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केरल में जूनियर डॉक्टरों को ₹42,000 वेतन पर IMA का विरोध, ₹80,000 मासिक की मांग

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केरल में जूनियर डॉक्टरों को ₹42,000 वेतन पर IMA का विरोध, ₹80,000 मासिक की मांग

सारांश

त्रिशूर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज द्वारा MBBS डॉक्टरों को मात्र ₹42,000 मासिक की पेशकश ने IMA केरल को आंदोलित कर दिया है। एसोसिएशन ने ₹80,000 न्यूनतम वेतन की माँग करते हुए चेतावनी दी है कि कम वेतन से प्रतिभाशाली डॉक्टरों का राज्य से पलायन तेज होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्यसेवा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।

मुख्य बातें

IMA केरल ने जूनियर डॉक्टरों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन ₹80,000 करने की माँग की।
त्रिशूर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज ने CMO पद के लिए MBBS डॉक्टरों को मात्र ₹42,000 मासिक वेतन की पेशकश की थी।
जूनियर डॉक्टर पेशे में आने से पहले 5.5 वर्ष से अधिक की मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण पूरा करते हैं।
केरल विश्वविद्यालय में BSc योग्यता वाले सिक्योरिटी ऑफिसर का वेतन ₹55,200 से ₹1.15 लाख तक है — जो MBBS डॉक्टरों से अधिक है।
IMA ने चेतावनी दी कि कम वेतन के कारण प्रतिभाशाली डॉक्टर दूसरे राज्यों और विदेशों में जा रहे हैं।
मेनन और सचिव रॉय आर.
चंद्रन ने सरकार से वेतन की तत्काल समीक्षा का आग्रह किया।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की केरल राज्य शाखा ने केरल सरकार से जूनियर डॉक्टरों के वेतन ढाँचे में तत्काल सुधार की माँग की है, यह कहते हुए कि मौजूदा वेतन न केवल अपर्याप्त है, बल्कि राज्य से प्रतिभाशाली चिकित्सकों के पलायन को भी बढ़ावा दे रहा है। यह माँग 27 जून को उस समय और तेज हो गई जब त्रिशूर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज ने कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर (CMO) पद के लिए MBBS योग्यताधारी डॉक्टरों को मात्र ₹42,000 मासिक वेतन की पेशकश करने वाला नोटिफिकेशन जारी किया।

मुख्य घटनाक्रम

IMA केरल ने माँग की है कि जूनियर डॉक्टरों का न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाकर ₹80,000 किया जाए। एसोसिएशन के अनुसार, युवा चिकित्सक पेशे में आने से पहले 5.5 वर्ष से अधिक की कठिन मेडिकल शिक्षा और अनिवार्य प्रशिक्षण से गुजरते हैं। इसके बावजूद उन्हें ऐसे सरकारी कर्मचारियों से कम वेतन मिलता है जिनकी व्यावसायिक योग्यता उनसे काफी कम है।

IMA ने एक ठोस तुलना पेश की — केरल की एक विश्वविद्यालय में सिक्योरिटी ऑफिसर के पद के लिए केवल BSc की योग्यता आवश्यक है, फिर भी शुरुआती वेतन ₹55,200 से ₹1.15 लाख प्रति माह तक है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह तुलना अन्य कर्मचारियों के वेतन पर प्रश्न उठाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन-रक्षक जिम्मेदारियाँ निभाने वाले डॉक्टरों के वेतन में असंगति उजागर करने के लिए है।

जूनियर डॉक्टरों की भूमिका और दबाव

IMA ने जूनियर डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों की रीढ़ बताया। ये चिकित्सक कैजुअल्टी विभागों, ICU, मेडिकल-सर्जिकल वार्डों और लेबर रूम में मरीजों की देखभाल का अधिकांश भार वहन करते हैं। इमरजेंसी में जीवन-मृत्यु के निर्णय लेने के साथ-साथ महत्वपूर्ण मेडिकल-लीगल जिम्मेदारियाँ भी इन्हीं के कंधों पर होती हैं, और वे प्रायः भारी शारीरिक व मानसिक दबाव में लंबी शिफ्ट में काम करते हैं।

