मुंबई के कुर्ला में भूस्खलन: गौसिया चाल में 2 की मौत, 6-8 लोग अभी भी मलबे में दबे
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के कुर्ला (पश्चिम) स्थित चिराग नगर की गौसिया चाल में 12 अगस्त 2026 की सुबह 4:32 बजे भारी बारिश के चलते भूस्खलन हो गया, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और 2 अन्य घायल हो गए। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुसार 6 से 8 लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है और बचाव अभियान जारी है।
हादसे का घटनाक्रम
मुंबई फायर ब्रिगेड के अनुसार भूस्खलन बुधवार, 12 अगस्त की सुबह ठीक 4:32 बजे हुआ। तेज बारिश के कारण चाल के समीप बने 2-3 कमरों पर मलबा आ गिरा, जिससे अंदर सो रहे लोग उसमें दब गए। सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, एम्बुलेंस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और BMC के संयुक्त दल ने मौके पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।
मृतकों और घायलों की पहचान
राजावाड़ी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल ने साहिल अंसारी (28 वर्ष) और मोहम्मद समीर (14 वर्ष) को मृत घोषित किया। दोनों शव मलबे से निकालकर राजावाड़ी अस्पताल भेजे गए। मलबे से बचाए गए दो घायलों की पहचान सोहेल अंसारी (18 वर्ष) और मोहम्मद अंसारी (14 वर्ष) के रूप में हुई है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
बचाव अभियान और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
घटनास्थल पर BMC, दमकल विभाग, पुलिस, एम्बुलेंस और NDRF के 50 से अधिक कर्मचारी तैनात हैं। BMC मेयर रितु तावड़े और अतिरिक्त नगर आयुक्त (पूर्वी उपनगर) अविनाश ढाकने ने भूस्खलन स्थल का दौरा कर राहत कार्य का जायजा लिया। डीसीपी गणेश शिंदे ने बताया, 'बारिश के कारण घाटकोपर पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अशोकनगर इलाके में भूस्खलन हुआ है। अभी तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं और बचाव अभियान जारी है।'
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मुंबई में मानसूनी बारिश का दौर फिलहाल जारी रहेगा। विभाग ने मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई में मानसून पहले से ही सामान्य से अधिक सक्रिय है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
आगे की स्थिति
बचाव दल मलबे में दबे शेष लोगों को निकालने के प्रयास में जुटा है। गौरतलब है कि मुंबई में हर मानसून सीजन में पुरानी और जर्जर चालों के आसपास भूस्खलन की घटनाएँ होती हैं, जो शहर के उन इलाकों में बुनियादी ढाँचे की नाजुकता को उजागर करती हैं जहाँ घनी आबादी ढलान के किनारे बसी है।