सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर और चुनाव आयोग पर सभी आरोप खारिज किए, प्रक्रिया को बताया संवैधानिक
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली करीब 20 याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया नियमों, कानून और संविधान के अनुरूप है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया, जिसमें भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के विरुद्ध लगाए गए 'मत चोरी' सहित तमाम आरोपों को निराधार ठहराया गया।
फैसले का सार
पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई एसआईआर प्रक्रिया पूर्णतः निष्पक्ष और संवैधानिक रही। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एसआईआर प्रक्रिया में छूट गया है, तो इससे यह सिद्ध नहीं होता कि वह विदेशी है। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनकी पूरी जानकारी ट्रिब्यूनल को सौंपी जाए, जो नागरिकता का निर्धारण करेगा।
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की प्रतिक्रिया
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें मत चोरी के दावे भी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया वैध है और नियमों, कानून और संविधान के अनुसार है।' उन्होंने आगे कहा कि लगभग 20 याचिकाएँ एसआईआर का विरोध कर रही थीं और इनके माध्यम से चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी। उनके अनुसार, 'सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी सवालों को नकार दिया है और एसआईआर पर अपनी सुप्रीम मोहर लगा दी है।'
वकील अश्वनी सिंह का बयान
वकील अश्वनी सिंह ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि एसआईआर पर चुनाव आयोग द्वारा किया गया कार्य ऐतिहासिक था और एसआईआर प्रक्रिया को अत्यंत निष्पक्ष तरीके से संचालित किया गया।' उन्होंने बताया कि अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों और फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई थी और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के अनुसार ही मतदाता सूची तैयार की गई।
एसआईआर प्रक्रिया की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि एसआईआर एक विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया है जिसे चुनाव आयोग समय-समय पर आयोजित करता है। अधिवक्ता उपाध्याय के अनुसार, यह प्रक्रिया हर पाँच वर्ष में होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में बहस जारी थी।
आगे की राह
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद मतदाता सूची से हटाए गए व्यक्तियों की नागरिकता का निर्धारण अब ट्रिब्यूनल के माध्यम से होगा। चुनाव आयोग को इससे संबंधित पूरी विवरण ट्रिब्यूनल को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इस निर्णय से भविष्य में एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं को संवैधानिक वैधता का और मज़बूत आधार मिला है।