12 जुलाई 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर और चुनाव आयोग पर सभी आरोप खारिज किए, प्रक्रिया को बताया संवैधानिक

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सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर और चुनाव आयोग पर सभी आरोप खारिज किए, प्रक्रिया को बताया संवैधानिक

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग के विरुद्ध दायर करीब 20 याचिकाएँ खारिज कर दीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने 'मत चोरी' के दावों को निराधार बताया और मतदाता सूची शुद्धता की इस प्रक्रिया पर संवैधानिक मुहर लगा दी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 को एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को संवैधानिक और वैध घोषित किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने करीब 20 याचिकाएँ खारिज कीं।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एसआईआर में नाम छूटने से किसी के विदेशी होने की पुष्टि नहीं होती।
मतदाता सूची से हटाए गए व्यक्तियों की नागरिकता का निर्धारण ट्रिब्यूनल करेगा; चुनाव आयोग को पूरी जानकारी सौंपने का निर्देश।
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि कोर्ट ने 'मत चोरी' सहित सभी आरोपों को दरकिनार कर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली करीब 20 याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया नियमों, कानून और संविधान के अनुरूप है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया, जिसमें भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के विरुद्ध लगाए गए 'मत चोरी' सहित तमाम आरोपों को निराधार ठहराया गया।

फैसले का सार

पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई एसआईआर प्रक्रिया पूर्णतः निष्पक्ष और संवैधानिक रही। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एसआईआर प्रक्रिया में छूट गया है, तो इससे यह सिद्ध नहीं होता कि वह विदेशी है। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनकी पूरी जानकारी ट्रिब्यूनल को सौंपी जाए, जो नागरिकता का निर्धारण करेगा।

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की प्रतिक्रिया

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें मत चोरी के दावे भी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया वैध है और नियमों, कानून और संविधान के अनुसार है।' उन्होंने आगे कहा कि लगभग 20 याचिकाएँ एसआईआर का विरोध कर रही थीं और इनके माध्यम से चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी। उनके अनुसार, 'सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी सवालों को नकार दिया है और एसआईआर पर अपनी सुप्रीम मोहर लगा दी है।'

वकील अश्वनी सिंह का बयान

वकील अश्वनी सिंह ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि एसआईआर पर चुनाव आयोग द्वारा किया गया कार्य ऐतिहासिक था और एसआईआर प्रक्रिया को अत्यंत निष्पक्ष तरीके से संचालित किया गया।' उन्होंने बताया कि अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों और फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई थी और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के अनुसार ही मतदाता सूची तैयार की गई।

एसआईआर प्रक्रिया की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि एसआईआर एक विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया है जिसे चुनाव आयोग समय-समय पर आयोजित करता है। अधिवक्ता उपाध्याय के अनुसार, यह प्रक्रिया हर पाँच वर्ष में होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में बहस जारी थी।

आगे की राह

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद मतदाता सूची से हटाए गए व्यक्तियों की नागरिकता का निर्धारण अब ट्रिब्यूनल के माध्यम से होगा। चुनाव आयोग को इससे संबंधित पूरी विवरण ट्रिब्यूनल को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इस निर्णय से भविष्य में एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं को संवैधानिक वैधता का और मज़बूत आधार मिला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए उनके लिए ट्रिब्यूनल प्रक्रिया कितनी सुलभ और त्वरित होगी। 'मत चोरी' के आरोपों को खारिज करना न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, परंतु मतदाता सूची पुनरीक्षण में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग राजनीतिक रूप से जीवित रहेगी। यह फैसला भविष्य की एसआईआर प्रक्रियाओं के लिए एक मज़बूत संवैधानिक नज़ीर स्थापित करता है, किंतु क्रियान्वयन स्तर पर नागरिकों की शिकायत निवारण व्यवस्था की परीक्षा अभी बाकी है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की एक विशेष प्रक्रिया है। इसमें फर्जी और अवैध मतदाताओं को सूची से हटाया जाता है और बूथ लेवल ऑफिसर के माध्यम से सत्यापन किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर क्या फैसला सुनाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 को एसआईआर प्रक्रिया को पूर्णतः संवैधानिक और वैध घोषित किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने करीब 20 याचिकाएँ खारिज करते हुए चुनाव आयोग पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया।
जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं, उनका क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि मतदाता सूची से हटाए गए व्यक्तियों की पूरी जानकारी ट्रिब्यूनल को सौंपी जाए, जो उनकी नागरिकता का निर्धारण करेगा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नाम छूटने से किसी के विदेशी होने की पुष्टि नहीं होती।
इस फैसले को ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है?
वकीलों के अनुसार यह फैसला अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों को और मज़बूत करता है। इसने 'मत चोरी' जैसे गंभीर आरोपों को न्यायिक रूप से खारिज करते हुए एसआईआर प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर लगाई है।
इस मामले में कितनी याचिकाएँ दायर हुई थीं और किसने दायर की थीं?
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय के अनुसार, एसआईआर को चुनौती देते हुए करीब 20 याचिकाएँ दायर की गई थीं। इन याचिकाओं के माध्यम से एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे थे, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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