मतदाता सूची SIR पर विपक्ष के आरोप निराधार: UP मंत्री राकेश सचान, बोले — प्रक्रिया पारदर्शी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश सचान ने 27 मई 2026 को लखनऊ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह निराधार करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया चुनाव आयोग (ECI) के स्थापित नियमों के तहत संचालित है और इसमें सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
मंत्री का पक्ष: जमीनी अनुभव से दिया जवाब
मंत्री राकेश सचान ने कहा कि वे विधानसभा स्तर पर लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को करीब से समझते हैं। उन्होंने बताया कि उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में पहले लगभग 3.25 लाख मतदाता थे, जिनमें से करीब 38 हजार मतदाता सूची से कम हो गए। इनमें से कुछ का निधन हो चुका था, कुछ अन्य स्थानों पर विस्थापित हो गए थे और कुछ दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो गए थे।
विपक्ष पर पलटवार: 'कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा'
सचान ने कहा, 'मतदाता सूची से संबंधित पूरा कार्य व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया। इस प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दल शामिल थे। उस समय विपक्ष ने भी माना था कि काम सही ढंग से किया जा रहा है और किसी प्रकार का कोई आरोप नहीं लगाया गया था। अब विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए इस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं।' उन्होंने विपक्ष पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी विपक्ष ने इसी तरह के मुद्दे उठाए थे, लेकिन जनता ने चुनाव में उन्हें जवाब दिया।
एसआईआर कोई नई व्यवस्था नहीं: 2003 का हवाला
मंत्री ने स्पष्ट किया कि एसआईआर की प्रक्रिया कोई नई व्यवस्था नहीं है। चुनाव आयोग समय-समय पर इसे लागू करता रहा है और उत्तर प्रदेश में वर्ष 2003 में भी विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था। उस समय भी सचान विधायक थे और अपने कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव आयोग के सहयोग से इस प्रक्रिया में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि एसआईआर के दौरान पुरानी मतदाता सूची को निरस्त कर नई सूची तैयार की जाती है, जिसमें दिवंगत व्यक्तियों और स्थायी रूप से प्रवासित लोगों के नाम हटाए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की याचिकाओं पर प्रतिक्रिया
एसआईआर को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में सचान ने कहा कि चुनाव आयोग हर 20 से 22 वर्षों में इस तरह का पुनरीक्षण करता है। वर्ष 2003 में भी इसी प्रकार का संशोधन किया गया था और उस दौरान सभी दलों ने मिलकर मतदाता सूची को अद्यतन करने में सहयोग दिया था। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है।
आगे क्या
मंत्री सचान ने सभी राजनीतिक दलों से एसआईआर प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत की जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के नतीजे इस विवाद की अगली दिशा तय करेंगे।