ओडिशा CM माझी ने केंद्रीय मंत्री रेड्डी से माँगा खनन क्षेत्र को मज़बूत करने का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 2 जून 2025 को भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर राज्य के खनन क्षेत्र को सुदृढ़ करने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में ओडिशा की भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से व्यापक सहयोग की माँग की। बैठक में वन एवं पर्यावरण स्वीकृतियों में तेज़ी, रेल-बंदरगाह अवसंरचना के विस्तार और नए खनन ब्लॉकों के आवंटन सहित कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
ओडिशा का खनन क्षेत्र: आँकड़े और महत्त्व
मुख्यमंत्री माझी ने बैठक में बताया कि ओडिशा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 47 करोड़ 10 लाख टन खनिजों का उत्पादन किया, जिससे राज्य को लगभग ₹46,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की खनिज अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास में ओडिशा की भूमिका लगातार बढ़ रही है, और इस गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के समर्थन की अनिवार्यता है।
मुख्य माँगें और प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से नीलाम किए गए खनन ब्लॉकों के लिए वन एवं पर्यावरण स्वीकृतियाँ शीघ्रता से जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने ओडिशा खनन निगम (OMC) को ससुबोहुमाली बॉक्साइट ब्लॉक और ठाकुरानी लौह अयस्क ब्लॉक के आवंटन में केंद्र का सक्रिय सहयोग भी माँगा।
खनिज परिवहन को अधिक कुशल और लागत-प्रभावी बनाने के लिए रेल एवं बंदरगाह अवसंरचना के त्वरित विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इसके अलावा, माझी ने परित्यक्त कोयला खदानों को फ्लाई ऐश से भरने का एक टिकाऊ पर्यावरणीय ढाँचा तैयार करने का सुझाव दिया। खनिज विश्लेषण और संसाधन मूल्यांकन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुँच सुलभ कराने का अनुरोध भी किया गया।
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने स्वीकार किया कि खनन क्षेत्र के मुद्दों के समाधान के लिए रेलवे, बंदरगाह, वन और पर्यावरण सहित कई मंत्रालयों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने सभी संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और ओडिशा सरकार को एक साथ लाकर एक उच्च स्तरीय बहु-मंत्रालयी बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, ताकि इन मुद्दों का व्यापक और सहयोगात्मक समाधान निकाला जा सके।
सामुदायिक कल्याण और 'CM संपदा' पहल
बैठक में खनन-प्रभावित क्षेत्रों के विकास और स्थानीय समुदायों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया। यह संकल्प लिया गया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जिला खनिज निधि (DMF) और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधियों के साथ एकीकृत किया जाए, ताकि खनन क्षेत्रों में समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। ओडिशा सरकार ने बैठक को सूचित किया कि उसने इस उद्देश्य के लिए 'CM संपदा' नाम की एक समर्पित पहल तैयार की है, जो खनन क्षेत्रों में एकीकृत विकास और सामुदायिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करेगी। बैठक में खनन क्षेत्र में कार्यरत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
आगे की राह
केंद्रीय मंत्री के बहु-मंत्रालयी बैठक के प्रस्ताव के साथ, यह स्पष्ट है कि ओडिशा के खनन क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए एक ठोस केंद्र-राज्य समन्वय तंत्र की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य की खनिज समृद्धि को औद्योगिक और सामाजिक विकास में परिवर्तित करने की यह कोशिश आने वाले महीनों में अपनी रूपरेखा और स्पष्ट करेगी।