंने कहा कि असहमति जताना और पुनर्विचार याचिका दायर करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अदालत पर 'जानबूझकर मताधिकार छीनने में भूमिका निभाने' का आरोप लगाना सर्वथा अनुचित है।

मालवीय ने आगे कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद एसआईआर की संवैधानिकता को सही ठहराया है। इस फैसले को सिर्फ इसलिए पहले से तय बताकर खारिज कर देना कि यह किसी की राजनीतिक या वैचारिक स्थिति से मेल नहीं खाता, न सिर्फ कोर्ट का, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया का भी अपमान है।'

योगेंद्र यादव पर सीधा निशाना

मालवीय की टिप्पणी सीधे योगेंद्र यादव को संबोधित थी। उन्होंने कहा, 'याचिकाकर्ता खुद को लोकतंत्र और नैतिकता का एकमात्र संरक्षक बताने की कोशिश कर रहे हैं। यह दिखावा शायद तभी गंभीर लगता जब यह किसी ऐसे व्यक्ति से आता जिसके पास बौद्धिक ईमानदारी और संस्थाओं के प्रति सम्मान का रिकॉर्ड हो।' गौरतलब है कि यादव उन याचिकाकर्ताओं में शामिल थे जिन्होंने एसआईआर को न्यायालय में चुनौती दी थी।

संस्थाओं पर विश्वास का सवाल

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि 'संस्थाओं की आलोचना का अधिकार उन्हें कमजोर करने का अधिकार नहीं देता, खासकर तब जब फैसले उनके पक्ष में न हों।' उन्होंने अपनी बात इस टिप्पणी के साथ समाप्त की कि 'भारत का लोकतंत्र उन स्वयंभू सुधारकों की निराशा से कहीं अधिक मजबूत है जो मानते हैं कि हर संस्था तभी वैध है जब वह उनके अनुसार फैसला दे।' यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब न्यायपालिका की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस तेज है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह चयनात्मक संस्थावाद है। दूसरी ओर, यदि हर प्रतिकूल फैसले के बाद अदालत की मंशा पर सवाल उठाए जाएँ, तो यह न्यायिक संस्थाओं की साख को वास्तविक नुकसान पहुँचाता है। असली कसौटी यह है कि क्या एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही के पर्याप्त तंत्र हैं — यह सवाल न तो भाजपा ने उठाया, न ही यादव की आलोचना में इसका ठोस जवाब था।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों की गहन जाँच और सफाई करता है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे चुनाव आयोग के संवैधानिक और वैधानिक अधिकार क्षेत्र में माना है।
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर पर क्या फैसला दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के एसआईआर कराने के निर्णय को संवैधानिक रूप से सही ठहराया। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और शुद्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
योगेंद्र यादव ने फैसले पर क्या आपत्ति जताई?
याचिकाकर्ता और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने सर्वोच्च न्यायालय के एसआईआर फैसले पर सवाल उठाए और अदालत की भूमिका को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियाँ कीं। उनके अनुसार फैसले से मताधिकार प्रभावित हो सकता है।
भाजपा ने योगेंद्र यादव की आलोचना पर क्या कहा?
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अदालत पर 'जिम्मेदारी छोड़ने' का आरोप लगाना 'लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना' है। उन्होंने कहा कि असहमति जताना या पुनर्विचार याचिका दायर करना लोकतांत्रिक है, लेकिन संस्थाओं पर अविश्वास फैलाना नहीं।
इस विवाद का व्यापक राजनीतिक संदर्भ क्या है?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब न्यायपालिका की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस जारी है। न्यायिक फैसलों की आलोचना की स्वीकार्य सीमा और संस्थाओं के प्रति जवाबदेही के सवाल इस प्रकरण के केंद्र में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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