क्या यूपी में एसआईआर: मतदाता की फोटो, माता-पिता के नाम और हस्ताक्षर फॉर्म को वैध बनाने के लिए पर्याप्त हैं?
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, 18 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत के 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम चल रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की मतदाता सूची को सही और त्रुटिरहित बनाना है। रिनवा ने कहा कि मतदाता की फोटो, माता-पिता के नाम और हस्ताक्षर फॉर्म को वैध बनाने के लिए पर्याप्त हैं।
रिनवा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि हाल के वर्षों में मतदाता सूची के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिससे कई पुरानी त्रुटियाँ उजागर हुई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ त्रुटियाँ दशकों से बनी हुई हैं, जैसे डुप्लिकेट नाम, मृत मतदाताओं के नाम, या ऐसे मतदाता जिनके नाम सूची में हैं जबकि वे कहीं और जा चुके हैं। एसआईआर का उद्देश्य केवल इन त्रुटियों को सुधारना और सूची को पारदर्शी रखना है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण का पहला चरण 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चल रहा है। इस चरण में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना फॉर्म उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं को कोई भी दस्तावेज दिखाने या जमा करने की आवश्यकता नहीं है। हम मतदाता से किसी भी प्रकार का कागज नहीं मांग रहे हैं और बीएलओ को भी इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
रिनवा के अनुसार, गणना फॉर्म में केवल कुछ आवश्यक जानकारी भरनी होगी। मतदाता की फोटो, माता-पिता का नाम और हस्ताक्षर फॉर्म को वैध बनाने के लिए पर्याप्त हैं। अगर आधार नंबर और ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) नंबर आसानी से उपलब्ध हों तो भरें, अन्यथा अनिवार्य नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मतदाता ने फॉर्म भरकर बीएलओ को जमा कर दिया तो उसका नाम 9 दिसंबर को प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची में शामिल कर दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में अभी भी मतदाताओं को फॉर्म नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने कहा कि यह संभव है कि कुछ लोगों को अभी तक फॉर्म नहीं मिला हो। अंतिम तिथि 4 दिसंबर है। यदि आपको फॉर्म नहीं मिला है तो आप ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
ऑनलाइन फॉर्म भरने की व्यवस्था निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और वोटर हेल्पलाइन ऐप के माध्यम से उपलब्ध है।