SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद भाजपा का वार — राहुल गांधी और अखिलेश यादव माफी मांगें
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 28 मई 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को पूर्णतः संवैधानिक और वैध ठहराते हुए इसे चुनौती देने वाली सभी याचिकाएँ खारिज कर दीं। इस फैसले के तत्काल बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने विपक्ष — विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव — पर तीखा प्रहार करते हुए सार्वजनिक माफी की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
सर्वोच्च न्यायालय ने SIR प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विपक्ष के उन सभी तर्कों को अस्वीकार कर दिया जिनमें कहा गया था कि SIR को मतदाता सूची पुनरीक्षण में शामिल नहीं किया जा सकता और इसके कार्य असंवैधानिक हैं। उल्लेखनीय है कि ये आरोप वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायालय के समक्ष रखे थे, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लंबे समय से SIR पर संवैधानिक प्रश्नचिह्न लगाते रहे हैं और इसे चुनाव आयोग (ECI) की स्वायत्तता के लिए खतरा बताते रहे हैं।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केसवन ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'सत्यमेव जयते।' उन्होंने आगे कहा, 'यह राहुल गांधी के मनगढ़ंत झूठ और SIR के बारे में फैलाए गए कोरे झूठ की बहुत बड़ी हार है। यह डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निर्णायक जीत है। राहुल गांधी को SIR प्रक्रिया के बारे में देश को गुमराह करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।'
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष को फटकार लगाई है। राहुल गांधी हों, अखिलेश यादव हों, ममता बनर्जी हों या कोई और — जिन्होंने SIR का गलत वर्णन किया और जनता को गुमराह करने की कोशिश की, उन्हें पूरे देश और चुनाव आयोग से माफी मांगनी चाहिए।'
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने SIR को लेकर फैलाई गई सभी गलतफहमियों और आरोपों को खारिज कर दिया है। कुछ लोगों ने दावा किया था कि SIR को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता और उसके कार्य असंवैधानिक थे, लेकिन कोर्ट ने इन सभी दावों को रद्द कर दिया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के वे सभी आरोप जो उचित कानूनी प्रक्रिया न अपनाने को लेकर थे, न्यायालय में टिक नहीं सके।
आम जनता पर असर
SIR प्रक्रिया के वैध ठहराए जाने का सीधा अर्थ है कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण बिना किसी कानूनी अवरोध के जारी रह सकता है। गौरतलब है कि यह प्रक्रिया करोड़ों मतदाताओं के नामांकन और सत्यापन से सीधे जुड़ी है, इसलिए इसकी संवैधानिक स्थिति का स्पष्ट होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
फैसले के बाद अब राजनीतिक बहस इस ओर मुड़ने की संभावना है कि विपक्ष इस निर्णय पर क्या रुख अपनाता है। भाजपा ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को आगामी चुनावी प्रचार में भी उठाएगी। विपक्षी दलों की ओर से अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।