एसआईआर पर विपक्ष का रुख साफ: आनंद दुबे बोले — प्रक्रिया नहीं, राजनीतिक दुरुपयोग से है आपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 28 मई 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि विपक्ष विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का विरोध नहीं करता, बल्कि उसकी आपत्ति इस प्रक्रिया के कथित राजनीतिक दुरुपयोग से है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग (ECI) को पूर्ण पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए ताकि किसी भी वास्तविक भारतीय मतदाता का मताधिकार न छिने।
विपक्ष का असल मुद्दा क्या है
दुबे ने कहा कि मतदाता सूची की समीक्षा और संशोधन एक आवश्यक प्रशासनिक कार्य है — हर चुनाव चक्र में नए मतदाता जुड़ते हैं और परिवर्तन होते हैं। हालाँकि, उनका आरोप है कि कुछ राज्यों में इस प्रक्रिया का उपयोग चुनिंदा तरीके से किया गया। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसके बाद न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा और बाद में नाम पुनः जोड़े गए।
न्यायपालिका की भूमिका और नागरिक अधिकार
दुबे ने रेखांकित किया कि अदालतों ने भी यह स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया के नाम पर किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, चुनाव आयोग को मतदाता पहचान का अधिकार है, लेकिन यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आयोग किसी राजनीतिक दबाव में कार्य करेगा तो उसे न्यायिक फटकार का सामना करना पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में एसआईआर पर नज़र
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी एसआईआर की प्रक्रिया जारी है। दुबे ने कहा कि विपक्ष केवल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इस प्रक्रिया के ज़रिए किसी विशेष वर्ग या राजनीतिक विचारधारा को निशाना न बनाया जाए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अवैध घुसपैठ और फर्जी मतदान रोकना ज़रूरी है, किंतु इसकी आड़ में वास्तविक भारतीय नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
दुबे ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि जहाँ-जहाँ गैर-भाजपाई सरकारें हैं, वहाँ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाइयाँ अधिक देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
विपक्ष की रणनीति और हिंसा का विरोध
दुबे ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के नेता हेमंत सोरेन सहित सभी विपक्षी नेता कानूनी मार्ग से अपनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने हिंसा का स्पष्ट विरोध करते हुए कहा कि किसी भी जाँच एजेंसी की कार्रवाई का जवाब कानूनी तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए — किसी राजनीतिक दल के आधार पर अलग रवैया अस्वीकार्य है।
पश्चिम बंगाल और 'डबल इंजन' पर सवाल
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने और 'डबल इंजन' सरकार की चर्चा पर टिप्पणी करते हुए दुबे ने कहा कि यदि केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा सत्ता में है और घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है, तो अब उसे BSF और अन्य एजेंसियों के ज़रिए अवैध घुसपैठियों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करके दिखानी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब एसआईआर को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।