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रिम्स रांची: 3 माह से वेतन नहीं, 1,500 से अधिक कर्मचारियों का निदेशक कार्यालय के सामने प्रदर्शन

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रिम्स रांची: 3 माह से वेतन नहीं, 1,500 से अधिक कर्मचारियों का निदेशक कार्यालय के सामने प्रदर्शन

सारांश

झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में 1,500 से अधिक कर्मचारियों का तीन माह का वेतन अटका है, जूनियर डॉक्टरों का छह माह का स्टाइपेंड भी बकाया है। कर्मचारियों ने सेवाएँ जारी रखते हुए प्रदर्शन किया और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

रिम्स रांची के 1,500 से अधिक स्थायी कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है।
पीजी प्रथम वर्ष के जूनियर डॉक्टरों का लगभग छह महीनों का स्टाइपेंड भी बकाया बताया जा रहा है।
नर्सिंग और पारा मेडिकल कर्मियों ने 1 जून को निदेशक कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार नहीं किया ; मरीज सेवाएँ जारी हैं।
पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के प्रभावी क्रियान्वयन की माँग भी उठाई गई।
माँगें न मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।

झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में 1,500 से अधिक स्थायी कर्मचारी पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट में हैं। सोमवार, 1 जून को नर्सिंग और पारा मेडिकल कर्मियों ने निदेशक कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर रिम्स प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और तत्काल वेतन भुगतान की माँग उठाई।

मुख्य घटनाक्रम

कर्मचारियों के अनुसार, तीन माह से वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार का दैनिक खर्च, बच्चों की स्कूल फीस और बैंक ऋण की मासिक किस्तें चुकाना दूभर हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे कई बार प्रबंधन का ध्यान इस ओर दिला चुके हैं, परंतु अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने फिलहाल कार्य बहिष्कार नहीं किया है। मरीजों की सेवा को प्राथमिकता देते हुए वार्डों और अन्य आवश्यक विभागों में तैनाती जारी है।

जूनियर डॉक्टरों का स्टाइपेंड भी अटका

वेतन संकट केवल स्थायी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि रिम्स में कार्यरत पीजी प्रथम वर्ष के कई जूनियर डॉक्टरों को पिछले लगभग छह महीनों से स्टाइपेंड का भुगतान नहीं किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब मेडिकल इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन विवाद देशभर के सरकारी अस्पतालों में एक उभरती हुई समस्या बनते जा रहे हैं।

पुरानी पेंशन योजना पर भी असंतोष

वेतन भुगतान के अतिरिक्त कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के प्रभावी क्रियान्वयन और उससे जुड़ी विसंगतियों को दूर करने की माँग भी रखी। कर्मचारियों का कहना है कि इस संदर्भ में बार-बार आश्वासन दिए गए, लेकिन धरातल पर अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी माँगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। गौरतलब है कि रिम्स झारखंड का सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल है और यहाँ प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं — ऐसे में कर्मचारी असंतोष का बढ़ना स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो देखभाल की गुणवत्ता पर दबाव अपरिहार्य है। प्रबंधन के बार-बार आश्वासन देने और स्थिति न सुधरने का पैटर्न बताता है कि समस्या प्रशासनिक इच्छाशक्ति की नहीं, बल्कि संरचनागत वित्त-प्रवाह की है — जिसका समाधान राज्य सरकार के स्तर पर ही संभव है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिम्स रांची में कर्मचारी प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
रिम्स रांची के 1,500 से अधिक स्थायी कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके परिवारों पर गंभीर आर्थिक संकट आ गया है। कर्मचारियों ने 1 जून को निदेशक कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर तत्काल वेतन भुगतान और पुरानी पेंशन योजना की माँग उठाई।
क्या रिम्स में मरीजों की सेवाएँ प्रभावित हुई हैं?
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अभी तक कार्य बहिष्कार नहीं किया है। वार्डों और आवश्यक विभागों में तैनाती जारी है, इसलिए फिलहाल मरीज सेवाएँ बाधित नहीं हैं।
रिम्स के जूनियर डॉक्टरों की स्थिति क्या है?
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, रिम्स में कार्यरत पीजी प्रथम वर्ष के कई जूनियर डॉक्टरों को लगभग छह महीनों से स्टाइपेंड का भुगतान नहीं किया गया है। यह संकट स्थायी कर्मचारियों के वेतन विवाद से अलग और अतिरिक्त है।
पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर कर्मचारियों की क्या माँग है?
कर्मचारियों की माँग है कि पुरानी पेंशन योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हो और उससे जुड़ी विसंगतियाँ दूर की जाएँ। उनका कहना है कि इस बारे में कई बार आश्वासन मिला, लेकिन धरातल पर कोई सुधार नहीं हुआ।
यदि माँगें नहीं मानी गईं तो आगे क्या होगा?
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। रिम्स झारखंड का सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल होने के कारण, किसी भी कार्य बहिष्कार का राज्यभर के मरीजों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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