12 जुलाई 2026
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एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद BJP बोली — राहुल गांधी और कांग्रेस का असली चेहरा उजागर

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एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद BJP बोली — राहुल गांधी और कांग्रेस का असली चेहरा उजागर

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को संवैधानिक वैधता दी, जिसके बाद BJP ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर घुसपैठियों का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए माफी की माँग की।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कराने के अधिकार को संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध ठहराया।
BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि फैसले से राहुल गांधी और कांग्रेस का 'असली चेहरा' उजागर हुआ।
BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने फैसले को 'सर्जिकल स्ट्राइक' बताया और विपक्ष पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया।
पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस बंगाल में एसआईआर का विरोध करती है, लेकिन केरल में चुप रही।
BJP ने माँग की कि एसआईआर पर सवाल उठाने वाले सभी नेता अब सार्वजनिक माफी माँगें।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार, 27 मई को कहा कि मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अवैध घुसपैठियों के पक्ष में खड़े थे। सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के एसआईआर कराने के अधिकार को संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध ठहराया है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराना चुनाव आयोग के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के अंतर्गत आता है। न्यायालय ने यह भी माना कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित की गई और इसमें किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ। इस फैसले का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना है।

BJP प्रवक्ताओं की प्रतिक्रिया

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, 'राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का पर्दाफ़ाश हो गया है! सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक घोषित किया है!' उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने शुरू से ही एसआईआर का विरोध इसलिए किया क्योंकि वे भारतीय मतदाताओं के बजाय अवैध घुसपैठियों के समर्थन में थे। भंडारी ने इसे 'राष्ट्र-विरोधी कदम' बताते हुए सवाल किया कि क्या राहुल गांधी अब भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए माफी माँगेंगे।

BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने फैसले को 'कागज नहीं दिखाएंगे वाले गिरोह पर सर्जिकल स्ट्राइक' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह वही गिरोह है जो चुनाव आने पर एसआईआर को बहाना बनाता है।

कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप

पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल में एसआईआर को दोष देती है, जबकि केरल में उसे कोई आपत्ति नहीं थी — क्योंकि वहाँ कांग्रेस चुनाव जीतने में सफल रही। उन्होंने यह भी कहा कि जब कांग्रेस के शासन में एसआईआर होता था, तो वह सही था, लेकिन BJP के शासन में होने पर गलत बताया जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है।

बिहार और बंगाल का संदर्भ

पूनावाला ने कहा कि बिहार चुनाव के दौरान विपक्ष ने एसआईआर पर शोर मचाया, लेकिन कोई ठोस दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि बिहार और बंगाल दोनों में हुए एसआईआर को अब स्वयं सर्वोच्च न्यायालय ने सही ठहराया है। BJP ने माँग की कि जो भी लोग एसआईआर पर सवाल उठा रहे थे, उन्हें अब माफी माँगनी चाहिए।

आगे की स्थिति

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक वैधता मिल गई है। यह फैसला आने वाले चुनावों में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर होने वाली बहस को नई दिशा देगा। विपक्षी दलों की ओर से अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन BJP की राजनीतिक प्रतिक्रिया उस बड़े सवाल को नज़रअंदाज़ करती है जो विपक्ष उठाता रहा है — मतदाता सूची से हटाए गए वैध नागरिकों की सुरक्षा। 'घुसपैठियों के समर्थक' जैसे आरोप संवैधानिक वैधता और राजनीतिक आरोपबाज़ी के बीच की रेखा को धुंधला करते हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप तब और पैना हो जाता है जब केरल और बंगाल में उसके रुख की तुलना की जाती है। असली बहस यह होनी चाहिए कि एसआईआर की प्रक्रिया में बाहर किए गए नागरिकों के लिए शिकायत निवारण तंत्र कितना मज़बूत है — यह सवाल न BJP उठा रही है, न कांग्रेस।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन और शुद्ध करने की एक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य अपात्र या फ़र्ज़ी नामों को हटाकर चुनावी सूची को सटीक बनाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर क्या फैसला सुनाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया को चुनाव आयोग के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के तहत वैध ठहराया। न्यायालय ने माना कि यह प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप है और इसमें कोई नियम-उल्लंघन नहीं हुआ।
BJP ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और शहजाद पूनावाला ने फैसले का स्वागत करते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर घुसपैठियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया। BJP ने माँग की कि एसआईआर का विरोध करने वाले नेता सार्वजनिक माफी माँगें।
कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप क्यों लगाया जा रहा है?
BJP का आरोप है कि कांग्रेस ने बंगाल में एसआईआर का विरोध किया, जबकि केरल में — जहाँ वह चुनाव जीती — चुप रही। इसके अलावा, जब कांग्रेस शासन में एसआईआर होता था, तब उसे कोई आपत्ति नहीं थी।
इस फैसले का आगामी चुनावों पर क्या असर होगा?
सर्वोच्च न्यायालय की मुहर लगने के बाद चुनाव आयोग बिना कानूनी अड़चन के एसआईआर प्रक्रिया जारी रख सकता है। इससे आने वाले बिहार और अन्य राज्यों के चुनावों में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर होने वाले विवादों की दिशा बदल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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