12 जुलाई 2026
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बीजेडी के तीन बार विधायक रहे प्रभात रंजन बिस्वाल भाजपा में शामिल, कटक में मजबूत होगा संगठन

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बीजेडी के तीन बार विधायक रहे प्रभात रंजन बिस्वाल भाजपा में शामिल, कटक में मजबूत होगा संगठन

सारांश

तीन बार विधायक रहे प्रभात रंजन बिस्वाल ने बीजेडी से निष्कासन के बाद भाजपा की राह चुनी। सीशोर चिटफंड मामले में सीबीआई कार्यवाही जारी रहने के बावजूद CM माझी ने उनका स्वागत किया — और कटक में पार्टी विस्तार का दांव खेला।

मुख्य बातें

प्रभात रंजन बिस्वाल ने 12 जुलाई को भाजपा की सदस्यता ग्रहण की; ओडिशा CM मोहन चरण माझी और प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल मौजूद रहे।
बिस्वाल 2004, 2009 और 2014 में चौद्वार-कटक से तीन बार विधायक रह चुके हैं।
सीशोर चिटफंड घोटाले में सीबीआई ने 2017 में गिरफ्तार किया था; ओडिशा उच्च न्यायालय ने हाल ही में कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया।
फरवरी 2025 में बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें निष्कासित किया था।
उनके पुत्र सौविक रंजन बिस्वाल वर्तमान में चौद्वार-कटक से विधायक हैं।

बीजू जनता दल (बीजेडी) के पूर्व विधायक प्रभात रंजन बिस्वाल रविवार, 12 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। तीन बार के विधायक बिस्वाल ने अपने समर्थकों के साथ रैली निकालकर भाजपा के ओडिशा प्रदेश मुख्यालय पहुँचकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कटक जिले में भाजपा अपने संगठन विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है।

सदस्यता ग्रहण समारोह

बिस्वाल ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल की उपस्थिति में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री माझी ने कहा, "आज ओडिशा में भाजपा की विजय यात्रा में एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ा है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कटक जिले के लोकप्रिय नेता प्रभात रंजन बिस्वाल आज भाजपा में शामिल हुए हैं। उनके साथ उनके समर्थकों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर सदस्यता ग्रहण की है।" माझी ने यह भी कहा कि बिस्वाल के आने से चौद्वार विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे कटक जिले में भाजपा संगठन और सुदृढ़ होगा।

प्रभात बिस्वाल का राजनीतिक सफर

बिस्वाल ने अपनी राजनीतिक पारी वर्ष 2004 में चौद्वार-कटक विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत के साथ शुरू की थी। इसके बाद वे बीजेडी में शामिल हुए और 2009 तथा 2014 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के टिकट पर लगातार जीत हासिल की। गौरतलब है कि उनके पुत्र सौविक रंजन बिस्वाल वर्तमान में इसी चौद्वार-कटक विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

बीजेडी से दूरी और कानूनी विवाद

बिस्वाल का बीजेडी से रिश्ता लंबे समय से तनावपूर्ण रहा है। वर्ष 2012 में तत्कालीन नवीन पटनायक सरकार को अस्थिर करने की कथित 'मिडनाइट ऑपरेशन' साजिश में संलिप्तता के आरोप में उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था, हालाँकि एक वर्ष बाद निलंबन वापस ले लिया गया। इसके अतिरिक्त, चिटफंड घोटाले में नाम उभरने के बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्हें 2017 में गिरफ्तार किया था और 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेडी ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया था। इसी वर्ष फरवरी में बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर सार्वजनिक असंतोष जताने के कारण पार्टी से पुनः निष्कासित कर दिया।

न्यायालय का हालिया निर्देश

हाल ही में ओडिशा उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित सीशोर चिटफंड घोटाले में उनके विरुद्ध चल रही सीबीआई की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने भुवनेश्वर स्थित विशेष सीबीआई अदालत को छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। इस कानूनी पृष्ठभूमि के बावजूद भाजपा ने उनकी सदस्यता स्वीकार की है।

आगे की राह

भाजपा में शामिल होने के बाद बिस्वाल ने मुख्यमंत्री माझी और प्रदेश अध्यक्ष सामल का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी संगठन को मजबूत बनाने के लिए काम करेंगे। यह देखना होगा कि चिटफंड मामले में अदालती कार्यवाही के बीच उनकी नई राजनीतिक पारी कटक में भाजपा की स्थिति को किस हद तक प्रभावित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जवाबदेही की दीर्घकालिक छवि से भारी पड़ेगी या नहीं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रभात रंजन बिस्वाल कौन हैं और वे भाजपा में क्यों शामिल हुए?
प्रभात रंजन बिस्वाल ओडिशा के चौद्वार-कटक विधानसभा क्षेत्र से तीन बार (2004, 2009, 2014) विधायक रह चुके हैं। बीजेडी से पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासन के बाद उन्होंने 12 जुलाई को भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
सीशोर चिटफंड घोटाले में बिस्वाल की क्या भूमिका बताई गई है?
सीबीआई ने बिस्वाल को सीशोर चिटफंड घोटाले में संलिप्तता के आरोप में 2017 में गिरफ्तार किया था। हाल ही में ओडिशा उच्च न्यायालय ने उनके विरुद्ध सीबीआई कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए विशेष अदालत को छह महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है।
बीजेडी से बिस्वाल का संबंध कब और क्यों बिगड़ा?
2012 में 'मिडनाइट ऑपरेशन' साजिश के आरोप में उन्हें बीजेडी से निलंबित किया गया था, जो बाद में वापस लिया गया। इसी वर्ष फरवरी में राज्यसभा उम्मीदवार चयन पर सार्वजनिक असंतोष जताने के कारण बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने उन्हें पुनः निष्कासित कर दिया।
बिस्वाल के भाजपा में शामिल होने से कटक की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के अनुसार, बिस्वाल के आने से चौद्वार विधानसभा क्षेत्र और पूरे कटक जिले में भाजपा संगठन मजबूत होगा। हालाँकि उनके पुत्र सौविक रंजन बिस्वाल पहले से ही इसी क्षेत्र से विधायक हैं, जिससे परिवार का स्थानीय राजनीतिक प्रभाव और बढ़ सकता है।
क्या बिस्वाल के परिवार का ओडिशा की राजनीति में कोई और जुड़ाव है?
हाँ, उनके पुत्र सौविक रंजन बिस्वाल वर्तमान में चौद्वार-कटक विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। पिता के भाजपा में शामिल होने से परिवार का राजनीतिक आधार अब पूरी तरह भाजपा की ओर स्थानांतरित हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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