एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद BJP बोली — राहुल गांधी और कांग्रेस का असली चेहरा उजागर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार, 27 मई को कहा कि मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अवैध घुसपैठियों के पक्ष में खड़े थे। सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के एसआईआर कराने के अधिकार को संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध ठहराया है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराना चुनाव आयोग के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के अंतर्गत आता है। न्यायालय ने यह भी माना कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित की गई और इसमें किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ। इस फैसले का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना है।
BJP प्रवक्ताओं की प्रतिक्रिया
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, 'राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का पर्दाफ़ाश हो गया है! सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक घोषित किया है!' उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने शुरू से ही एसआईआर का विरोध इसलिए किया क्योंकि वे भारतीय मतदाताओं के बजाय अवैध घुसपैठियों के समर्थन में थे। भंडारी ने इसे 'राष्ट्र-विरोधी कदम' बताते हुए सवाल किया कि क्या राहुल गांधी अब भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए माफी माँगेंगे।
BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने फैसले को 'कागज नहीं दिखाएंगे वाले गिरोह पर सर्जिकल स्ट्राइक' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह वही गिरोह है जो चुनाव आने पर एसआईआर को बहाना बनाता है।
कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप
पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल में एसआईआर को दोष देती है, जबकि केरल में उसे कोई आपत्ति नहीं थी — क्योंकि वहाँ कांग्रेस चुनाव जीतने में सफल रही। उन्होंने यह भी कहा कि जब कांग्रेस के शासन में एसआईआर होता था, तो वह सही था, लेकिन BJP के शासन में होने पर गलत बताया जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है।
बिहार और बंगाल का संदर्भ
पूनावाला ने कहा कि बिहार चुनाव के दौरान विपक्ष ने एसआईआर पर शोर मचाया, लेकिन कोई ठोस दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि बिहार और बंगाल दोनों में हुए एसआईआर को अब स्वयं सर्वोच्च न्यायालय ने सही ठहराया है। BJP ने माँग की कि जो भी लोग एसआईआर पर सवाल उठा रहे थे, उन्हें अब माफी माँगनी चाहिए।
आगे की स्थिति
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक वैधता मिल गई है। यह फैसला आने वाले चुनावों में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर होने वाली बहस को नई दिशा देगा। विपक्षी दलों की ओर से अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।