मुंबई के कुर्ला में भूस्खलन से 6 की मौत, 4 घायल; बीएमसी-एनडीआरएफ का रेस्क्यू जारी
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के कुर्ला (पश्चिम) स्थित अशोक नगर, टेकड़ी क्रमांक 3 पर बुधवार, 12 अगस्त की तड़के हुए भूस्खलन में 6 लोगों की मौत की पुष्टि प्रशासन ने की है, जबकि 4 घायलों का उपचार कुर्ला भाभा अस्पताल में चल रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा चॉल के दो से तीन घरों पर आ गिरा, जिससे सोती हुई आबादी को संभलने का मौका भी नहीं मिला।
हादसे का घटनाक्रम
रात 3 बजे से 3:45 बजे IST के बीच, जब अधिकांश निवासी गहरी नींद में थे, मूसलाधार बारिश से भीगी पहाड़ी की मिट्टी और मलबा अचानक नीचे की ओर खिसक गया और चॉल के कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। यह ऐसे समय में हुआ जब मुंबई पहले से ही मानसून की अत्यधिक वर्षा से जूझ रही थी। सूचना मिलते ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी), मुंबई अग्निशमन दल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), मुंबई पुलिस और 108 एम्बुलेंस सेवाएँ मौके पर पहुँचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।
मृतकों और घायलों की पहचान
राजावाड़ी अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शीतल राउत ने बताया कि अस्पताल लाए जाने पर निम्नलिखित छह लोगों को मृत घोषित किया गया: मोहम्मद समीर अंसारी (14 वर्ष), साहिल हुसैन अब्दुल काजी (19 वर्ष), एक अज्ञात व्यक्ति (लगभग 45 वर्ष), अबान आरिफ शेख (2 वर्ष), मन्नत आरिफ शेख (4 वर्ष) और मर्जिना आरिफ शेख (27 वर्ष)।
कुर्ला भाभा अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वर्मा ने बताया कि घायल सोहेल अंसारी (18 वर्ष), मोहम्मद अंसारी (14 वर्ष), नईमुद्दीन इकबाल खान (28 वर्ष) और साजिद अंसारी (16 वर्ष) का उपचार जारी है और सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है।
महापौर की प्रतिक्रिया और राहत घोषणा
मुंबई की महापौर रितू तावडे ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वे घटनास्थल पर पहुँचीं और बचाव कार्यों का स्वयं निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों को सांत्वना देते हुए प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
महापौर ने घोषणा की कि हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को ₹4 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि घायलों को ₹50,000 की चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि घटनास्थल तक पहुँचने का रास्ता अत्यंत संकरा होने के कारण बचाव दल को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास युद्धस्तर पर जारी हैं।
आम जनता पर असर और सुरक्षा चिंताएँ
गौरतलब है कि मुंबई में पहाड़ी ढलानों पर बसी अनधिकृत बस्तियाँ हर मानसून में भूस्खलन के खतरे से जूझती हैं। अशोक नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में चॉल-शैली के मकान विशेष रूप से असुरक्षित होते हैं। यह हादसा इस बात की याद दिलाता है कि शहरी विस्तार और जलवायु परिवर्तन के दोहरे दबाव में मुंबई की पहाड़ी बस्तियों के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है।
बचाव अभियान की स्थिति
बीएमसी के अधिकारियों, एनडीआरएफ की टीमों और मुंबई अग्निशमन दल के जवानों ने मिलकर मलबा हटाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। प्रशासन ने बताया कि बचाव कार्य पूरा होने तक स्थिति पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है। आने वाले घंटों में मृतकों की संख्या में बदलाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।