जम्मू-कश्मीर के MBBS-BDS इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों ने 31 अगस्त को अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया, जिसमें मासिक स्टाइपेंड को मौजूदा ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग की गई। डॉक्टरों का कहना है कि यह राशि देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में बेहद कम है और करीब तीन वर्षों से लंबित प्रस्ताव पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
मुख्य मांगें और पृष्ठभूमि
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की दो प्रमुख मांगें हैं। डॉ. तनिष के अनुसार, पहली मांग स्टाइपेंड को ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह करने की है, ताकि जम्मू-कश्मीर के इंटर्न डॉक्टरों को अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समकक्ष भुगतान सुनिश्चित हो सके। दूसरी मांग स्टाइपेंड के नियमित और समयबद्ध संशोधन की व्यवस्था बनाने की है, ताकि भविष्य में आने वाले जूनियर डॉक्टरों को इसी तरह आंदोलन न करना पड़े।
गौरतलब है कि इससे पहले एक प्रस्ताव में स्टाइपेंड को ₹12,300 से बढ़ाकर करीब ₹26,000 करने की सिफारिश की गई थी। यह प्रस्ताव करीब तीन साल पहले तैयार हुआ था, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ोतरी से जुड़ी फाइल और प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं।
अन्य राज्यों से तुलना
डॉ. शाहनवाज ने बताया कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में पहले भी स्टाइपेंड जम्मू-कश्मीर से अधिक था और अब वहाँ इसमें और बढ़ोतरी की गई है। उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर में मरीजों का दबाव काफी अधिक है और इंटर्न डॉक्टरों पर कार्यभार भी बड़ा है, फिर भी उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में चिकित्सा पेशेवरों के वेतन और कार्यस्थल की स्थितियों को लेकर बहस तेज हो रही है।
प्रशासन से अपील
डॉ. शाहनवाज ने जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री, उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए चिंता का विषय है कि डॉक्टरों को अपनी जायज मांगों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले बातचीत और प्रशासनिक माध्यमों से समाधान निकालने की पूरी कोशिश की — कई अधिकारियों से मुलाकात की और अपनी मांगें रखीं। जब कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, तब आंदोलन को अंतिम विकल्प के रूप में चुना गया।
मरीजों पर असर और डॉक्टरों की पीड़ा
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने कहा कि वे विरोध प्रदर्शन का रास्ता पसंद नहीं करते। वे मरीजों की सेवा करना चाहते हैं और अपनी ड्यूटी को गंभीरता से निभाना चाहते हैं। इस समय उन्हें वार्ड, ओपीडी और अस्पतालों में तैनात होना चाहिए था, लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई न होने के कारण वे ड्यूटी छोड़कर सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।
डॉ. तनिष ने यह भी कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के मद्देनजर स्टाइपेंड में समय-समय पर संशोधन होना चाहिए, ताकि इंटर्न डॉक्टरों की वास्तविक क्रय शक्ति बनी रहे। यदि सरकार नियमित समीक्षा की व्यवस्था कर दे, तो भविष्य में ऐसे आंदोलनों की नौबत नहीं आएगी।
आगे क्या
फिलहाल प्रदर्शन जारी है और डॉक्टरों ने सरकार से जल्द से जल्द ठोस निर्णय लेने की माँग की है। यदि सरकार ने समयबद्ध कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना है, जिसका सीधा असर जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।