12 जुलाई 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को वैध ठहराया, एनडीए नेताओं ने कहा — विपक्ष फैला रहा था भ्रम

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सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को वैध ठहराया, एनडीए नेताओं ने कहा — विपक्ष फैला रहा था भ्रम

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को संवैधानिक करार दिया। BJP-NDA नेताओं ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया और विपक्ष पर राजनीतिक भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। यह फैसला चुनाव आयोग को एसआईआर जारी रखने का स्पष्ट कानूनी आधार देता है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग के एसआईआर निर्णय को संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों के दायरे में सही ठहराया।
BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने एसआईआर को सतत एवं नियमित प्रक्रिया बताया; विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि विपक्ष फर्जी और मृत व्यक्तियों के नाम पर मतदान की परंपरा को बचाने की कोशिश कर रहा था।
उत्तर प्रदेश के मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने एसआईआर को लोकतांत्रिक ढाँचे को मज़बूत करने का सुधारात्मक प्रयास बताया।
अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी फैसले का सम्मान करने की अपील की।

सर्वोच्च न्यायालय ने 28 मई 2025 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के निर्णय को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एसआईआर चुनाव निकाय की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों के दायरे में है तथा इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करना है। इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने एकस्वर में प्रतिक्रिया दी और विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।

मुख्य घटनाक्रम

BJP के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, 'एसआईआर कोई नई योजना नहीं है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया हो। यह एक सतत प्रक्रिया है। यह सच्चे और निष्ठावान नागरिकों के लिए 100 फीसदी सुरक्षित है।' उन्होंने जोड़ा कि कुछ लोग हर मुद्दे पर भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं और अदालत बार-बार ऐसे लोगों को आगाह करती रही है।

केंद्रीय मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था है और सर्वोच्च न्यायालय ने उसके अधिकार को अपनी स्वीकृति दे दी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उनकी कमज़ोरी यह है कि वे फर्जी मतदान में लिप्त थे — यहाँ तक कि मृत व्यक्तियों के नाम पर भी मत डाले गए।

राज्य मंत्रियों की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने एसआईआर को लोकतांत्रिक ढाँचे को मज़बूत करने का सुधारात्मक प्रयास बताया। उन्होंने कहा, 'इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को संशोधित और अद्यतन करना है — जिसमें डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ, स्थानांतरित या मृत मतदाताओं के नाम हटाना और त्रुटियाँ सुधारना शामिल है।' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश की, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन पूरी तरह नियमित कार्य है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने बिहार में भी इसे चुनावी मुद्दा बनाने की बार-बार कोशिश की, लेकिन 'परिणाम सबके सामने हैं।'

धार्मिक संगठन की राय

अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि वे एसआईआर पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं और सभी को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए।

एसआईआर का उद्देश्य और विपक्ष का रुख

गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से फर्जी, दोहरी और मृत व्यक्तियों की प्रविष्टियाँ हटाई जाती हैं। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में याचिकाएँ दायर की थीं, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। आलोचकों का कहना है कि एसआईआर की समय-सीमा और क्रियान्वयन को लेकर पारदर्शिता की माँग उचित है, जबकि सत्तापक्ष इसे राजनीति से प्रेरित बताता है।

आगे की राह

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद भारत निर्वाचन आयोग को एसआईआर जारी रखने का स्पष्ट कानूनी आधार मिल गया है। अब देखना यह होगा कि विपक्ष इस फैसले के बाद अपनी रणनीति में क्या बदलाव लाता है और आगामी चुनावों में मतदाता सूची की शुद्धता किस हद तक सुनिश्चित हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एसआईआर के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समावेशिता कितनी सुनिश्चित हो रही है। विपक्ष की याचिकाएँ भले ही खारिज हुईं, पर वैध मतदाताओं के नाम सूची से गलती से हटने की आशंकाएँ पूरी तरह निराधार नहीं हैं — यह चिंता अदालत ने भी पूर्व में दर्ज की है। NDA नेताओं का 'फर्जी मतदान' वाला तर्क राजनीतिक रूप से प्रभावी है, लेकिन इसके लिए सत्यापन-योग्य आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता इस बात पर टिकी है कि वह सफाई के साथ-साथ वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की भी उतनी ही मज़बूती से रक्षा करे।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत भारत निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों से डुप्लिकेट, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को अद्यतन करता है। यह एक नियमित और कानूनी प्रक्रिया है जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक रूप से वैध ठहराया है।
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर क्या फैसला दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि एसआईआर भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों के दायरे में है और इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की अखंडता बनाए रखना है। न्यायालय ने विपक्ष की याचिकाओं को खारिज करते हुए एसआईआर को उचित ठहराया।
BJP और NDA नेताओं ने इस फैसले पर क्या कहा?
BJP-NDA नेताओं ने एकमत से फैसले का स्वागत किया। मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे सतत प्रक्रिया बताया, ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष पर फर्जी मतदान की परंपरा बचाने का आरोप लगाया, जबकि दानिश आज़ाद अंसारी ने इसे लोकतांत्रिक ढाँचे को मज़बूत करने का सुधारात्मक प्रयास कहा।
विपक्ष ने एसआईआर का विरोध क्यों किया था?
विपक्षी दलों ने एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर की थीं। उनका आरोप था कि यह प्रक्रिया वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित है और इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हट सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए याचिकाएँ खारिज कर दीं।
इस फैसले का चुनाव आयोग पर क्या असर होगा?
इस फैसले से भारत निर्वाचन आयोग को भविष्य में भी एसआईआर प्रक्रिया संचालित करने का स्पष्ट कानूनी आधार मिल गया है। आयोग अब बिना कानूनी बाधा के मतदाता सूचियों को नियमित रूप से शुद्ध और अद्यतन कर सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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