डॉक्टरों के पलायन की चेतावनी

IMA ने आगाह किया है कि केरल में पहले से ही प्रतिभाशाली युवा डॉक्टर बेहतर वेतन और कार्यस्थल परिस्थितियों की तलाश में दूसरे राज्यों और विदेशों में जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्वास्थ्यसेवा में मानव संसाधन की कमी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। एसोसिएशन के अनुसार, यदि एंट्री-लेवल पर उचित वेतन नहीं दिया गया, तो राज्य के लिए कुशल चिकित्सकों को बनाए रखना कठिन होगा — और इसका सीधा असर सार्वजनिक स्वास्थ्यसेवा की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

IMA नेतृत्व की माँग

IMA केरल राज्य के अध्यक्ष एम.एन. मेनन और राज्य सचिव रॉय आर. चंद्रन ने सरकार से CMO और अन्य जूनियर डॉक्टरों के वेतन की तत्काल समीक्षा का आग्रह किया है। उनका कहना है कि उचित वेतन सुनिश्चित करना केवल व्यावसायिक सम्मान का प्रश्न नहीं, बल्कि केरल की स्वास्थ्यसेवा प्रणाली की दीर्घकालिक सुरक्षा और श्रेष्ठ चिकित्सा प्रतिभा को राज्य में बनाए रखने की अनिवार्यता है। केरल सरकार की ओर से इस माँग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 में MBBS डॉक्टर से CMO की जिम्मेदारी माँगना केवल वेतन विसंगति नहीं — यह सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति की प्राथमिकताओं पर एक गंभीर प्रश्न है। केरल, जो अपनी स्वास्थ्यसेवा को देश में आदर्श मानता है, उसी मॉडल की नींव — जूनियर डॉक्टर — को कम वेतन पर टिकाए हुए है। यह विरोधाभास तब और तीखा हो जाता है जब BSc धारक सिक्योरिटी ऑफिसर का वेतन MBBS डॉक्टर से अधिक हो। यदि सरकार ने शीघ्र सुधार नहीं किए, तो 'केरल मॉडल' की साख उन्हीं डॉक्टरों के पलायन से खोखली हो सकती है जिन पर वह टिकी है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IMA केरल ने जूनियर डॉक्टरों के लिए कितने वेतन की माँग की है?
IMA केरल ने जूनियर डॉक्टरों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन ₹80,000 करने की माँग की है। यह माँग त्रिशूर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज द्वारा CMO पद के लिए मात्र ₹42,000 की पेशकश के बाद सामने आई।
त्रिशूर मेडिकल कॉलेज के CMO नोटिफिकेशन पर विवाद क्यों हुआ?
त्रिशूर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज ने कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर पद के लिए MBBS योग्यताधारी डॉक्टरों को केवल ₹42,000 मासिक वेतन की पेशकश की। IMA का कहना है कि 5.5 वर्ष की कठिन शिक्षा और जीवन-रक्षक जिम्मेदारियों के मुकाबले यह वेतन बेहद कम है।
केरल में डॉक्टरों के पलायन का स्वास्थ्यसेवा पर क्या असर होगा?
IMA के अनुसार, कम वेतन के कारण प्रतिभाशाली युवा डॉक्टर पहले से ही दूसरे राज्यों और विदेशों में जा रहे हैं। यदि एंट्री-लेवल वेतन में सुधार नहीं हुआ, तो सरकारी अस्पतालों में कुशल चिकित्सकों की कमी होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्यसेवा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
IMA ने वेतन असमानता को उजागर करने के लिए क्या तुलना दी?
IMA ने बताया कि केरल की एक विश्वविद्यालय में BSc योग्यता वाले सिक्योरिटी ऑफिसर का शुरुआती वेतन ₹55,200 से ₹1.15 लाख प्रति माह तक है, जबकि MBBS डॉक्टर को ₹42,000 की पेशकश की जा रही है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह तुलना अन्य कर्मचारियों को कम आँकने के लिए नहीं, बल्कि वेतन असंगति को रेखांकित करने के लिए है।
IMA केरल के इस मुद्दे पर कौन से नेता सामने आए हैं?
IMA केरल राज्य के अध्यक्ष एम.एन. मेनन और राज्य सचिव रॉय आर. चंद्रन ने संयुक्त रूप से केरल सरकार से CMO और अन्य जूनियर डॉक्टरों के वेतन की तत्काल समीक्षा का आग्रह किया है। उन्होंने इसे व्यावसायिक सम्मान और स्वास्थ्यसेवा की दीर्घकालिक सुरक्षा दोनों से जोड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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